Homeछत्तीसगढ़गोबर से बनेगा रोजगार, ग्रामीण महिलाओं को मिला स्वरोजगार का नया हुनर

गोबर से बनेगा रोजगार, ग्रामीण महिलाओं को मिला स्वरोजगार का नया हुनर

गृहिणी एनजीओ का दो दिवसीय गौ आधारित उत्पाद निर्माण प्रशिक्षण, 30 स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने लिया प्रशिक्षण

तिल्दा नेवरा –ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और स्थानीय संसाधनों के माध्यम से आय का अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में गृहिणी एनजीओ ने नई पहल शुरू की है। गृहिणी समिति महिला सशक्तिकरण केंद्र कुथरौद में दो दिवसीय गौ आधारित उत्पाद निर्माण प्रशिक्षण आयोजित किया गया। प्रशिक्षण का उद्देश्य महिलाओं को गोबर से उपयोगी एवं बाजार में मांग वाले उत्पाद तैयार करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण देकर उन्हें स्वरोजगार और उद्यमिता से जोड़ना रहा।

प्रशिक्षण का शुभारंभ रूपा श्रीवास्तव एवं कंचन पटेल की उपस्थिति में हुआ। प्रशिक्षक तोमेश वर्मा एवं मधु वर्मा ने महिलाओं को गोबर से विभिन्न उपयोगी एवं सजावटी उत्पाद तैयार करने की विधि बताई।

प्रशिक्षण के दौरान मुख्य रूप से गोबर से सजावटी दीये और हवन गोबर केक तैयार करने का प्रशिक्षण दिया गया। महिलाओं को मोल्ड की सहायता से उत्पाद बनाने, आवश्यक कच्चे माल, उत्पादन प्रक्रिया, कच्चे माल के स्रोत, पैकेजिंग, लागत निर्धारण और बाजार की संभावनाओं की जानकारी दी गई।

महिलाओं को बताया गया कि घर में आसानी से उपलब्ध सामग्री का उपयोग कर कम लागत में इन उत्पादों का निर्माण किया जा सकता है। इसके जरिए महिलाएं घरेलू स्तर पर उत्पादन शुरू कर अतिरिक्त आय का साधन विकसित कर सकती हैं।

उद्यमिता और बाजार से जुड़ने की दी जानकारी

प्रशिक्षण में उत्पाद की गुणवत्ता, आकर्षक पैकेजिंग, लागत एवं मूल्य निर्धारण, ग्राहकों की आवश्यकता और बाजार से उत्पादों को जोड़ने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी जानकारी दी गई। प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं ने स्वयं उत्पाद तैयार करने का अभ्यास किया और इनके व्यवसायिक उपयोग एवं बिक्री की संभावनाओं को समझा।

इस प्रशिक्षण में आसपास के गांवों की 30 स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। भविष्य में महिलाओं को घरेलू अथवा समूह स्तर पर उत्पादन शुरू करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। तैयार उत्पादों की बिक्री स्थानीय बाजार के साथ-साथ संस्थागत स्तर पर भी किए जाने की योजना है।

गृहिणी एनजीओ की ओर से बताया गया कि महिलाओं को आत्मनिर्भर एवं स्वरोजगार से जोड़ने के लिए आगे भी निःशुल्क कौशल एवं उद्यमिता आधारित प्रशिक्षण आयोजित किए जाएंगे। आगामी प्रशिक्षणों में धूपबत्ती, लक्ष्मी-गणेश, लक्ष्मी-पार्वती की मूर्तियों सहित अन्य उपयोगी एवं सजावटी गौ आधारित उत्पादों को भी शामिल किया जाएगा।

इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं की स्थानीय संसाधनों से जुड़ी क्षमता को व्यावसायिक कौशल में बदलना और उन्हें उत्पादन एवं विपणन से जोड़कर आर्थिक रूप से सशक्त एवं आत्मनिर्भर बनाना है।

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