छिंदवाड़ा। जुन्नारदेव विकासखंड के बिचबेहरी गांव स्थित सरकारी स्कूल में छात्राओं द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों ने शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। छात्राओं का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है, जिसमें वे स्कूल के दो शिक्षकों पर पढ़ाई नहीं कराने और बच्चों की समय से पहले छुट्टी करने के आरोप लगा रही हैं।
छात्राओं का आरोप है कि स्कूल का निर्धारित समय शाम 4 बजे तक है, लेकिन उन्हें करीब 3 बजे ही घर भेज दिया जाता है। बच्चों ने यह भी आरोप लगाया कि दोनों शिक्षक स्कूल में पढ़ाने के बजाय मोबाइल में व्यस्त रहते हैं और बच्चों के चले जाने के बाद बाथरूम में बंद हो जाते हैं। छात्राओं ने शिक्षकों के आपत्तिजनक व्यवहार का आरोप लगाया है।
बताया जा रहा है कि 15 अगस्त को छात्राओं ने शिक्षकों के कथित व्यवहार से संबंधित वीडियो बनाया, जिसके बाद यह मामला सामने आया। इसके बाद मामला ग्रामसभा से होते हुए कलेक्टर की जनसुनवाई तक पहुंचा।
ग्रामीणों ने की शिक्षकों को हटाने की मांग
छात्राओं के परिजनों और ग्रामीणों का कहना है कि बच्चे छोटी उम्र के हैं। स्कूल में शिक्षकों के कथित अनुचित व्यवहार का बच्चों पर गलत प्रभाव पड़ सकता है। ग्रामीणों ने दोनों शिक्षकों को स्कूल से हटाकर दूसरे शिक्षकों की नियुक्ति करने की मांग की है।
ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि शिक्षकों की शिकायत पहले विकासखंड शिक्षा अधिकारी और जनजातीय कार्य विभाग के अधिकारियों से की जा चुकी थी, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद 16 अगस्त को ग्रामसभा में भी दोनों शिक्षकों को हटाने की मांग उठाई गई।
जांच के आदेश, शिक्षकों को हटाने की बात
मामले की गंभीरता को देखते हुए आदिवासी विकास विभाग के सहायक आयुक्त सत्येंद्र सिंह मरकाम ने जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने बताया कि दोनों शिक्षकों को स्कूल से हटा दिया गया है और एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं। जांच के बाद आरोप सही पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
शिक्षक नाम बोले—साजिश के तहत बदकिया जा रहा
वहीं, संबंधित शिक्षक ने आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि उन्हें बेवजह बदनाम किया जा रहा है। शिक्षक का दावा है कि किसी अन्य व्यक्ति ने गेस्ट टीचर के लिए आवेदन किया है और उसका नाम वेटिंग लिस्ट में है। उन्हें हटवाकर दूसरे व्यक्ति की नियुक्ति कराने के उद्देश्य से बच्चों को बहकाकर यह आरोप लगवाए जाने की आशंका उन्होंने जताई है।अब जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि छात्राओं द्वारा लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है। फिलहाल शिक्षा विभाग की कार्रवाई और जांच रिपोर्ट पर सभी की नजरें टिकी हैं

