इलाज के दौरान चार मौतों से स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल
इंजेक्शन लगाने के बाद महिला की मौत, कथित झोलाछाप के इलाज के बाद मासूम ने तोड़ा दम; ऑपरेशन और मलेरिया के इलाज के बाद भी गई जान
रायपुर। छत्तीसगढ़ में अलग-अलग स्थानों से इलाज के दौरान चार लोगों की मौत के मामले सामने आए हैं। मृतकों में दो महिलाएं और दो बच्चे शामिल हैं। चारों मामलों में परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की है। हालांकि, मौत की वास्तविक वजह जांच, पोस्टमॉर्टम और मेडिकल रिपोर्ट सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

एक ओर जहां कोंडागांव जिले में लैब टेक्नीशियन पर महिला को इंजेक्शन लगाने के बाद उसकी तबीयत बिगड़ने और मौत होने का आरोप है, वहीं बलरामपुर में कथित झोलाछाप डॉक्टर के इलाज के बाद तीन साल के बच्चे की मौत हो गई। मनेंद्रगढ़ में गर्भाशय के ऑपरेशन के बाद महिला की हालत बिगड़ी और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। वहीं सुकमा जिले में पांचवीं कक्षा की छात्रा की मलेरिया के इलाज के दौरान मौत होने का मामला सामने आया है।
कोंडागांव : इंजेक्शन लगाने के बाद महिला की मौत
कोंडागांव जिले के विश्रामपुरी क्षेत्र में ग्राम पिटेचुआ कोटवारपारा निवासी मिथिला नेताम (35) की इलाज के दौरान मौत हो गई। बताया गया कि मिथिला सर्दी-खांसी से परेशान थी। उसके पति सुनील कुमार नेताम 18 अगस्त की सुबह उसे ब्लड टेस्ट कराने के लिए लैब टेक्नीशियन सहदेव वर्मा के घर लेकर गए थे।
परिजनों के मुताबिक, ब्लड सैंपल लेने के बाद सहदेव वर्मा ने मिथिला के हाथ में इंजेक्शन लगाया। इंजेक्शन लगने के कुछ ही देर बाद उसकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। वह बेहोश हो गई और उसकी हालत गंभीर हो गई।
इसके बाद परिजन उसे तत्काल विश्रामपुरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे। वहां डॉक्टरों ने जांच के बाद मिथिला को मृत घोषित कर दिया। परिजनों ने इंजेक्शन लगाए जाने के बाद तबीयत बिगड़ने और मौत होने को लेकर सवाल उठाए हैं।
विश्रामपुरी बीएमओ डॉ. अनुराग भारती ने मामले की जांच की बात कही है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि महिला की मौत की वास्तविक वजह क्या थी और इसमें किसी की जिम्मेदारी बनती है या नहीं।
बलरामपुर : कथित झोलाछाप के इलाज के बाद तीन साल के बच्चे की मौत
बलरामपुर जिले के कोतवाली थाना क्षेत्र में तीन साल के बच्चे की मौत का मामला सामने आया है। ग्राम जमुआटांड़ निवासी अभीस चेरवा (3) बुखार से पीड़ित था। परिजनों के अनुसार, तबीयत खराब होने पर वे उसे सरनाडीह गांव में भूलेश्वर सिंह के पास इलाज के लिए लेकर गए थे।
परिजनों का आरोप है कि इलाज के दौरान बच्चे को इंजेक्शन लगाया गया। इंजेक्शन लगाने के बाद उसकी तबीयत अचानक और ज्यादा बिगड़ गई। परिजन उसे लेकर घर की ओर जाने लगे, लेकिन रास्ते में ही बच्चे की मौत हो गई।
घटना की जानकारी मिलने के बाद कोतवाली पुलिस ने मर्ग कायम किया और शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया। पुलिस के अनुसार पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और जांच के बाद ही बच्चे की मौत की वास्तविक वजह सामने आएगी। इसके बाद ही यह तय किया जा सकेगा कि मौत के लिए किसी व्यक्ति की जिम्मेदारी बनती है या नहीं।
मनेंद्रगढ़ : गर्भाशय के ऑपरेशन के बाद महिला की मौत
मनेंद्रगढ़ के मेट्रो हॉस्पिटल में ऑपरेशन के बाद 35 वर्षीय महिला की मौत का मामला सामने आया है। मृतका की पहचान सिरौली निवासी नीतू सिंह (35) के रूप में हुई है। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर इलाज और ऑपरेशन में लापरवाही का आरोप लगाते हुए सिटी कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई है।
परिजनों के मुताबिक, नीतू सिंह को पेट में दर्द की शिकायत थी। उसे मेट्रो हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। जांच के बाद डॉक्टरों ने गर्भाशय का ऑपरेशन करने की सलाह दी। इसके बाद महिला का ऑपरेशन किया गया।
परिजनों का आरोप है कि ऑपरेशन के बाद नीतू को होश नहीं आया और उसकी हालत लगातार बिगड़ती गई। स्थिति गंभीर होने पर अस्पताल प्रबंधन ने उसे सूरजपुर के एक निजी अस्पताल में रेफर कर दिया। वहां इलाज के दौरान नीतू सिंह की मौत हो गई।
मामले की शिकायत के बाद प्रशासन ने भी कार्रवाई शुरू की है। मनेेंद्रगढ़ के 220 बिस्तरीय शासकीय अस्पताल के अधीक्षक डॉ. स्वप्निल तिवारी के अनुसार, मेट्रो हॉस्पिटल से महिला के इलाज और ऑपरेशन से संबंधित दस्तावेज जब्त कर लिए गए हैं। जिला प्रशासन के निर्देश पर फिलहाल मेट्रो हॉस्पिटल की ओपीडी बंद कर दी गई है।
अब जांच के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि महिला की मौत किन परिस्थितियों में हुई और इलाज अथवा ऑपरेशन में किसी तरह की चिकित्सकीय लापरवाही हुई थी या नहीं।
सुकमा : मलेरिया के इलाज के दौरान पांचवीं की छात्रा की मौत
सुकमा जिले के कोंटा ब्लॉक में पांचवीं कक्षा की छात्रा कृष्णवेणी बारसे की इलाज के दौरान मौत हो गई। परिजनों के मुताबिक, 17 अगस्त को बुखार आने के बाद छात्रा को कोंटा अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
परिजनों का कहना है कि अस्पताल में जांच के बाद छात्रा को मलेरिया बताया गया। अगले दिन उसकी हालत गंभीर होने पर उसे सुकमा जिला अस्पताल रेफर किया गया। जिला अस्पताल ले जाने के दौरान रास्ते में ही छात्रा की मौत हो गई।
छात्रा की मौत के बाद परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
वहीं अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि छात्रा को काफी समय से मलेरिया था और उसे इलाज के लिए देर से अस्पताल लाया गया। ऐसे में छात्रा की मौत बीमारी की गंभीरता के कारण हुई या इलाज में किसी स्तर पर लापरवाही हुई, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
चार मामलों ने खड़े किए स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल
छत्तीसगढ़ के अलग-अलग जिलों से सामने आए इन चार मामलों ने इलाज की व्यवस्था और मरीजों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खासकर इंजेक्शन लगाने के बाद महिला और बच्चे की मौत, ऑपरेशन के बाद महिला की मौत तथा गंभीर बीमारी से जूझ रही छात्रा की मौत के मामलों में परिजन जिम्मेदारी तय करने की मांग कर रहे हैं।
हालांकि, इन सभी मामलों में मौत की वजह और किसी व्यक्ति की जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण जांच, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट तथा चिकित्सकीय दस्तावेजों के आधार पर ही होगा। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग इन मामलों की जांच कितनी गंभीरता से करता है और यदि लापरवाही प्रमाणित होती है तो जिम्मेदारों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है

