तिल्दा-नेवरा
भाजपा शासित तिल्दा-नेवरा नगर पालिका इन दिनों विकास कार्यों को लेकर सवालों के घेरे में है। शहर की बदहाल सड़कों, बंद पड़ी स्ट्रीट लाइटों और वार्डों में अधूरे अथवा गुणवत्ताहीन नजर आ रहे निर्माण कार्यों के बीच सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर नगर पालिका को शासन से मिलने वाली अधोसंरचना मद की तीन करोड़ रुपये की राशि अब तक क्यों नहीं मिली?
जानकारी के मुताबिक शासन द्वारा प्रदेश की नगर पालिकाओं को प्रतिवर्ष अधोसंरचना मद से निर्धारित राशि उपलब्ध कराई जाती है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में तिल्दा-नेवरा नगर पालिका को इस मद से तीन करोड़ रुपये मिले थे, लेकिन वित्तीय वर्ष 2025-26 की राशि अब तक पालिका को प्राप्त नहीं हुई है। दावा है कि प्रदेश की अन्य नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों को निर्धारित राशि जारी की जा चुकी है।
ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि तिल्दा-नेवरा नगर पालिका की राशि आखिर अटकी क्यों है? क्या नगर पालिका के कामकाज को लेकर नगरीय प्रशासन विभाग नाराज है या इसके पीछे कोई प्रशासनिक अथवा तकनीकी वजह है?
राशि अटकी तो विकास कार्यों पर असर
अधोसंरचना मद की राशि नहीं मिलने का असर अब शहर की बुनियादी सुविधाओं पर दिखाई देने की बात कही जा रही है। शहर की कई सड़कें खराब हैं, गलियों में स्ट्रीट लाइटों की स्थिति पर सवाल हैं और कई वार्डों में कुछ महीने पहले बनाई गई सड़कों की गुणवत्ता को लेकर भी नागरिक सवाल उठा रहे हैं।
तिल्दा-नेवरा को बलौदाबाजार विधानसभा क्षेत्र का प्रमुख और बड़ा शहर माना जाता है। ऐसे में शहरवासियों का कहना है कि जिस रफ्तार से शहर का विस्तार हो रहा है, उसके अनुरूप विकास कार्य नजर नहीं आ रहे हैं।
अध्यक्ष-पार्षदों की खींचतान भी बनी चुनौती?
तिल्दा-नेवरा नगर पालिका में आपसी खींचतान कोई नई बात नहीं है। पूर्व में भी अध्यक्ष और पार्षदों के बीच मतभेद तथा राजनीतिक खींचतान के चलते नगर विकास प्रभावित होने के आरोप लगते रहे हैं। वर्तमान कार्यकाल का करीब डेढ़ वर्ष भी विवादों और आरोप-प्रत्यारोप के बीच गुजरने की चर्चाएं हैं।
खास बात यह है कि तिल्दा-नेवरा क्षेत्र से भाजपा विधायक और मंत्री टंकराम वर्मा को विधानसभा चुनाव में बड़ी संख्या में मत मिले थे। ऐसे में स्थानीय लोगों की उम्मीद थी कि सत्ता पक्ष के विधायक के मंत्री बनने के बाद शहर के विकास को और गति मिलेगी। लेकिन वर्तमान हालात को देखते हुए नागरिक अब सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर विकास की रफ्तार इतनी धीमी क्यों है?
मंत्री की नाराजगी की चर्चा, लेकिन आधिकारिक पुष्टि नहीं
नगर पालिका के कामकाज को लेकर संबंधित विभाग के मंत्री के नाराज होने की चर्चाएं भी सामने आ रही हैं। हालांकि, मंत्री की नाराजगी और तीन करोड़ रुपये की राशि रोके जाने के बीच सीधे संबंध की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए यह सवाल फिलहाल जांच और स्पष्ट सरकारी जवाब की मांग करता है।
इस पूरे मामले में जब नगर पालिका के मुख्य नगर पालिका अधिकारी अमिताभ शर्मा से चर्चा की गई तो उन्होंने बताया कि अधोसंरचना मद की राशि के लिए पालिका की ओर से पत्र लिखा गया है और जल्द ही राशि मिलने की उम्मीद है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि तीन करोड़ रुपये की यह राशि कब तक नगर पालिका को मिलती है और इसके बाद शहर की सड़क, स्ट्रीट लाइट और अन्य बुनियादी सुविधाओं की तस्वीर कितनी बदलती है।सबसे बड़ा सवाल यही है—आखिर तिल्दा-नेवरा के विकास की फाइल अटकी कहां है?

