तिल्दा-नेवरा आत्मशुद्धि, संयम और तप की प्रेरणा देने वाले दसलक्षण महापर्व के दौरान तिल्दा-नेवरा का जैन समाज भक्ति और आध्यात्मिक साधना में डूबा रहा। मंदिर परिसर में प्रतिदिन अभिषेक, शांतिधारा, पूजन-विधान और धार्मिक अनुष्ठानों के आयोजन हुए। श्रद्धालुओं ने आत्मकल्याण के साथ विश्वशांति और जीव मात्र के कल्याण की मंगलकामना की।
दसलक्षण महापर्व जैन धर्म में आत्मा के दस उत्तम धर्मों—उत्तम क्षमा, मार्दव, आर्जव, शौच, सत्य, संयम, तप, त्याग, आकिंचन्य और ब्रह्मचर्य—की आराधना का पर्व माना जाता है। पर्व के दौरान श्रद्धालुओं ने अपनी क्षमता और संकल्प के अनुसार उपवास, तप एवं संयम की साधना की।

प्रतिदिन सुबह श्रद्धालु मंदिर में एकत्रित होकर अभिषेक एवं शांतिधारा में शामिल हुए। इसके बाद भक्ति-पूजन और विधान का आयोजन हुआ। धार्मिक आयोजनों के दौरान समाजजनों ने मन, वचन और कर्म की शुद्धि के साथ आपसी प्रेम, अहिंसा और सद्भाव का संकल्प लिया।
तपस्वियों की साधना की अनुमोदना
पर्व के दौरान श्रीमती निशा (सुदेश) जैन और श्रीमती नेहा (सुरेंद्र) जैन ने 10 उपवास, जबकि श्रीमती किरण (अशोक) नायक ने 16 कारण व्रत की साधना पूर्ण की। समाजजनों ने तपस्वियों की कठिन साधना और त्याग की अनुमोदना करते हुए उनका उत्साह बढ़ाया।
दसलक्षण पर्व की अंतिम भावना क्षमा और आत्मचिंतन से जुड़ी है। समाजजनों ने कहा कि पर्व हमें क्रोध, अहंकार, वैर और कटुता को त्यागकर क्षमा, मैत्री और सद्भाव को जीवन में अपनाने की प्रेरणा देता है।
कार्यक्रम में जैन समाज के महेंद्र कुमार जैन, मंगल जैन, अध्यक्ष गौरव जैन, महामंत्री शैलेश जैन, कोषाध्यक्ष अमित जैन सहित मनोज जैन, नरेंद्र जैन, राकेश जैन, राजेश जैन, प्रफुल्ल जैन, सुदेश जैन, अनिल जैन, सुरेंद्र जैन, प्रवीण जैन, मनीष जैन, नीटी जैन, सौरभ जैन, नवीन जैन, विकी जैन, रानू जैन, पप्पू जैन, राहुल जैन, निलय जैन सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे। महिला मंडल की सदस्यों ने भी धार्मिक आयोजनों में सक्रिय सहभागिता की।
कल धार्मिक जुलूस
समाज पदाधिकारियों के अनुसार 27 सितंबर को धार्मिक जुलूस निकाला जाएगा। पुरुष सदस्यों से सफेद वस्त्र तथा महिला सदस्यों से महिला मंडल की निर्धारित साड़ी में शामिल होने का आग्रह किया गया है। जुलूस के माध्यम से समाज अहिंसा, संयम, त्याग, क्षमा और आपसी सद्भाव का संदेश देगा।

