“छत्तीसगढ़ में 40 साल पुराने लैंड यूज नियम बदलेंगे, कृषि से औद्योगिक जमीन तक नए प्रतिबंध”
रायपुर। छत्तीसगढ़ में करीब चार दशक पुराने भूमि उपयोग नियमों को बदलने की तैयारी है। राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियम, 1984 में संशोधन का मसौदा तैयार किया है। नए प्रस्ताव में आवासीय, वाणिज्यिक, औद्योगिक, सार्वजनिक-अर्धसार्वजनिक, परिवहन, आमोद-प्रमोद और कृषि भूमि के उपयोग को लेकर अलग-अलग प्रतिबंधित गतिविधियों की सूची तय की गई है। सरकार का कहना है कि इससे भूमि उपयोग व्यवस्था अधिक स्पष्ट, सरल और बदलती जरूरतों के अनुरूप हो सकेगी।
कृषि भूमि पर बड़े वाणिज्यिक प्रोजेक्ट पर शिकंजा
प्रस्तावित व्यवस्था में कृषि भूमि पर बड़े वाणिज्यिक परिसर, बड़े मॉल, उच्च घनत्व वाली आवासीय योजनाओं और विभिन्न श्रेणी के उद्योगों पर रोक का प्रावधान है। हालांकि किफायती जन आवास और एकीकृत उपनगर जैसी कुछ गतिविधियों को प्रस्तावित अपवादों में रखा गया है। यानी कृषि जमीन के उपयोग को मनमाने तरीके से बदलकर बड़े व्यावसायिक प्रोजेक्ट खड़े करने पर रोक लगाने की दिशा में यह बड़ा कदम माना जा रहा है।
औद्योगिक जमीन पर नहीं बनेगी पूरी आवासीय टाउनशिप
औद्योगिक भूमि के मामले में भी नियम सख्त किए जा रहे हैं। प्रस्ताव के मुताबिक पूर्णतः आवासीय टाउनशिप विकसित करने की अनुमति नहीं होगी। हालांकि अनुमत कर्मचारी आवास, छात्रावास और शयनागार को इससे अलग रखा गया है। इसके अलावा स्कूल, संक्रामक रोग अस्पताल, जेल, बड़े परिवहन टर्मिनल, थोक व्यापार, गैस गोदाम और कुछ अन्य असंगत गतिविधियों को भी प्रतिबंधित सूची में रखा गया है।
आवासीय इलाकों में भी कई गतिविधियों पर रोक
रिहायशी भूमि पर गोदाम, कबाड़खाना, बूचड़खाना, कई श्रेणी के उद्योग, गैस गोदाम, ज्वलनशील पदार्थों का भंडारण, बड़े परिवहन टर्मिनल, डेयरी, पोल्ट्री और कुछ अन्य गतिविधियों को प्रतिबंधित करने का प्रस्ताव है। इसका उद्देश्य आवासीय क्षेत्रों में असंगत और प्रदूषणकारी गतिविधियों को रोकना बताया जा रहा है।
वाणिज्यिक जमीन पर भी सीमाएं तय
वाणिज्यिक भूमि पर भी हर तरह की गतिविधि की छूट नहीं होगी। नारंगी, लाल और नीली श्रेणी के उद्योग, खतरनाक या विषैले रसायनों एवं विस्फोटक पदार्थों का भंडारण, पशुपालन, डेयरी, पोल्ट्री, खनन और कुछ अन्य गतिविधियों को प्रतिबंधित करने का प्रस्ताव है।
सरकार का फोकस—नियोजन के साथ विकास
सरकार की प्रस्तावित व्यवस्था का मूल आधार ‘नेगेटिव लिस्ट’ बताया जा रहा है। यानी हर भूमि उपयोग श्रेणी में उन गतिविधियों की सूची होगी, जिन्हें नहीं किया जा सकेगा। जो गतिविधियां प्रतिबंधित सूची में नहीं होंगी, उनके लिए भूमि उपयोग को अधिक लचीला बनाने का प्रयास किया गया है। इससे निवेश, रोजगार और विकास गतिविधियों को गति मिलने की उम्मीद जताई गई है।
हालांकि, फिलहाल यह प्रस्तावित संशोधन है। इसे अंतिम नियम मानना सही नहीं होगा। मसौदे पर आपत्ति और सुझाव आमंत्रित किए गए थे, इसलिए अंतिम अधिसूचना के बाद ही स्पष्ट होगा कि कौन-कौन से प्रावधान किस रूप में लागू होते हैं।

