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सिमगा के रिगनी में तीज मिलन समारोह; महिलाओ ने पुरानी यादो को किया साझा,फिल्मी गानों पर की डांस

सिमगा- सिमगा ब्लाक के ग्राम में रिगनी में  तीज मिलन समारोह का आयोजन किया गया.इस समारोह में तीज मनाने मायकेआई बेटी बहनों अपने सहपाठियो के साथ बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया.आयोजक मंडल की प्रमुख सदानंदनी वर्मा के द्वारा अपने समिति के सदस्यों के साथ मिलकर हर साल तीज मिलन  कार्यक्रम आयोजित किया जाता है,जिसमें मायके आई बहन- बेटियों को आमंत्रित किया जाता है.इस बार भी कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में बेटी बहनों ने अपने सहपाठियों के साथ शामिल होकर खूब इंजॉय किया.

कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की पूजा अर्चना कर की गई उसके बाद केक काटकर कार्यक्रम में उपस्थित सभी को मुंह मीठा कराया गया.सबसे पहले कार्यक्रम में शामिल महिलाओं ने अपने सहपाठी सहेलियों के साथ मिलकर पुरानी यादों को सहेजा और मंच के माध्यम से साझा किया।सहेजकर रखी जब पुरानी यादों को अपनों के बीच शेयर किया तो  कई महिलाओं के आंखों से आंसू छलक आए।गरीबी-अमीरी पढ़ाई-लिखाई से लेकर वर्तमान पस्थितियों के बारे में  एक दूसरे को बताया। इस मौके पर कुछ महिलाओं ने गाने के माध्यम से अपनी बातों को शेयर करते हुए कहा कि “कोई लौटा दे मुझे बीते हुए दिन”इसी दौरान एक महिला ने फूलों का तारों का सबका कहना है एक हजारों में मेरी बहना है. इस गाने की चार लाइन की प्रस्तुति देकर माहौल को गमगीन कर दिया..

उसके बाद हम तो तेरे आशिक हैं सदियों पुराने चाहे तू माने चाहे ना माने जैसे फिल्मी गानों पर सभी ने मिलकर खूब ठुमके लगाए और छत्तीसगढ़ी तीज के गानों पर भी डांस किया। लगभग 6 घंटे तक चले इस कार्यक्रम में विभिन्न खेलकूद आयोजित किए गए.

सबसे पहले कुर्सी दौड़ प्रतियोगिता रखी गई. इस मौके पर सदानंदनी वर्मा ने अपने संबोधन में कहा मुझे आज स्कूल के वो दिन याद आ गये जब स्कुल में कुर्सी दौड़ खेलते समय सारे बच्चे यूं ही कुर्सी दौड़ में भाग लेते थे.जो बच्चे कुर्सी दौड़ में प्रथम आते उन्हें ऐसा लगता मानो उन्होंने कोई बहुत बडा मेडल जीताहै .वो खुशी वाकई दिल को एक सुकून देती थी,लेकिन अब जवानी के इस डगर पर पहंचे तो  ना स्वयं के लिए फुर्सत के पल है, ना दोस्तों के लिए ही समय निकाल पाते है.जिंदगी इतनी अस्त-व्यस्त हो गई कि स्वयं के उलझनों को सुलझाने में समय व्यतीत हो रहे है.

इस कीमती समय में भी यदि कोई सखी-सहेली एक-दूसरे से मिलने के लिए समय निकाल रहे है तो वो वाकई में वह एक मिसाल है, क्यों कि जिंदगी की भागदौड़ में इंसान इतना दौड़ रहे है कि सांस लेने की भी फुर्सत नहीं बचती है.जिंदगी का कोई ठिकाना भी तो नहीं है दोस्तों, क्यों कि आज है कल नही रहेगे,बस आज की जिदगी है कल हम खा तुम कहा, यह कहा नहीं जा सकता है.कार्यक्रम श्यामा वर्मा,मुन्नी वर्मा,हेमीन वर्मा,सुनीता वर्मा,नीरा यदु,दुर्गेश्वरी ध्रुव,कीर्ति वर्मा,ललिता वर्मा, मुकेश्वरी यादव,गायत्री यादव,कांति वर्मा,हेमलता वर्मा,पूनम यादव,ममता वर्मा,पिताम्बर साहू,फलेश्वर साहू आदि शामिल हुए.

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