घटना मणिपुर थाना क्षेत्र में गुरुवार रात की बताई जा रही है। जानकारी के मुताबिक, ट्रेनी DSP निशांत कुर्रे रात करीब 10 बजे दरिमा से अंबिकापुर लौट रहे थे। कंठी और जगदीशपुर के बीच गणेश विसर्जन का जुलूस DJ के साथ निकाला जा रहा था। जुलूस के कारण सड़क पर वाहनों की आवाजाही प्रभावित थी।
DSP ने जुलूस में शामिल लोगों से रास्ता देने और वाहन को साइड करने के लिए कहा। इसी बात को लेकर कुछ युवकों से उनकी बहस शुरू हो गई। देखते ही देखते विवाद बढ़ गया और आरोप है कि करीब 12 युवकों ने DSP को घेरकर उनके साथ मारपीट शुरू कर दी।
वर्दी वाले अधिकारी की कार भी नहीं छोड़ी
आरोप है कि युवकों ने DSP की निजी कार में भी तोड़फोड़ की। कार के शीशे फोड़ दिए गए और वाहन को नुकसान पहुंचाया गया। मारपीट में DSP को मामूली चोटें आई हैं।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची। मणिपुर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 6 संदिग्धों को हिरासत में लिया है। पुलिस अन्य आरोपियों की पहचान और तलाश में जुटी है।
सवाल सिर्फ DSP पर हमले का नहीं, कानून के सम्मान का है
यह घटना महज सड़क पर साइड देने को लेकर हुआ विवाद नहीं है। अगर पुलिस अधिकारी को ही भीड़ घेरकर पीटने और उसकी कार में तोड़फोड़ करने का दुस्साहस होने लगे, तो आम नागरिक की सुरक्षा को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
त्योहार और जुलूस हमारी सामाजिक संस्कृति का हिस्सा हैं, लेकिन किसी भी आयोजन की आड़ में सड़क पर दबंगई, हुड़दंग और कानून हाथ में लेने की छूट नहीं दी जा सकती। पुलिस की मौजूदगी और समझाइश के बावजूद अगर भीड़ हिंसा पर उतर आती है, तो यह प्रशासन के लिए भी गंभीर चेतावनी है।
वहीं इस मामले में पुलिस की कार्रवाई कितनी प्रभावी और कितनी सख्त होती है, यह आगे देखने वाली बात होगी। कानून का डर केवल आम आदमी के लिए नहीं, बल्कि हर उस व्यक्ति के लिए समान होना चाहिए जो सड़क पर भीड़ की ताकत के भरोसे नियमों को चुनौती देता है।
SDOP ने क्या कहा?
अंबिकापुर SDOP राकेश बघेल के मुताबिक, दरिमा थाना प्रभारी निशांत कुर्रे इलाके के दौरे पर थे। DJ के कारण रास्ता बाधित होने पर उन्होंने गणेश विसर्जन में शामिल लोगों को रास्त देने और जुलूस व्यवस्थित करने की समझाइश दी थी। इसी दौरान विवाद हुआ और उन पर हमला कर दिया गया। पुलिस मामले की जांच कर रही है