रायपुर। राजधानी की केंद्रीय जेल एक बार फिर गंभीर आरोपों को लेकर चर्चा में है। जेल की व्यवस्थाओं से जुड़े कथित फोटो और वीडियो सामने आने के बाद जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। कैदियों के परिजनों की ओर से जेल प्रहरियों पर पैसे लेकर सुविधाएं उपलब्ध कराने, मुलाकात में कथित तौर पर बाधा डालने और पैसे नहीं देने पर मारपीट किए जाने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
परिजनों का दावा है कि जेल में कुछ सुविधाओं के बदले कथित तौर पर ऑनलाइन भुगतान की मांग की जाती है। इसके लिए ऑनलाइन पेमेंट के स्क्रीनशॉट भी सामने आने की बात कही जा रही है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना अभी बाकी है।
बताया जा रहा है कि वकीलों और परिजनों से मुलाकात के मामले में भी कथित वसूली के आरोप लगाए गए हैं। आरोप है कि पैसे नहीं देने पर कैदियों को परेशान किया जाता है और कुछ मामलों में मारपीट तक की जाती है।
मामले को और गंभीर इसलिए माना जा रहा है क्योंकि जेल के अंदर के बताए जा रहे फोटो और वीडियो भी परिजनों के माध्यम से बाहर आने की बात सामने आई है। सवाल यह है कि यदि जेल परिसर में मोबाइल या रिकॉर्डिंग प्रतिबंधित है, तो ये फोटो-वीडियो बाहर कैसे पहुंचे?
रायपुर सेंट्रल जेल से पहले भी जेल के भीतर से वीडियो सामने आने के मामले रिपोर्ट हो चुके हैं। अक्टूबर 2025 में बैरक नंबर-15 से कैदियों के वीडियो और फोटो वायरल होने के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठे थे। जनवरी 2026 में मुलाकात कक्ष से एक महिला द्वारा वीडियो बनाए जाने का मामला भी सामने आया था, जिस पर जेल अधीक्षक ने जांच की बात कही थी।
इस बार सामने आए आरोपों में जेल अधिकारी अंकित खरे पर भी गंभीर आरोप लगाए जाने की बात कही जा रही है। एक कैदी के हवाले से दावा किया गया है कि उसके पैर में गंभीर चोट पहुंचाई गई और पैर फ्रैक्चर होने की बात कही गई। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित मेडिकल रिकॉर्ड की जानकारी फिलहाल स्पष्ट नहीं है।
पूरे मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि क्या जेल के भीतर वास्तव में पैसे लेकर सुविधाएं उपलब्ध कराने का कोई नेटवर्क संचालित हो रहा है? क्या ऑनलाइन भुगतान के जरिए रकम ली जा रही है? और यदि कैदियों के साथ मारपीट के आरोप सही हैं तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी?
इन आरोपों की निष्पक्ष जांच जरूरी है, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई हो सके। वहीं जेल प्रशासन का पक्ष सामने आने के बाद तस्वीर और स्पष्ट होगी।

