रायपुर
मरीज के लिए डॉक्टर भगवान का दूसरा रूप माना जाता है…
लेकिन अगर इलाज के नाम पर ही पैसों का खेल शुरू हो जाए, तो सवाल सिर्फ एक मरीज का नहीं… बल्कि पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठता है।
छत्तीसगढ़ में अब आयुष्मान कार्ड से कथित फर्जी इलाज और अनियमितताओं की शिकायतों ने स्वास्थ्य विभाग को अस्पतालों की जांच के लिए मजबूर कर दिया है।
बुधवार को प्रदेश के 100 से ज्यादा अस्पतालों में एक साथ स्वास्थ्य विभाग की टीमें पहुंचीं। रायपुर समेत कई जिलों के सरकारी और निजी अस्पतालों तथा नर्सिंग होम में दस्तावेज खंगाले जा रहे हैं।
सवाल बड़ा है—क्या मरीज के नाम पर आयुष्मान योजना का गलत इस्तेमाल किया गया?क्या बिना उचित इलाज के क्लेम किए गए?और क्या इस पूरे खेल में अस्पतालों के साथ कोई बिचौलिया नेटवर्क भी सक्रिय था?

🔴 अस्पतालों में अचानक पहुंची टीमें
स्वास्थ्य विभाग की अलग-अलग टीमों ने अस्पतालों में पहुंचकर आयुष्मान कार्ड से जुड़े इलाज, मरीजों के रिकॉर्ड, दस्तावेज और क्लेम से संबंधित जानकारी की जांच शुरू की है।
जांच का मकसद यह पता लगाना है कि योजना के तहत किए गए इलाज और उसके दस्तावेजों में किसी तरह की गड़बड़ी या अनियमितता तो नहीं हुई।
🔴 बीजू स्वास्थ्य कार्ड को लेकर भी जांच
जानकारी के मुताबिक ओडिशा की बीजू स्वास्थ्य योजना से जुड़े मामलों की भी जांच की जा रही है।
छत्तीसगढ़ के कुछ अस्पतालों में पात्र मरीजों को इस योजना के तहत इलाज की सुविधा मिलने की बात सामने आई है।
ऐसे में स्वास्थ्य विभाग रिकॉर्ड की पड़ताल कर रहा है कि योजना के तहत दर्ज इलाज और वास्तविक उपचार में कोई अंतर तो नहीं है।
🔴 अब अस्पतालों में मचा हड़कंप
सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर जांच में फर्जीवाड़ा या गंभीर अनियमितता सामने आती है, तो जिम्मेदार कौन होगा?
अस्पताल प्रबंधन…
योजना से जुड़े जिम्मेदार लोग…
या फिर मरीजों और सरकारी योजना के बीच सक्रिय कथित बिचौलिये?
फिलहाल स्वास्थ्य विभाग की जांच जारी है और अभी किसी अस्पताल को दोषी घोषित नहीं किया गया है।
जांच पूरी होने के बाद ही साफ होगा कि किन अस्पतालों में क्या गड़बड़ी मिली और जिम्मेदार लोगों पर क्या कार्रवाई होती है।
आयुष्मान योजना का उद्देश्य जरूरतमंद मरीजों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराना है…लेकिन अगर सरकारी स्वास्थ्य योजना में ही गड़बड़ी होती है, तो इसका सबसे बड़ा नुकसान उस गरीब मरीज को होता है, जिसके लिए इलाज की उम्मीद ही इस योजना का आधार है।अब सबकी नजर स्वास्थ्य विभाग की जांच पर है…क्योंकि 100 से ज्यादा अस्पतालों में हुई यह कार्रवाई सिर्फ छापेमारी नहीं, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था की पारदर्शिता की बड़ी की बड़ी परीक्षा भी है।

