भाई की कलाई पर डोर बंधते ही बोलेगी राखी- ‘भैया मेरे, राखी के बंधन को निभाना
तिल्दा-नेवरा। भाई-बहन के पवित्र रिश्ते और प्यार के पर्व रक्षाबंधन में अब महज एक सप्ताह का समय शेष रह गया है। त्योहार नजदीक आते ही बाजार भी रंग-बिरंगी राखियों से पूरी तरह सजकर तैयार हो गए हैं। थोक विक्रेताओं के यहां राखियों की अधिकांश खेप बिक चुकी है और अब बाजार में राखियों की नई-नई वैरायटी लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही है।
इस बार बाजार में बोलने वाली राखियां खास आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। इन राखियों की डोर भाई की कलाई पर बंधते ही इनमें रिकॉर्ड की गई आवाज सुनाई देती है। एक राखी में “भैया मेरे, राखी के बंधन को निभाना” गीत बजता है। इसकी कीमत करीब 75 से 100 रुपये तक है। इसी तरह दूसरी बोलने वाली राखियों में “राखी बंधन है ऐसा” जैसे गीत बजने के साथ आरती भी शुरू हो जाती है। बच्चों और युवतियों के बीच ऐसी राखियों की खास मांग देखी जा रही है।
बाजार में सामान्य डोर वाली राखियां 2 रुपये से लेकर 50 रुपये तक उपलब्ध हैं। इसके अलावा ब्रेसलेट राखी, चांदी की डोर, चांदी की राखी, रेशम और सोने की डोर के साथ ही सोने की राखियां भी बाजार में मौजूद हैं। महंगी राखियों की ओर भी ग्राहकों का रुझान देखने को मिल रहा है।
राखी के थोक विक्रेता रवि मोटवानी के अनुसार इस बार बाजार में महंगी राखियों की मांग ज्यादा है। वहीं रमेश विरानी ने बताया कि सस्ती राखियों की खपत अपेक्षाकृत कम है। थोक बाजार में अब राखियां नाममात्र ही बची हैं। अधिकांश फुटकर दुकानदारों ने करीब एक महीने पहले ही राखियों की खरीदारी कर ली थी।
रक्षाबंधन पर अब बहनें केवल भाई की कलाई पर ही राखी नहीं बांधतीं, बल्कि भाभी के लिए लुंबा राखी भी खरीदती हैं। बाजार में लुंबा की भी कई आकर्षक वैरायटी उपलब्ध हैं, जिनकी कीमत 10 रुपये से लेकर 1000 रुपये तक है। इसके अलावा सोने और चांदी के लुंबा भी बाजार में मौजूद हैं। कुल मिलाकर रक्षाबंधन से पहले बाजार में राखियों की रौनक देखते ही बन रही है।

