रायपुर। छत्तीसगढ़ में बुधवार, 12 अगस्त को हरेली पर्व के अवसर पर पूरे प्रदेश में सार्वजनिक अवकाश रहेगा। राज्य सरकार के आदेश के बाद इस दिन सरकारी कार्यालयों के साथ स्कूल-कॉलेजों में भी छुट्टी रहेगी। हरेली पर्व को लेकर प्रदेशभर में तैयारियां पूरी हो चुकी हैं और गांव से लेकर शहर तक तिहार का उत्साह नजर आने लगा है।
सरकारी कार्यालय, स्कूल-कॉलेज और बैंक रहेंगे बंद
हरेली के अवसर पर प्रदेश के सरकारी कार्यालयों में अवकाश रहेगा। इसके अलावा स्कूलों और कॉलेजों में भी छुट्टी रहेगी। सार्वजनिक अवकाश के चलते कई अन्य संस्थानों में भी कामकाज प्रभावित रहेगा। प्रदेशभर में बुधवार को हरेली पर्व धूमधाम से मनाया जाएगा। मुख्यमंत्री निवास में भी हरेली तिहार को लेकर विशेष आयोजन किया जाएगा।
किसानों और पशुधन से जुड़ा है हरेली का पर्व
छत्तीसगढ़ का पारंपरिक हरेली पर्व सावन माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को मनाया जाता है। हरेली का अर्थ ही हरियाली से जुड़ा है। बारिश के मौसम में जब खेत-खलिहान और धरती हरियाली की चादर ओढ़ लेते हैं, तब किसान इस पर्व को उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाते हैं।
हरेली के दिन किसान अपने कृषि उपकरणों की साफ-सफाई कर उनकी पूजा करते हैं। हल, नांगर, कुदाली, फावड़ा और गैंती जैसे खेती-किसानी में उपयोग होने वाले औजारों को धोकर धूप-दीप से पूजा की जाती है। इसके बाद नारियल और गुड़ के चीले का भोग लगाया जाता है।
पशुधन की सेहत के लिए औषधीय परंपरा
हरेली पर्व की एक खास परंपरा पशुधन से भी जुड़ी है। इस दिन पशुओं के स्वास्थ्य और उनकी रक्षा के लिए औषधीय सामग्री से तैयार आटे की लोई खिलाई जाती है। ग्रामीण क्षेत्रों में यादव समाज के लोग वनांचल से कंद-मूल और जड़ी-बूटियां लाकर किसानों को उपलब्ध कराते हैं।
गांव के सहाड़ादेव अथवा ठाकुरदेव के पास जंगल से लाई गई जड़ी-बूटियों को उबालकर किसानों को देने की परंपरा भी कई क्षेत्रों में आज तक कायम है। इसके बदले किसान चावल, दाल सहित अन्य सामग्री यादव समाज के लोगों को भेंट करते हैं।
गेड़ी चढ़ने का भी खास उत्साह
हरेली तिहार के साथ गेड़ी चढ़ने की परंपरा भी गहराई से जुड़ी हुई है। ग्रामीण इलाकों में लोग घरों में गेड़ी तैयार करते हैं और बच्चे-बड़े उत्साह के साथ गेड़ी चढ़ते हैं। वहीं महिलाएं घरों में गुड़ के चीले सहित पारंपरिक पकवान तैयार करती हैं।
यानी इस बार 12 अगस्त को प्रदेश में छुट्टी के साथ छत्तीसगढ़ की संस्कृति, परंपरा और किसानों के उत्सव हरेली की रंगत देखने को मिलेगी।

