तिल्दा नेवरा किसी भी शहर की पहचान उसकी सड़कें और सफाई व्यवस्था होती है… लेकिन तिल्दा-नेवरा की तस्वीर कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। लाखों रुपये खर्च कर बनाई गई सड़कें पहली ही बारिश में जवाब दे चुकी हैं। जगह-जगह एक-एक फीट गहरे गड्ढे, उखड़ी हुई सड़कें और रोज हादसों का खतरा… सवाल ये है कि आखिर जनता के टैक्स का पैसा गया कहां? ..”
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हेमू कालानी चौक जाने वाली सड़क
ये गड्डो वाली जो सड़क देख रहे है ये सड़क एक साल पहले लाखो रुपए खर्च कर बनाई गई थी .इसी तरह इस सड़क का निर्माण 10महीने पहले कराया गया था, बारिश ने तिल्दा-नेवरा की इन सड़कों की असलियत सबके सामने ला दी है। कुछ महीने पहले सड़कों का निर्माण लाखों रुपये की लागत से हुआ था, आज उन्हीं सड़कों पर गिट्टी-बजरी बिखरी हुई है और डामर पूरी तरह गायब नजर आ रहा है। गड्डे भी ऐसे की वाहन भूल से भी पानी भरे गड्डे में गई तो तो फिर उसका भगवान ही मालिक है… दुर्गा मंदिर से सिंधी पंचायत भवन तक करीब आधा किलोमीटर की सड़क में सौ से अधिक बड़े-बड़े गड्ढे बन चुके हैं. वहीं दीनदयाल चौक से हेमू कालानी चौक तक भी सड़क की हालत बद से बदतर हो चुकी है। हर गुजरते वाहन के साथ हादसे का खतरा बढ़ता जा रहा है।

विजय लाज वाली सड़क
बारिश के पानी से भरे इन गड्ढों से गुजरना लोगों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। भारी वाहन जैसे ही गुजरते हैं, गंदा पानी राहगीरों के साथ-साथ दुकानों के अंदर तक पहुंच जाता है। दुकानदारों का कारोबार प्रभावित हो रहा है और राहगीर रोज परेशानियों का सामना कर रहे हैं।हालात इतने खराब हैं कि कई लोगों ने खुद ही गड्ढों में मुरूम और गिट्टी डालकर रास्ता समतल करने की कोशिश की है। कुछ दुकानदारों ने गड्ढों के आसपास पत्थर और बैरिकेड लगा दिए हैं, ताकि वाहन धीमी गति से गुजरें और दुर्घटनाएं टाली जा सकें।

स्टेशन रोड
स्थानीय लोगों का आरोप है कि घटिया निर्माण सामग्री के कारण सड़कें सात-आठ महीने में ही उखड़ गईं। वार्ड नंबर 5 और वार्ड नंबर 13 समेत कई इलाकों की सड़कों की हालत ऐसी है, मानो वर्षों से उनकी मरम्मत ही नहीं हुई हो।लोगों का कहना है कि बारिश में इन सड़कों से गुजरते वक्त उन्हें बस एक ही गीत याद आता है— “बाबूजी धीरे चलना… बड़े धोखे हैं इस राह में…” क्योंकि यहां हर कदम पर गड्ढे हैं और हर मोड़ पर हादसे का खतरा।

सिंधी कैम्प रोड
ऐसा नहीं की तिल्दा की ये सिर्फ दो तीन ही सड़के खराब अथवा जर्जर है शहर की अधिकांश सड़के खराब हो चुकी है, साथ ही सड़कों पर कचरा पड़ा दिखता है कई सड़के तो ऐसा लगता है कि ये सड़के सिर्फ कचरे के लिए ही बनाई गई है. हालांकि कचरा नगर पालिका नहीं बल्कि आसपास के रहने वाले लोग फेकते हैं फिर जानवर उस कचरे को फेला देते है ,,लेकिन कचरा फेकने वालो पर कोई कार्रवाई नहीं होती जिसके कारण सड़क कचरे से पटी रहती है..

वार्ड 13 बाबा क्लाथ से पालिका सड़क
इधर नगर पालिका का कहना है कि बारिश के दौरान अस्थायी रूप से गड्ढों की मरम्मत कराई जा रही है। मुख्य नगर पालिका अधिकारी अमिताभ शर्मा के मुताबिक जिन ठेकेदारों ने निर्माण कार्य किया है, उनकी जिम्मेदारी तय करते हुए उन्हें नोटिस जारी किया जाएगा। साथ ही उन्होंने लोगों से अपील की कि बारिश के दौरान नालियों और सड़कों पर कचरा न फेंकें तथा सफाई कर्मचारियों का सहयोग करें। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की भी बात कही गई है।
सीएमओ अभिताब शर्मा

पुराना पेट्रोल पंप रोड
नगर पालिका का दावा है कि जिम्मेदार ठेकेदारों पर कार्रवाई होगी… लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जब सड़क निर्माण के ठेकों में स्पष्ट शर्त होती है कि तय समय से पहले सड़क खराब होने पर उसकी जिम्मेदारी ठेकेदार की होगी, तो फिर अब तक किसी पर सख्त कार्रवाई क्यों नहीं हुई? आखिर जनता के पैसों से बनी सड़कें पहली ही बारिश में क्यों बह गईं? क्या जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी… या फिर मरम्मत के नाम पर सरकारी खजाने से एक बार फिर लाखों रुपये खर्च किए जाएंगे? इसका जवाब अब नगर पालिका और जिम्मेदार अधिकारियों को देना होगा।”कैमरामैन नीरज के साथ, मुकेश कोटवानी, VCN Times, तिल्दा-नेवरा।

