तिल्दा-नेवरा। पति की लंबी उम्र और सुखी दांपत्य जीवन की कामना के लिए मनाया जाने वाला छत्तीसगढ़ का पारंपरिक तीजा पर्व रविवार रात से शुरू हो गया। तिजहारिनों ने व्रत शुरू करने से पहले करू भात ग्रहण किया और इसके बाद निर्जला व्रत की शुरुआत की। सोमवार को महिलाएं पूरे दिन और रात व्रत रखेंगी। मंगलवार सुबह भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना के बाद व्रत का पारण किया जाएगा।
तीजा पर्व को लेकर रविवार को बाजारों में जबरदस्त रौनक देखने को मिली। बड़ी संख्या में महिलाएं पूजा सामग्री, साज-श्रृंगार का सामान, कपड़े और अन्य जरूरी सामानों की खरीदारी करती नजर आईं। कपड़ों के साथ-साथ सोने-चांदी की दुकानों पर भी भारी भीड़ रही। कई दुकानों में इतनी भीड़ रही कि पैर रखने तक की जगह नहीं थी।
ट्रेनों में भी उमड़ी भीड़, जेबकतरों ने उठाया फायदा
तीजा पर्व पर बड़ी संख्या में महिलाएं अपने मायके पहुंचने के लिए सफर करती हैं। इसके चलते रविवार को ट्रेनों में भी भारी भीड़ रही। भीड़ का फायदा जेबकतरों और चोरों ने उठाया। कई महिलाओं के पर्स चोरी होने की शिकायत सामने आई। भीड़भाड़ वाले स्थानों पर महिलाओं को अपने सामान और कीमती वस्तुओं को लेकर सतर्क रहना पड़ा।
भाई लेकर आता है बहन को मायके
छत्तीसगढ़ में तीजा केवल व्रत और पूजा का पर्व नहीं, बल्कि भाई-बहन और मायके से जुड़ी भावनाओं का भी त्योहार है। परंपरा के अनुसार तीजा मनाने के लिए भाई अपनी बहन को ससुराल से मायके लेने जाता है। हालांकि इस बार अधिकांश बहन-बेटियां पोला पर्व के समय ही मायके पहुंच चुकी हैं। कई परिवारों में आज भी भाई अपनी बहन को लेने पहुंच रहे हैं।
तीजा पर्व के दौरान बेटियों के मायके आने से घरों में विशेष रौनक रहती है। घर की महिलाएं पारंपरिक पकवान बनाने में जुटी हुई हैं। ठेठरी, खुर्मी सहित छत्तीसगढ़ी व्यंजनों की खुशबू घर-घर में महसूस हो रही है। बेटियों के आने से मायके में उत्सव का माहौल है।
तीजा के दिन मायके में रहती हैं बहन-बेटियां
तीजा पर्व पर बहन-बेटियों के मायके में रहने की परंपरा छत्तीसगढ़ की संस्कृति का अहम हिस्सा है। इस दौरान महिलाएं घर-परिवार की जिम्मेदारियां संभालती हैं और अपनी मां के साथ समय बिताती हैं। कई माताएं भी बेटी के मायके आने पर उसके साथ ही रहती हैं। हालांकि ऐसी भी कई माताएं हैं जो बेटी के घर आने के बावजूद केवल एक दिन के लिए अपने मायके जाती हैं और फिर भाई उन्हें वापस लेकर आता है।
20 साल बाद तीजा और गणेश चतुर्थी का संयोग
इस बार तीजा पर्व को लेकर एक खास संयोग भी देखने को मिल रहा है। करीब 20 साल बाद तीजा और गणेश चतुर्थी एक ही दिन पड़ने का अवसर आया है। सोमवार को महिलाएं अपने पति की दीर्घायु और सुखी दांपत्य जीवन की कामना से तीजा व्रत रखेंगी, जबकि कुंवारी युवतियां अच्छे वर की कामना के लिए व्रत करेंगी।
रात में महिलाएं विधि-विधान से भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना करेंगी। इसके साथ ही घर-घर में तीजा की पारंपरिक रस्में निभाई जाएंगी। मंगलवार सुबह पूजा के बाद व्रत का पारण होगा।
तीजा पर्व ने एक बार फिर छत्तीसगढ़ की पारंपरिक संस्कृति, भाई-बहन के प्रेम और मायके की यादों को जीवंत कर दिया है। बाजारों की रौनक से लेकर घरों में बन रहे पारंपरिक पकवानों तक, हर तरफ तीजा की खुशियां नजर आ रही हैं।
मां पार्वती ने भगवान शिव के लिए किया था व्रत
मान्यता है कि मां पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए यह व्रत किया था. भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मां पार्वती ने भगवान शिव के लिए हरतालिका तीज का व्रत किया था. इसी मान्यता के चलते शुक्ल पक्ष की तृतीया को यह पर्व मनाया जाता है. महिलाओं का विश्वास है कि इस व्रत को करने से अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है.

