हसदेव नदी में पिकनिक मनाने पहुंचे थे 8 दोस्त, पैर फिसलने के बाद एक को बचाने कूदे दो साथी भी तेज बहाव में बहे
जांजगीर-चांपा। पिकनिक की खुशियां देखते ही देखते मातम में बदल गईं। हसदेव नदी के किनारे सेल्फी लेने के दौरान हुए हादसे में बह गए तीन छात्रों की मौत हो गई। शनिवार को एक छात्र का शव बरामद होने के बाद रविवार को करीब 48 घंटे की तलाश के बाद दो और छात्रों के शव भी बरामद कर लिए गए। दोनों शव नदी में पत्थरों के नीचे बने खोखले हिस्से में फंसे मिले। हादसे के बाद से तीन परिवारों में मातम पसरा हुआ है।

मृतकों की पहचान मुरारी साहू (22), पवन पाल (22) और सचिन सिंह (23) के रूप में हुई है। तीनों बिलासपुर के चौकसे कॉलेज में बी.फार्मा प्रथम वर्ष के छात्र थे। बताया गया कि शुक्रवार को आठ दोस्तों का दल पिकनिक मनाने देवरी गांव पहुंचा था। इनमें चार छात्र और चार छात्राएं शामिल थीं।
एक को बचाने कूदे, खुद भी मौत के आगोश में समा गए
पुलिस के अनुसार मुरारी, पवन और सचिन नदी किनारे सेल्फी ले रहे थे। इसी दौरान पवन का पैर फिसल गया और वह तेज बहाव में बहने लगा। दोस्त को डूबता देख मुरारी और सचिन ने उसे बचाने के लिए नदी में छलांग लगा दी। लेकिन नदी का तेज बहाव तीनों को अपने साथ बहा ले गया।
कुछ ही पलों में हंसी-खुशी का माहौल चीख-पुकार में बदल गया। साथ आए दोस्तों ने घटना की सूचना पुलिस को दी, जिसके बाद रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया।
पुलिस और SDRF ने दो दिन तक चलाया रेस्क्यू
घटना की सूचना मिलते ही बलौदा थाना प्रभारी मनोहर सिन्हा पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। नगर सैनिक गोताखोरों की टीम को बुलाकर नदी में तलाश शुरू कराई गई। इसके बाद बिलासपुर SDRF की टीम ने भी मोर्चा संभाल लिया।
लगातार तलाश के बाद शनिवार को घटनास्थल से करीब चार किलोमीटर दूर पवन पाल का शव बरामद हुआ। इसके बाद रविवार सुबह SDRF की टीम को सफलता मिली। करीब 6:15 बजे मुरारी और 7 बजे सचिन का शव बरामद किया गया।
पत्थरों के नीचे फंसे थे शव
रेस्क्यू टीम को मुरारी और सचिन के शव नदी में पत्थरों के नीचे बने खोखले हिस्से में फंसे मिले। कड़ी मशक्कत के बाद दोनों शवों को बाहर निकाला गया और पोस्टमॉर्टम के लिए अस्पताल भेज दिया गया। पोस्टमॉर्टम के बाद शव परिजनों को सौंपे जाएंगे।
इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर नदी और जलस्रोतों के किनारे लापरवाही से सेल्फी लेने और तेज बहाव वाले स्थानों पर सावधानी नहीं बरतने के खतरे को सामने ला दिया है। जिस पिकनिक की तस्वीरें यादगार बननी थीं, वही तीन परिवारों के लिए जिंदगी भर का दर्द बन गईं।

