तिल्दा नेवरा
तिल्दा नेवरा में भगवान जगन्नाथ जी की रथ यात्रा धूमधाम से निकाली गई जगन्नाथ मंदिर से शुरू हुई रथ यात्रा नगर भ्रमण कर गापाल मंदिर भगवान के मौसी घर आकर समाप्त हुई .यात्रा में हजारो की संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए. माना जाता है कि ब्रह्मांड में एक जगन्नाथ भगवान ही ऐसे भगवान है. जो वर्ष में एक बार बाहर आकर अपने भक्तों को दर्शन देते हैं. प्रसाद के रूप में अपना आशीर्वाद प्रदान करते हैं….
जगत के नाथ अर्थात भगवान जगन्नाथ जी की रथयात्रा गुरुवार आषाढ़ शुक्ल दूज से शुरू हुई..। भक्तों को दर्शन देने के लिए भगवान जगन्नाथ,बहन सुभद्रा और भाई बलभद्र के साथ रथ पर विराजमान होकर प्रजा के हाल जानने नगर भ्रमण पर निकले। इस मौके पर भक्तो ने जगह-जगह भगवान का स्वागत कर आरती की,और फूल बरसाकर आशीर्वाद लिया। तिल्दा नेवरा में यात्रा 75 सालो से गाँधी चौक नेवरा स्थित प्राचीन श्री जगदीश मंदिर से निकली जा रही है ..
जगत के पालनहार भगवान श्री जगन्नाथ जी की रथ यात्रा के लिए सुबह से ही प्राचीन श्रीजगन्नाथ मंदिर में भक्त पहुंचना शुरू हो गए थे। भगवान के स्वस्थ होने पर वैदिक मंत्रों और जयकारों के बीच भगवान जगन्नाथ नई पोशाक पहनकर गर्भ गृह से निकले और नगरवासियों के हाल जानने के लिए रथ पर विराजे। इसके चलते भगवान का रथ आकर्षक सजाया गया था।
दोपहर तीन बजे भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और माता सुभद्रा के रथ पर विराजने के बाद भगवान की भव्य महाआरती पुजारी एवं सैकड़ों भक्तों ने की। आरती के बाद भक्तों ने रथ को हाथों से खींचते हुए आगे बढ़ाया और पुण्य लाभ प्राप्त किया। इस दौरान भगवान के जयकारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। उनके दर्शन के लिए रथ यात्रा में बड़ी संख्या में भक्त शामिल हुए। रथ में जयनारायण ,गोपाल अग्रवाल .कैलाश मामा .दिनेश वैष्णव ,ललित अग्रवाल गजा मुग का प्रसाद वितरणकर रहे थे ..
रथयात्रा शाम 3 बजे भजन मंडलियो के साथ जगदीश मंदिर से शुरू हुई रथ यात्रा सुभाष चौक, अग्रसेन चौक, गुरु नानक चौक, सिंधी कैंप हेमू कॉलोनी चौक होते हुए, स्टेशन चौक मा दुर्गा मंदिर पहुंची। यहां से रथ यात्रा हाई स्कूल रोड के लिए दीनदयाल उपाध्याय चौक, होते हुए नेवर बस्ती पहुंचकर भगवान जगन्नाथ की मौसी के घर गोपाल मन्दिर पहुंच कर समाप्त हुई ..यात्रा के दौरान रास्ते में महिलाएं बच्चो के साथ घरों की छतों और गैलरियों में खड़ी होकर दर्शन लाभ ले रही थी।
भगवान के रथ के खींचने के लिए भक्तों का ताता लगा रहा .शिव अग्रवाल .योगेश गांधी, ,भीखम चंद मुनका, दीनानाथ अग्रवाल,राजेश अग्रवाल,मोती मुनका,अवतार शर्मा ,संजय अग्रवाल. दिलीप अगवाल ,दीपक अग्रवाल, प्रतीक अग्रवाल, रवि गांधी, सुन्दर पंजवानी ,पवन अगवाल SS, जीतू शर्मा,,राजू गांधी ,रथ को खींचते भगवान के जयकारा लगाते हुए चल रहे थे.
एंकर जगन्नाथ मंदिर के पुजारी विजय वैष्णव के अनुसार उत्कल संस्कृति और दक्षिण कोसल की संस्कृति के बीच की यह एक अटूट साझेदारी है। ऐसी मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ का मूल स्थान छत्तीसगढ़ का शिवरीनारायण-तीर्थ है, यहीं से वे जगन्नाथपुरी जाकर स्थापित हुए। शिवरीनारायण में ही त्रेता युग में प्रभु श्रीराम ने माता शबरी के मीठे बेरों को ग्रहण किया था। यहां वर्तमान में नर-नारायण का मंदिर स्थापित है।

