तत्कालीन सरपंच मुकेश वर्मा
मुर्दों के नाम पर पेंशन और मजदूरी का खेल, कोर्ट के आदेश पर सरपंच-सचिव पर FIR
बेलदार सिवनी घोटाला: मृतकों से कराया मनरेगा में काम, 3 साल बाद दर्ज हुआ मामला
‘मुर्दे’ लेते रहे पेंशन और मजदूरी! न्यायालय के आदेश पर खुला भ्रष्टाचार का बड़ा राज
तिल्दा नेवरा । तिल्दा ब्लॉक के ग्राम पंचायत बेलदार सिवनी में कथित भ्रष्टाचार का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि तत्कालीन सरपंच, सचिव और रोजगार सहायक ने पेंशन योजना तथा मनरेगा में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा करते हुए मृत लोगों को भी रिकॉर्ड में जीवित दिखाकर उनके नाम पर राशि निकाली।
मामले की शिकायत वर्ष 2023 में गांव की पूर्व सरपंच उमा पुरैना द्वारा जनपद पंचायत तिल्दा, जिला प्रशासन, मंत्री और मुख्यमंत्री तक की गई थी। आरोप है कि शिकायतों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जिसके बाद शिकायतकर्ता ने न्यायालय की शरण ली।करीब तीन वर्ष तक चले कानूनी संघर्ष के बाद न्यायालय ने प्रथम दृष्टया मामले को गंभीर मानते हुए तत्कालीन सरपंच मुकेश वर्मा, सचिव डागेश्वरी वर्मा और रोजगार सहायक मणिशंकर ध्रुव के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए।
तत्कालीन रोजगार सहायक मणिशंकर
न्यायालय के आदेश पर खरोरा पुलिस ने तीनों के विरुद्ध धारा 420 के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
मृतकों के नाम पर निकाली जाती रही पेंशनआरोप है कि जिन लोगों का निधन हो चुका था, उन्हें रिकॉर्ड में जीवित दर्शाकर कई महीनों तक उनके नाम से पेंशन राशि निकाली जाती रही। शिकायत में कहा गया है कि एटीएम के माध्यम से यह राशि आहरित की गई।
मनरेगा में भी ‘मुर्दों’ को मिला रोजगार
मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू मनरेगा से जुड़ा है। आरोप है कि जिन लोगों की मौत हो चुकी थी, उन्हें मजदूर बताकर उनके नाम पर भुगतान किया गया। जांच के दौरान मृतक तुलसीराम के परिजनों ने उनका मृत्यु प्रमाण पत्र भी दिखाया, जबकि रिकॉर्ड में उनके नाम से 387 दिनों की मजदूरी भुगतान दर्शाई गई थी।इसी तरह मृतक जनकराम के नाम पर भी मनरेगा में काम और भुगतान का उल्लेख मिलने की बात सामने आई है। आरोप है कि कुछ जॉब कार्डों में फर्जी नाम जोड़कर भी भुगतान किया गया।
डेथ सर्टिफिकेट और भुगतान रिकॉर्ड खोल सकते हैं राज
मामले की जांच में पुलिस के लिए सबसे महत्वपूर्ण साक्ष्य मृतकों के मृत्यु प्रमाण पत्र और मनरेगा भुगतान रिकॉर्ड माने जा रहे हैं। यदि मृत्यु की तारीख और कार्य दिवसों का मिलान हुआ तो पूरे फर्जीवाड़े की तस्वीर साफ हो सकती है।अब सबकी निगाहें पुलिस जांच पर टिकी हैं कि तीन साल पुराने इस चर्चित मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है और क्या आरोपियों तक कानून का शिकंजा पहुंच पाता है।


