इंदर कोटवानी
रायगढ़-एक फेसबुक फ्रेंड रिक्वेस्ट… पुरानी पहचान का भरोसा… और फिर ऐसा जाल, जिसमें एक शादीशुदा महिला पूरे 6 साल तक फंसी रही। रायगढ़ में सामने आई यह कहानी सिर्फ एक महिला की नहीं, बल्कि सोशल मीडिया पर भरोसे की उस कीमत की है, जो कई बार जिंदगी भर चुकानी पड़ जाती है। आरोप है कि पुराने सहपाठी ने पहले महिला को अपने झांसे में लिया, फिर उसका अश्लील वीडियो बनाकर उसे ब्लैकमेल करता रहा। बदनामी के डर से महिला छह साल तक चुप रही, लाखों रुपये गंवाती रही और मानसिक प्रताड़ना झेलती रही। आखिरकार जब सहनशक्ति जवाब दे गई, तब सच पति और पुलिस के सामने आया।”
छह साल… जी हां, पूरे छह साल तक एक शादीशुदा महिला डर, धमकी और ब्लैकमेल के ऐसे जाल में कैद रही कि वह न तो अपने पति को सच बता पा रही थी और न ही पुलिस तक पहुंच पहचने की हिम्मत जूटा पा रही थी रायगढ़ में सामने आई यह कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है।पुलिस के मुताबिक पीड़िता और आरोपी स्कूल के दिनों में दोनों ने 10 वीं में साथ पढ़ाई की थी। इसी बीच युवती की शादी हो गई। शादी के बाद दोनों का संपर्क टूट गया था, लेकिन साल 2019 में फेसबुक के जरिए दोनों फिर संपर्क में आए। आरोप है कि दिसंबर 2020 में एक दिन उसने मायके छोड़ने के बहाने युवती को अपनी कार में बैठाया। कुछ दूर सुनसान इलाके में जाकर युवक ने बहला-फुसला कर महिला से कार में ही न केवल सेक्स कर जबरदस्ती संबंध बनया बल्कि उसने उसकी आपत्तिजनक वीडियो भी बना ली।
इसके बाद यही वीडियो महिला की सबसे बड़ी मजबूरी बन गई। बदनामी और परिवार टूटने के डर से वह छह साल तक आरोपी की कथित ब्लैकमेलिंग सहती रही। आरोपी ने वीडियो महिला के पति को दिखाने की धमकी दी। डर से महिला ने इन 6 सालों में उसे किस्तों में जेवर और कैश मिलाकर करीब 35 लाख रुपए दे दिए। इसके बाद भी आरोपी की मांग खत्म नहीं हुई और वह लगातार और पैसे मांगने लगा।”
“सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस दौरान महिला मानसिक रूप से इतनी टूट चुकी थी कि उसने आत्महत्या तक का मन बना लिया था। लेकिन अंतिम समय में उसने हार मानने के बजाय हिम्मत दिखाई, अपने पति को पूरी बात बताई और फिर पुलिस के पास पहुंच आरोपी सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के बंजारी गांव के अनिल ईजारदार (32) के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई. इसके बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 64(2)(उ), 351(3) और 308(2) के तहत मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर उसके कब्जे से मोबाइल फोन व कार भी जब्त कर ली।” पूछताछ के दौरान आरोपी ने अपना अपराध भी स्वीकार कर लिया।अदालत ने आरोपी को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है ।
इस कहानी में सिर्फ एक आरोपी की गिरफ्तारी नहीं है, बल्कि एक बड़ा सबक भी छिपा है। सोशल मीडिया पर पुरानी पहचान का भरोसा कई बार खतरनाक साबित हो सकता है। वहीं ब्लैकमेल का शिकार होने वाले लोग अक्सर बदनामी के डर से चुप रहते हैं और यही चुप्पी अपराधियों की सबसे बड़ी ताकत बन जाती है। रायगढ़ की इस महिला ने छह साल बाद ही सही, लेकिन हिम्मत दिखाई। अब सवाल यह है कि ऐसे मामलों में पीड़ितों तक मदद और भरोसा पहले कैसे पहुंचे, ताकि किसी को डर और ब्लैकमेल के साये में वर्षों तक जीना न पड़े।”

