Homeछत्तीसगढ़पहले थैला भर शक्कर ,अब थैले में पैसे ..महंगाई ने बदला हिसाब

पहले थैला भर शक्कर ,अब थैले में पैसे ..महंगाई ने बदला हिसाब

महंगी शक्कर ने फीकी कर दी मिठास, एक महीने में तेजी से बढ़े दाम; चाय से लेकर मिठाइयों तक पर पड़ा असर

‘तिल्दा नेवरा पहले मुट्ठी में पैसे लेकर थैला भर शक्कर लाते थे , अब थैले में पैसे जाते हैं और मुट्ठी में चक्कर आती  है… हाए महंगाई, महंगाई, महंगाई।’ करीब साढ़े पांच दशक पहले फिल्मी गीत में महंगाई की जो तस्वीर दिखाई गई थी, वह आज के दौर में एक बार फिर सच होती नजर आ रही है।

पिछल कुछ महीनों से खाद्य पदार्थों की कीमतों में लगातार उछाल  देखने को मिल रहा है। चावल सहित कई जरूरी खाद्य वस्तुओं के दाम बढ़े हैं, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा इस समय चीनी और गुड की कीमतों में अचानक आई तेजी को लेकर है। देश के औसत खुदरा भाव के अनुसार 20 जुलाई 2026 को चीनी करीब 45 रुपये किलो थी, जो 22 अगस्त तक बढ़कर करीब63 रुपये किलो पहुंच गई। यानी एक महीने में लगभग 21 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
हालांकि कई स्थानीय बाजारों में तस्वीर इससे भी ज्यादा चिंताजनक है। कुछ जगहों पर चीनी के भाव 65 से 70 रुपये किलो तक पहुंचने की रिपोर्ट सामने आई है।
थोक व्यापारी से लेकर खुदरा दुकानदार तक परेशान
चीनी की कीमत बढ़ने का असर सिर्फ उपभोक्ताओं पर ही नहीं, बल्कि छोटे किराना दुकानदारों पर भी पड़ रहा है। व्यापारियों के मुताबिक पहले एक बोरा 50 किलो चीनी  खरीदने के लिए करीब 1700 से 1800 रुपये तक की लागत लगती थी और खुदरा बिक्री में मामूली मार्जिन रखकर कारोबार किया जाता था। अब यही क्विंटल महंगी दर पर खरीदना पड़ रहा है, जबकि खुदरा व्यापार में कमाई का मार्जिन लगभग उतना ही बना हुआ है।यानी व्यापारी की पूंजी दोगुनी गति से बढ़ रही है, लेकिन मुनाफा उसी अनुपात में नहीं बढ़ रहा। ऐसे में छोटे दुकानदार भी बढ़ती कीमतों से परेशान हैं।

चीनी महंगी तो चाय से मिठाई तक असर
चीनी की कीमत बढ़ने का सीधा असर रोजमर्रा की चीजों पर दिखाई देने लगा है। होटल और चाय दुकानों में चाय के दाम बढ़ने लगे हैं। मिठाई बनाने वालों की लागत बढ़ गई है, जिसका असर मिठाइयों की बिक्री कीमत पर पड़ रहा है। यानी चीनी की बढ़ती कीमत सिर्फ एक किलो चीनी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर आम आदमी की रोजमर्रा की जरूरतों तक पहुंच रहा है।

थोक किराना व्यापारी व संघ के अध्यक्ष सुंदरदास पंजोंवानी ने कहा  कि किराने की दुकान खोले  50 साल से भी अधिक हो गए हैं. लेकिन जिस तेजी के साथ शक्कर के दाम बढे हैं. इसके पहले ऐसी तेजी कभी नहीं देखी गई.. उन्होंने कहा कि जिस तेजी के साथ शक्कर के दाम बढ़ रहे थे.ऐसा लग रहा था शक्कर ₹100 किलो तक पहुंच जाएगी. लेकिन पिछले 6 दिनों से खासकर जब से केंद्र सरकार ने विदेश से आयात होने वाली शक्कर में टैक्स फ्री का ऐलान किया उसके बाद से शक्कर 7 से 8 रुपए कम हुई है उन्होंने कहा कुछ हद तक वायदा बाजार के कारण भी दाम बढ़ गए थे. लेकिन अब शक्कर और गुड़ के दाम कम हुए हैं,बावजूद बहुत ज्यादा है ..

चावल के दाम में भी उछाल
चीनी के साथ चावल की कीमतों में भी बढ़ोतरी की खबरें हैं। कुछ बाजारों में चावल की अलग-अलग किस्मों के दाम में 5 से 10 रुपये किलो तक का उछाल दर्ज किया गया है।लेकिन चावल के बढ़ती कीमत में भी  कमी आई है ,,

आखिर क्यों बढ़ रही चीनी की कीमत?
चीनी की महंगाई के पीछे कम उत्पादन, मौसम से गन्ने की फसल को नुकसान, त्योहारी मांग और बाजार में जमाखोरी-सट्टेबाजी जैसे कारण बताए जा रहे हैं। सरकार ने हालांकि चीनी की कीमत बढ़ने के लिए सीधे इथेनॉल उत्पादन को जिम्मेदार मानने से इनकार किया है।अब सवाल यह है कि आने वाले त्योहारी सीजन में चीनी और चावल समेत रोजमर्रा की खाद्य वस्तुओं के दाम कहां तक पहुंचेंगे और आम आदमी की रसोई का बजट कितना और बिगड़ेगा।कभी महंगाई पर बना फिल्मी गीत लोगों को हंसाता था, लेकिन आज उसी गीत की पंक्तियां आम आदमी की जिंदगी की हकीकत बनती दिखाई दे रही हैं—मुट्ठी में पैसे नहीं, अब महंगाई का चक्कर है।

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