कांकेर -गुरु… यानी वह इंसान, जिसके हाथों में बच्चों का भविष्य सुरक्षित माना जाता है।जिसके सामने एक बच्चा अपने माता-पिता के बाद सबसे ज्यादा भरोसा करता है।
लेकिन कांकेर से सामने आई यह खबर उस भरोसे को झकझोर देने वाली है।
एक शिक्षक ने दसवीं की नाबालिग छात्रा से अश्लील वीडियो मांगे…वीडियो नहीं भेजने पर उसे परीक्षा में फेल करने की धमकी दी…यह सब हुआ उस शिक्षक और छात्रा के बीच, जहां रिश्ता शिक्षा और संस्कार का होना चाहिए था।सवाल सिर्फ एक शिक्षक पर कार्रवाई का नहीं है…सवाल यह है कि स्कूल की चारदीवारी के भीतर बच्चों की सुरक्षा आखिर कितनी सुरक्षित है?
छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के बांदे थाना क्षेत्र में एक शिक्षक पर दसवीं की नाबालिग छात्रा को अश्लील मैसेज और वीडियो भेजने तथा उससे भी आपत्तिजनक फोटो-वीडियो भेजने का दबाव बनाने का आरोप लगा है।..आरोपित शिक्षक की पहचान आशीष मंडल, उम्र 30 वर्ष के रूप में हुई है। वह मरोड़ा हायर सेकेंडरी स्कूल में गणित पढ़ाता था।
पुलिस के मुताबिक, 16 अगस्त को शिक्षक ने एक्स्ट्रा मैथ्स क्लास के दौरान छात्रा का मोबाइल नंबर लिया। इसके बाद कथित तौर पर उसे अश्लील मैसेज और वीडियो भेजे गए और छात्रा से भी आपत्तिजनक वीडियो भेजने का दबाव बनाया गया।
आरोप है कि छात्रा के इनकार करने पर उसे परीक्षा में फेल करने की धमकी दी गई। लगातार मानसिक दबाव से परेशान छात्रा ने आखिरकार अपनी मां को पूरी बात बताई। इसके बाद 20 अगस्त को छात्रा की मां ने बांदे थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के बाद पुलिस ने जांच शुरू की और आरोपी शिक्षक को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने घटना में इस्तेमाल मोबाइल फोन भी जब्त किया है।
बांदे पुलिस ने आरोपी के खिलाफ BNS की धारा 75, POCSO एक्ट की धारा 12 और IT एक्ट की धारा 67(ए) के तहत मामला दर्ज किया है।
पुलिस के मुताबिक आरोपी को कोर्ट में पेश करने के बाद न्यायालय के आदेश पर जिला जेल कांकेर भेज दिया गया है। मामले की विवेचना जारी है।
अब जरा सोचिए…जिस शिक्षक को छात्रा को गणित का सवाल समझाना था,वही शिक्षक अगर उसके भरोसे और उसकी मासूमियत का फायदा उठाने लगे तो फिर सवाल सिर्फ एक शिक्षक का नहीं है…सवाल पूरी शिक्षा व्यवस्था से है।….स्कूलों में बच्चों को सुरक्षित माहौल देने की जिम्मेदारी किसकी है?
क्या शिक्षकों की निगरानी की व्यवस्था पर्याप्त है?…और अगर कोई शिक्षक अपनी जिम्मेदारी की सीमा लांघता है, तो उसके खिलाफ ऐसी सख्त कार्रवाई क्यों न हो कि दूसरे लोग भी सबक लें?
किसी भी बच्चे की चुप्पी को उसकी सहमति मत समझिए।बच्चे डर सकते हैं… दबाव में आ सकते हैं… लेकिन उनकी सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता।
इस मामले में पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। अब जरूरत है निष्पक्ष जांच और कानून के मुताबिक सख्त कार्रवाई की, ताकि गुरु-शिष्य जैसे पवित्र रिश्ते पर भरोसा कायम रहे और स्कूल बच्चों के लिए डर नहीं, सुरक्षा और शिक्षा की जगह बने।क्योंकि…गुरु का स्थान सम्मान का है, डर और शोषण का नहीं।और बच्चों की सुरक्षा पर कोई समझौता नहीं होना चाहिए।