मंत्री की चेतावनी के बाद गरीबों पर चला बुलडोजर, रसूखदारों के कब्जों पर क्यों खामोश रहा प्रशासन?
इंदर कोटवानी ..
तिल्दा-नेवरा। राजनीति में अक्सर कहा जाता है कि यहां न कोई स्थायी दोस्त होता है और न कोई स्थायी दुश्मन। नेताओं के भाषण और जमीनी हकीकत में फर्क भी कई बार चर्चा का विषय बन जाता है। तिल्दा-नेवरा में सुशासन तिहार के दौरान किए गए बड़े-बड़े दावों और उसके बाद हुई प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर अब ऐसे ही सवाल उठने लगे हैं।
करीब 12 दिन पहले हाई स्कूल परिसर में आयोजित समाधान शिविर में प्रदेश के राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा और सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर खुलकर नाराजगी जताई थी। मंच से ही राजस्व मंत्री ने एक पटवारी को एक घंटे के भीतर निलंबित करने के निर्देश दिए थे। वहीं सांसद बृजमोहन अग्…ने शहर में शराब बिक्री, अतिक्रमण और सरकारी जमीनों पर हो रहे कथित कब्जों को लेकर अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई थी।
समाधान शिविर के दौरान सांसद ने यहां तक कहा था कि जिस क्षेत्र के विधायक स्वयं राजस्व मंत्री हों, वहां सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे होना गंभीर विषय है। इसके बाद मंत्री टंकराम वर्मा ने मंच से तहसीलदार और एसडीएम को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा था कि सात दिनों के भीतर सरकारी जमीनों से कब्जे नहीं हटे तो कार्रवाई तय मानी जाए। मंत्री ने अधिकारियों के खिलाफ मुख्यमंत्री को अनुशंसा भेजने तक की बात कही थी।
मंच से मिली इस कड़ी चेतावनी के बाद लोगों को उम्मीद जगी कि वर्षों से सरकारी जमीनों पर कब्जा जमाए बैठे प्रभावशाली लोगों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई होगी। अगले ही दिन प्रशासन बुलडोजर लेकर मैदान में उतरा और कॉलेज रोड क्षेत्र में अवैध रूप से घिरी जमीन पर बन रही दुकानों को तोड़ दिया गया। अधिकारियों ने संकेत दिए कि अतिक्रमण हटाने का अभियान लगातार जारी रहेगा। लेकिन इसके बाद जो हुआ, उसने पूरे अभियान को लेकर सवाल खड़े कर दिए। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन की कार्रवाई मुख्य रूप से उन लोगों तक सीमित रही जो वर्षों से छोटे मकानों में रह रहे हैं या जिनकी राजनीतिक पहुंच नहीं है। तुलसी नेवरा, कोहका और आसपास के क्षेत्रों में कई मकानों की बाउंड्रीवाल और निर्माणाधीन हिस्सों पर बुलडोजर चलाया गया, जबकि शहर और आसपास करोड़ों रुपये मूल्य की सरकारी जमीनों पर कथित कब्जों के मामले जस के तस बने हुए हैं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि नगर पालिका कार्यालय के सामने, कांग्रेस भवन के पीछे, तालाब की भूमि और सिनोधा रोड स्थित कई स्थानों पर बड़े पैमाने पर जमीनों पर कब्जे और निर्माण की शिकायतें लंबे समय से की जा रही हैं। आरोप है कि कुछ स्थानों पर लाखों रुपये की मुरुम डालकर बड़े निर्माण कार्यों की तैयारी तक की जा रही है, लेकिन इन मामलों में अब तक कोई ठोस कार्रवाई दिखाई नहीं दी।
सिनोधा रोड स्थित दारू भट्टी के सामने कई एकड़ भूमि पर चल रहे कथित कब्जे को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं।निर्माणाधीन स्थल पर नगर पालिका द्वरा शराब दुकान बनाए जाने की बात कही जा रही है इसे लेकर और भी तरह-तरह की बातें कही जा रही हैं।
हालांकि नगर पालिका के मुख्य नगर पालिका अधिकारी अमिताभ शर्मा ने स्पष्ट किया है कि यहा नगर पालिका द्वारा शराब दुकान का निर्माण नही कराया जा रहा है .नाही यह भूमि पालिका के किसी भवन या अन्य कार्य के लिए प्रस्तावित है. किसी प्रकार की सहयोग राशि नगर पालिका को प्राप्त नहीं हुई है।
उधर राजस्व विभाग का कहना है कि जिन लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई है, उन लोगो के द्वारा सरकारी जमीन पर कब्जा कर उसे आगे बेचने का प्रयास किया था। वहीं प्रभावित लोगों और स्थानीय नागरिकों का तर्क है कि यदि प्रशासन वास्तव में निष्पक्ष कार्रवाई करना चाहता है तो पहले उन बड़े और प्रभावशाली कब्जाधारियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए जिनके नाम वर्षों से चर्चा में हैं।
तिल्दा-नेवरा, तुलसी नेवरा, कोहका और आसपास के क्षेत्रों में सरकारी भूमि पर कब्जों को लेकर लंबे समय से शिकायतें होती रही हैं। लोगों का आरोप है कि यह सब स्थानीय प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और संबंधित तंत्र की अनदेखी के बिना संभव नहीं था। ऐसे में अब सवाल यह उठ रहा है कि सुशासन तिहार में मंच से दिए गए कड़े संदेश का उद्देश्य वास्तव में सरकारी जमीनों को मुक्त कराना था या फिर कार्रवाई का निशाना केवल कमजोर वर्ग बनकर रह गया?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि मंत्री जी की कथनी और प्रशासन की करनी में इतना बड़ा अंतर क्यों दिखाई दे रहा है? यदि सरकारी जमीनों से अतिक्रमण हटाने का अभियान वास्तव में निष्पक्ष और पारदर्शी है, तो फिर उन करोड़ों रुपये मूल्य की सरकारी जमीनों पर कार्रवाई कब होगी, जिनकी जानकारी स्वयं जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के सामने सार्वजनिक रूप से रखी गई थी।शहर में यह चर्चा भी जोर पकड़ रही है कि मंत्री के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद राजस्व विभाग के कुछ अधिकारी बड़े अतिक्रमणकारियों पर कार्रवाई करने से बच रहे हैं। लोगों का मानना है कि जिन जमीनों पर वर्षों से बड़े कब्जे हैं, वहां भारी लेन-देन और प्रभावशाली लोगों का संरक्षण होने के कारण प्रशासन की कार्रवाई कमजोर पड़ रही है।
वहीं मंच से मंत्री द्वारा जताई गई नाराजगी यह साबित करती है कि उनकी मंशा पर सवाल नहीं उठाया जा सकता।ऐसे में यदि कहीं खोट नजर आती है तो वह जमीनी स्तर पर आदेशों को लागू करने वाली व्यवस्था में दिखाई देती है। अब आवश्यकता इस बात की है कि मंत्री स्वयं पूरे मामले का संज्ञान लें, बड़े अतिक्रमणों की निष्पक्ष जांच कराएं और यदि किसी अधिकारी की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करें। तभी सुशासन तिहार के दौरान किए गए वादों और जनता के विश्वास के बीच की दूरी कम हो सकेगी, अन्यथा यह पूरा मामला जनता के बीच सवालों, चर्चाओं और संदेहों का विषय बना रहेगा।
तिल्दा तहसीलदार रामप्रसाद बघेल का कहना है कि शिकायत के आधार पर बुलडोजर चलाया जा रहा है हमारा बुलडोजर उन लोगों तक भी पहुंचेगा. जिनके द्वारा सरकारी जमीनों पर कब्जा किया जा रहा है।

