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मढ़ी में गौरी गणेश इस्पात प्लांट विस्तार का विरोध तेज, जनसुनवाई से पहले ग्रामीणों में भारी आक्रोश

प्रदूषण, जल संकट, सड़क क्षति और अधूरे वादों का आरोप; ग्रामीण बोले- विकास नहीं, मिला प्रदूषण और परेशानी 18 जून की जनसुनवाई का विरोध करने की चेतावनी

इंद्र कोटवानी -तिल्दा-नेवरा। विकासखंड तिल्दा के ग्राम मढ़ी में संचालित गौरी गणेश इस्पात प्राइवेट लिमिटेड के प्रस्तावित विस्तार को लेकर 18 जून को आयोजित होने वाली जनसुनवाई से पहले ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि कंपनी की स्थापना के समय जो वादे किए गए थे, वे आज तक पूरे नहीं हुए, जबकि गांव और आसपास के क्षेत्रों को वायु, जल एवं ध्वनि प्रदूषण का दंश झेलना पड़ रहा है।ग्रामीणों का कहना है कि वर्ष 2021 में हुई पहली जनसुनवाई के दौरान कंपनी प्रबंधन ने क्षेत्र के विकास, रोजगार और मूलभूत सुविधाओं के विस्तार का सपना दिखाया था, लेकिन कारखाना शुरू होने के बाद हालात इसके विपरीत हो गए। ग्रामीणों के अनुसार अब लोग धूल, प्रदूषण और जल संकट जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं।

इस तरह कारखाने से निकलता है कला जहरीला धुवा

जनपद सदस्य प्रतिनिधि प्रकाश सगरवंशी ने आरोप लगाया कि कंपनी द्वारा कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व (CSR) के तहत क्षेत्र में अपेक्षित राशि खर्च नहीं की गई। उनका दावा है कि नियमों के अनुसार करोड़ों रुपये क्षेत्रीय विकास पर खर्च होने चाहिए थे, लेकिन अब तक बहुत कम राशि ही खर्च की गई है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पर्यावरणीय रिपोर्ट में कई तथ्य गलत तरीके से प्रस्तुत किए गए हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि पर्यावरणीय दस्तावेजों में 2 किलोमीटर के दायरे में किसी स्कूल के नहीं होने का उल्लेख किया गया है, जबकि ग्राम मढ़ी में कंपनी परिसर से करीब 30 मीटर की दूरी पर स्कूल संचालित है। इसी प्रकार रिपोर्ट में 5 किलोमीटर के भीतर किसी पर्यटन या धार्मिक स्थल का उल्लेख नहीं किया गया, जबकि आस्था केंद्र मने जाने वाला बंजारी माता मंदिर कंपनी से करीब आधा किलोमीटर दूर स्थित है, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।

ग्राम सभा सदस्य कौशल साहू ने आरोप लगाया कि कंपनी परिसर में किए गए गहरे बोर खनन के कारण आसपास के गांवों में भूजल स्तर प्रभावित हुआ है और कई तालाब समय से पहले सूखने लगे हैं। उन्होंने कहा कि पहले यह आश्वासन दिया गया था कि उद्योग के लिए पानी नदियों से लाया जाएगा।ग्रामीणों ने सड़क क्षति का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनी ग्रामीण सड़कों पर भारी वाहनों का लगातार आवागमन हो रहा है, जिससे सड़कें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं।

ग्रामीण प्रवीण नायक ने बताया कि गांव के लोग लगातार जनसुनवाई का विरोध कर रहे हैं और कलेक्टर सहित विभिन्न विभागों को ज्ञापन भी सौंप चुके हैं। इसके बावजूद 18 जून को जनसुनवाई आयोजित की जा रही है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि वे जनसुनवाई का लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करेंगे और अपनी आपत्तियां दर्ज कराएंगे।फिलहाल प्रशासन जनसुनवाई की तैयारियों में जुटा है, वहीं गांव में विरोध की आवाजें लगातार तेज होती जा रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी चिंताओं को गंभीरता से नहीं सुना गया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

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