इंदर कोटवानी
रामपुर। आज के दौर में जहां कई लोग अपने बुजुर्ग माता-पिता की जिम्मेदारी उठाने से कतराते हैं और उन्हें वृद्धाश्रमों में छोड़ आते हैं, वहीं रामपुर का एक परिवार इंसानियत और संवेदनाओं की ऐसी मिसाल पेश कर रहा है,जिसने लोगों का दिल छू लिया है।यह परिवार अपनी पालतू बिल्ली ‘बबली’ को परिवार के सदस्य की तरह मानता है और उसके लापता होने के 25 दिन बाद भी उसे ढूंढने की हर संभव कोशिश कर रहा है।
दो साल पहले भूखी-प्यासी हालत में घर पहुंची बबली को परिवार ने सहारा दिया था। दूध पिलाकर उसकी भूख मिटाई और फिर उसे अपने परिवार का हिस्सा बना लिया। धीरे-धीरे बबली बच्चों की साथी और घर की लाड़ली बन गई। परिवार के हर सदस्य का उससे गहरा भावनात्मक लगाव हो गया।

कुछ महीने पहले बबली ने चार बच्चों को जन्म दिया। परिवार उसकी और उसके बच्चों की देखभाल में जुटा हुआ था। लेकिन करीब 25 दिन पहले वह अचानक घर से बाहर निकली और फिर वापस नहीं लौटी। शुरुआत में लगा कि वह लौट आएगी, लेकिन दिन बीतते गए और उसका कोई पता नहीं चला।
बबली की तलाश में परिवार ने आसपास के इलाकों में खोजबीन की, लोगों से पूछताछ की और उसकी तस्वीर वाले पोस्टर भी जगह-जगह लगवाए। इतना ही नहीं, उसकी सही जानकारी देने वाले के लिए ₹5000 के इनाम की घोषणा भी की गई है।
बिल्ली के मालिक कमल किशोर बताते हैं कि बबली ने कभी किसी को नुकसान नहीं पहुंचाया। वह बेहद शांत और स्नेही स्वभाव की थी। वहीं मालकिन कविता का कहना है कि बबली सिर्फ एक पालतू जानवर नहीं, बल्कि परिवार का सदस्य थी। उसके गायब होने के बाद घर का माहौल बदल गया है। उसके बच्चे आज भी अपनी मां को तलाशते नजर आते हैं, जिसे देखकर परिवार की आंखें नम हो जाती हैं।
परिवार को आशंका है कि शायद कोई उसे कहीं और छोड़ आया हो या वह रास्ता भटक गई हो। इसके बावजूद उम्मीद अभी भी जिंदा है। परिवार को विश्वास है कि एक दिन बबली सुरक्षित लौटकर अपने बच्चों और अपने परिवार के बीच जरूर आएगी।
यह कहानी सिर्फ एक पालतू बिल्ली की नहीं, बल्कि उस प्रेम, अपनापन और संवेदना की है जो आज भी इंसानियत को जिंदा रखे हुए है। जब इंसान इंसान से दूर होता जा रहा है, तब एक परिवार का अपने पालतू जीव के प्रति यह समर्पण समाज को रिश्तों और जिम्मेदारियों का अनमोल संदेश देता है।

