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“खेल-खेल में हैवानियत! 7 साल के मासूम पर टूट पड़े नाबालिग, वायरल वीडियो ने डराया”

दुर्ग .सिर्फ 7 से 11 साल की उम्र… जिस उम्र में बच्चे खिलौनों से खेलते हैं, उसी उम्र के कुछ बच्चों ने ऐसी हैवानियत दिखाई कि पूरा समाज शर्मसार हो गया.। दुर्ग जिले में एक 7 साल के मासूम को पहले बेइज्जत किया गया, फिर उससे अश्लील हरकतें कराई गईं और बाद में बेरहमी से पीटा गया। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह सब करने वाले कोई अपराधी नहीं, बल्कि खुद नाबालिग बच्चे हैं। आखिर हमारे बच्चों का बचपन किस दिशा में जा रहा है?”पुलिस के मुताबिक यह वीडियो 7 दिन पुराना है, जो अब वायरल हो रहा है.।
दुर्ग जिले से सामने आया यह वीडियो सिर्फ एक मारपीट की घटना नहीं, बल्कि समाज के सामने खड़ा एक बड़ा सवाल है…….। वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि एक नाबालिग  गला दबाने की कोशिश करता दिखाई दे रहा है, जबकि बाकी नाबालिग लात-घूसों और डंडों से उसे मारते नजर आ रहे हैं।नाबालिग बच्चे एक 8 वर्षीय मासूम को घेरकर पहले अपमानित करते हैं,… फिर उससे अशोभनीय हरकतें करवाते हैं और बाद में डंडों, लात-घूंसों और चप्पलों से हमला कर देते हैं।
इस दौरान मासूम रोता रहा, छोड़ देने की गुहार लगाता रहा, लेकिन किसी का दिल नहीं पसीजा…..। हैरानी की बात यह है कि पूरी घटना को मोबाइल में रिकॉर्ड किया गया और फिर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया गया..घटना सामने आने के बाद पुलिस ने 6 नाबालिगों को हिरासत में लेकर बाल संप्रेक्षण गृह भेज दिया है……। बाल आयोग ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए काउंसिलिंग की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही है..।पुलिस ने इस पूरे मामले की जानकारी बाल आयोग को दे दी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वायरल वीडियो की जांच की जा रही है और घटना से जुड़े हर पहलू को बारीकी से देखा जा रहा है. वीडियो में दिख रहे सभी नाबालिग हैं.।
“इस घटना ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर बच्चों के हाथों में मोबाइल क्या सिर्फ मनोरंजन का साधन रह गया है या फिर वह हिंसा और विकृत मानसिकता का माध्यम बनता जा रहा है….? जब बचपन में ही संवेदनाएं मरने लगें, तो आने वाला कल कैसा होगा? यह सवाल सिर्फ दुर्ग का नहीं, हर उस घर का है जहां बच्चे मोबाइल की दुनिया में अकेले छोड़ दिए गए हैं……।””कहीं ऐसा तो नहीं कि हम बच्चों को मोबाइल तो दे रहे हैं, लेकिन संस्कार देना भूलते जा रहे हैं?”क्योंकि इसमें सिर्फ घटना नहीं, बल्कि “बचपन में बढ़ती क्रूरता और मोबाइल संस्कृति” का बड़ा सामाजिक सवाल उठता है।
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