तिल्दा-नेवरा ,ब्रह्माकुमारीज़ द्वारा देशभर में चलाए जा रहे 10 करोड़ नशामुक्ति प्रतिज्ञा महाअभियान के तहत तिल्दा क्षेत्र में भी नशामुक्ति एवं जनजागरूकता अभियान जोर पकड़ रहा है। 6 अगस्त से शुरू हुए अभियान के अंतर्गत ब्रह्माकुमारीज़ तिल्दा सेवाकेंद्र की टीम क्षेत्र के विभिन्न शासकीय एवं गैर-शासकीय विद्यालयों में पहुंचकर विद्यार्थियों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक कर रही है।
इसी क्रम में स्वामी आत्मानंद प्रियदर्शिनी स्कूल, शासकीय हाई स्कूल सासाहोली और आत्मानंद स्कूल कुरमी बोर्डिंग में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने नशामुक्ति की प्रतिज्ञा लेकर स्वस्थ, सकारात्मक एवं आदर्श जीवन जीने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में विद्यालय प्रबंधन, प्राचार्यों एवं शिक्षकों का भी सहयोग मिला।
नशे से दूर रहने किया जागरूक
ब्रह्माकुमारीज़ के सेवाधारी भाई आकाश धुरंधर ने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए तंबाकू, शराब सहित विभिन्न नशीले पदार्थों के दुष्प्रभावों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि युवा अक्सर मित्रों की संगति, आकर्षण और सामाजिक दबाव में नशे की शुरुआत करते हैं और धीरे-धीरे इसकी गिरफ्त में फंस जाते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को बाहरी पदार्थों में सुख तलाशने के बजाय आत्मबल और सकारात्मक सोच विकसित करने की प्रेरणा दी।
डिजिटल नशे से भी सावधान रहने की अपील
भाई विष्णु वर्मा ने विद्यार्थियों को मोबाइल और सोशल मीडिया के अत्यधिक उपयोग से होने वाले नुकसान के प्रति जागरूक किया। उन्होंने कहा कि जरूरत से ज्यादा मोबाइल इस्तेमाल एकाग्रता, अध्ययन, व्यवहार और मानसिक क्षमता को प्रभावित कर सकता है। विद्यार्थियों से तकनीक का संतुलित, आवश्यक और रचनात्मक उपयोग करने की अपील की गई।
राजयोग से बढ़ता है आत्मबल
बीके प्रियंका दीदी ने नशे की प्रवृत्ति पर नियंत्रण के लिए राजयोग मेडिटेशन की भूमिका समझाई। उन्होंने कहा कि केवल नशे की वस्तु छोड़ना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके पीछे छिपी मानसिक कमजोरी और आकर्षण पर विजय पाना भी जरूरी है। राजयोग के माध्यम से आत्मबल, एकाग्रता और सकारात्मक सोच को मजबूत किया जा सकता है। इस दौरान विद्यार्थियों को राजयोग मेडिटेशन का अभ्यास भी कराया गया।
नशे में फंसे लोगों की मदद का संदेश
अभियान के दौरान विद्यार्थियों से कहा गया कि यदि उनके आसपास कोई व्यक्ति नशे की गिरफ्त में है तो उसका उपहास करने के बजाय प्रेम, सहयोग और सकारात्मक व्यवहार के माध्यम से उसे नशामुक्त जीवन अपनाने के लिए प्रेरित करें। वक्ताओं ने माता-पिता और शिक्षकों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताते हुए बच्चों के साथ नियमित संवाद और बेहतर वातावरण को नशे से बचाव का प्रभावी माध्यम बताया।
विद्यालय के शिक्षकों ने बढ़ती नशे की समस्या को देखते हुए अभियान को समय की जरूरत बताया। विद्यार्थियों ने भी उत्साह के साथ सहभागिता करते हुए स्वयं नशे से दूर रहने और समाज को नशामुक्त बनाने में योगदान देने का संकल्प लिया।

