Homeछत्तीसगढ़पंचायत भवन या निजी ठिकाना? तिल्दा-नेवरा में सिंधी पंचायत की व्यवस्था पर...

पंचायत भवन या निजी ठिकाना? तिल्दा-नेवरा में सिंधी पंचायत की व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

बुकिंग रजिस्टर में एंट्री और ठहरने वालों की पहचान को लेकर आरोप, समाज के लोगों को ही भवन मिलने में परेशानी होने की शिकायत

पंचायत भवन में गलत धंधे से जुड़े  प्रभावशाली के कहने पर सदस्यों का गठन!,सदस्यों में गलत कार्यो से जुड़े लोगो की संख्या ?

तिल्दा-नेवरा। शहर का सिंधी पंचायत भवन इन दिनों अपनी व्यवस्थाओं को लेकर चर्चा में है। जिस भवन का निर्माण समाज के लोगों की सामाजिक एवं सामुदायिक जरूरतों को पूरा करने के उद्देश्य से किया गया है, उसी भवन के उपयोग और संचालन को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। आरोप हैं कि भवन का इस्तेमाल कुछ प्रभावशाली लोगों की मर्जी से किया जा रहा है। वहीं, समाज के जरूरतमंद लोगों को भवन  उपलब्ध कराने में कथित तौर पर आनाकानी किए जाने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं।

बुकिंग रजिस्टर में एंट्री के बिना ठहराने का आरोप

स्थानीय स्तर पर लगाए जा रहे आरोपों के अनुसार, भवन में बाहर से आने वाले कुछ लोगों को ठहराया जाता है, लेकिन उनकी बुकिंग, नाम-पता और पहचान संबंधी जानकारी रजिस्टर में दर्ज किए जाने की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। बताया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश, बिहार सहित अन्य स्थानों से आने वाले लोगों को भवन के एसी कमरों में ठहराने की व्यवस्था की जाती है। इसके लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जा रहा है या नहीं।

समाज के लोगों को कमरा लेने के लिए करनी पड़ती है मशक्कत?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस भवन पर समाज के लोगों का सामुदायिक अधिकार और भावनात्मक जुड़ाव है, वहां जरूरत पड़ने पर उन्हीं लोगों को कमरा उपलब्ध कराने की प्रक्रिया इतनी कठिन क्यों बताई जा रही है? आरोप हैं कि कुछ लोगों को कमरा लेने के लिए प्रभावशाली व्यक्तियों से संपर्क करना पड़ता है और काफी मशक्कत के बाद ही कमरा मिल पाता है। दूसरी ओर, कुछ चुनिंदा लोगों के लिए भवन आसानी से उपलब्ध हो जाने की चर्चा है। इन आरोपों की निष्पक्ष जांच और पंचायत प्रबंधन का पक्ष सामने आना जरूरी है।

किसके इशारे पर संचालित हो रहा भवन?

शहर में चर्चा है कि एक गलत धंधे से जुड़े  प्रभावशाली व्यक्ति के हस्तक्षेप के चलते पंचायत भवन की व्यवस्थाएं प्रभावित हो रही हैं। आरोप यह भी हैं कि भवन को जरूरत के अनुसार खुलवाकर बाहर से आने वाले लोगों के ठहरने की व्यवस्था कराई जाती है। यह पंचायत प्रबंधन की कार्यप्रणाली और जवाबदेही से जुड़ा गंभीर विषय है।

बिजली बिल और पैसों की मांग को लेकर भी सवाल

भवन के संचालन को लेकर कुछ अन्य शिकायतें भी चर्चा में हैं। आरोप लगाए जा रहे हैं कि समाज के लोगों पर बिजली बिल जमा करने के लिए दबाव बनाया जाता है। वहीं, कुछ लोगों द्वारा समझौते के नाम पर पैसों की मांग किए जाने की शिकायतें भी सामने आने की बात कही जा रही है।

सुरक्षा के लिहाज से भी जरूरी है जवाबदेही

किसी भी सामुदायिक भवन में बाहर से आने वाले लोगों के ठहरने की स्थिति में बुकिंग का रिकॉर्ड, आगंतुकों की पहचान और निर्धारित नियमों का पालन महत्वपूर्ण होता है। यदि बिना उचित रिकॉर्ड के लोगों को ठहराया जा रहा है, पंचायत प्रबंधन को स्पष्ट करना चाहिए कि भवन में कमरा देने की प्रक्रिया क्या है, बुकिंग का हिसाब कैसे रखा जाता है और आगंतुकों की जानकारी दर्ज करने के लिए क्या व्यवस्था है।पंचायत भवन में केमरे भी नही लगाए गए है ..

सिंधी पंचायत भवन समाज की सामूहिक संपत्ति और सामाजिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र है। ऐसे में इसके उपयोग को लेकर पारदर्शिता बनाए रखना प्रबंधन की जिम्मेदारी है। समाज के लोगों की शिकायतों का समाधान समय रहते नहीं किया गया, तो विवाद बढ़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। फिलहाल सबसे जरूरी है कि पंचायत भवन के संचालन, बुकिंग रजिस्टर, आय-व्यय और कमरों के आवंटन की निष्पक्ष जांच हो तथा समाज के सामने वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाए।

150 सदस्यों वाली सिंधी पंचायत में चाटुकारों का दबदबा, गलत फैसलों को समर्थन देने का आरोप

पंचायत चुनाव के एक वर्ष बीत जाने के बावजूद अब तक एक भी आमसभा नहीं बुलाए जाने का मामला पंचायत की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। करीब डेढ़ हजार मतदाताओं वाली सिंधी पंचायत में अध्यक्ष द्वारा प्रत्येक दस मतदाताओं के पीछे एक सदस्य बनाए जाने के हिसाब से लगभग 150 सदस्यों को शामिल किया गया है। जबकि सदस्यों की संख्या ३० से 40 होनी चाहिए ? इन सदस्यों के चयन को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

चर्चा इस बात की है कि पंचायत में अधिकांश ऐसे लोगों को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है, जिनकी कार्यशैली और गतिविधियों को लेकर सवाल उठते रहे हैं। आरोप यह भी है कि ऐसे लोगों को सदस्य बनाने के पीछे केवल सामाजिक प्रतिनिधित्व नहीं, बल्कि अपने पक्ष में समर्थन जुटाने की रणनीति भी हो सकती है। बताया जाता है कि इनमें कुछ लोग ऐसे हैं, जो जरूरत पड़ने पर पैसे खर्च करने से भी पीछे नहीं हटते। ऐसे लोगों को सदस्य बनाकर अध्यक्ष ने अपने समर्थन का एक मजबूत समूह तैयार किया गया  है, ऐसी चर्चाएं समाज के भीतर हो रही हैं।

सबसे गंभीर सवाल यह है कि पंचायत की सदस्यता कहीं कुछ लोगों के लिए सुरक्षा कवच तो नहीं बन गई है? आरोप है कि पंचायत से जुड़ने के बाद ऐसे लोगों को सामाजिक स्तर पर एक प्रकार का संरक्षण मिलने का एहसास होता है। वहीं, जब पंचायत में कोई विवादित या अनुचित निर्णय लिया जाता है, तो विरोध करने के बजाय यही सदस्य हाथ उठाकर उसके समर्थन में खड़े दिखाई देते हैं। यदि निर्णयों पर सवाल उठाने के बजाय केवल समर्थन देने की परंपरा बन जाए, तो पंचायत में लोकतांत्रिक व्यवस्था और जवाबदेही का क्या अर्थ रह जाता है?

RELATED ARTICLES

Leave a reply

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments