Homeछत्तीसगढ़ बच्चों को मिला संदेश—डरें नहीं, गलत के खिलाफ आवाज उठाएं

 बच्चों को मिला संदेश—डरें नहीं, गलत के खिलाफ आवाज उठाएं

बाल विवाह, शोषण और साइबर अपराध से बचाव के लिए 276 विद्यार्थियों को किया जागरूक

तिल्दा-नेवरा।-बच्चों का बचपन सुरक्षित हो, उन्हें शिक्षा के साथ सम्मान और भयमुक्त वातावरण मिले तथा किसी भी तरह के शोषण के खिलाफ वे बेझिझक आवाज उठा सकें। इसी उद्देश्य को लेकर राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) के अखिल भारतीय जागरूकता अभियान ‘सुरक्षित बचपन अभियान’ के तहत सरस्वती शिशु मंदिर, सासाहोली में विशेष विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में 276 विद्यार्थियों को बाल अधिकारों, बाल विवाह की रोकथाम, लैंगिक शोषण से बचाव और साइबर सुरक्षा की महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं।

कार्यक्रम न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी एवं तालुका विधिक सेवा प्राधिकरण, तिल्दा-नेवरा के अध्यक्ष भावेश कुमार वट्टी के मार्गदर्शन में आयोजित हुआ।

इस दौरान जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, रायपुर की अधिकार मित्र  नव्या साहू ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित वातावरण में जीने, शिक्षा प्राप्त करने, सम्मान पाने और भयमुक्त बचपन बिताने का अधिकार है। बच्चों को अपने अधिकारों की जानकारी होना बेहद जरूरी है, ताकि वे किसी भी अन्याय या शोषण के विरुद्ध आवाज उठा सकें।

उन्होंने  लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो एक्ट-2012) की विस्तार से जानकारी देते हुए अच्छे और बुरे स्पर्श के बीच अंतर समझाया। उन्होंने कहा कि यदि किसी बच्चे के साथ अनुचित व्यवहार, गलत स्पर्श या किसी प्रकार का शोषण होता है तो उसे डरकर चुप नहीं रहना चाहिए, बल्कि तत्काल अपने माता-पिता, शिक्षक या किसी भरोसेमंद व्यक्ति को इसकी जानकारी देनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि बच्चों की सुरक्षा केवल परिवार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।

बाल विवाह पर भी किया जागरूक: शिविर में बाल विवाह के दुष्परिणामों पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि कम उम्र में विवाह बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और भविष्य को प्रभावित करता है। प्रत्येक बच्चे को अपना बचपन जीने और अपनी शिक्षा पूरी करने का अधिकार है। इसके साथ ही ‘सुरक्षित बचपन, सशक्त भारत’, ‘कानून जानो, बचपन बचाओ’ और ‘मेरा बचपन, मेरा अधिकार’ जैसे संदेशों के माध्यम से विद्यार्थियों को जागरूक किया गया।

इंटरनेट की दुनिया में भी सतर्कता जरूरी: डिजिटल सुरक्षा पर चर्चा करते हुए विद्यार्थियों को ऑनलाइन धोखाधड़ी, साइबर बुलिंग, अनजान लोगों से ऑनलाइन संपर्क तथा निजी जानकारी और तस्वीरें साझा करने के खतरों से अवगत कराया गया। उन्हें इंटरनेट का सावधानीपूर्वक उपयोग करने और किसी भी संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधि की जानकारी तत्काल अभिभावकों या शिक्षकों को देने की समझाइश दी गई।

कार्यक्रम में बच्चों को जरूरत पड़ने पर सहायता प्राप्त करने के लिए बाल सहायता हेल्पलाइन 1098, आपातकालीन पुलिस सहायता 112, निःशुल्क विधिक सहायता 15100 तथा साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायत के लिए 1930 नंबर की जानकारी भी दी गई।

अपने संबोधन के अंत में नव्या साहू ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि अपने अधिकारों को जानना और गलत के विरुद्ध आवाज उठाना ही सुरक्षित भविष्य की पहली सीढ़ी है। बच्चों की चुप्पी नहीं, बल्कि उनकी आवाज बनना समाज की जिम्मेदारी है। हर बच्चे का सुरक्षित बचपन उसका अधिकार है और उसकी रक्षा करना हम सभी का कर्तव्य है।

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