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मरकर भी रोशनी बांट गईं कमला मोटवानी, अंतिम इच्छा पूरी कर बेटों ने कराया नेत्रदान

तिल्दा-नेवरा। सिंधी कैंप निवासी 68 वर्षीय कमला मोटवानी अब इस दुनिया में नहीं रहीं, लेकिन उनकी आंखें उनके जाने के बाद भी किसी जरूरतमंद के जीवन में उजाला बनकर रहेंगी। कमला मोटवानी ने जीवन रहते ही मरणोपरांत अपनी आंखें दान करने का संकल्प लिया था। उन्होंने नरेश मित्र मंडल के माध्यम से नेत्रदान के लिए फॉर्म भरकर अपनी अंतिम इच्छा व्यक्त की थी।
शनिवार को कमला मोटवानी का निधन हुआ तो उनके बेटों ने मां की इच्छा को सर्वोपरि रखते हुए उनका नेत्रदान कराया। इस तरह कमला मोटवानी ने अपने जीवन की अंतिम विदाई भी समाज के लिए एक प्रेरणादायी संदेश के साथ ली।

कमला मोटवानी की आंखें अब उन जरूरतमंद नेत्रहीन लोगों के जीवन में रोशनी ला सकती हैं, जो दुनिया को देखने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। उनका शरीर भले ही पंचतत्व में विलीन हो जाएगा, लेकिन उनकी आंखों से किसी दूसरे के जीवन में दुनिया देखने का उजाला कायम रहेगा।

सचमुच, इससे बड़ा दान और क्या हो सकता है। जीते जी इंसान अपने परिवार और समाज के लिए बहुत कुछ करता है, लेकिन मृत्यु के बाद भी किसी के जीवन में रोशनी बनकर जीवित रहना अपने आप में महान मानव सेवा है। कमला मोटवानी का नेत्रदान समाज को यह संदेश देता है कि जीवन की अंतिम सांस के बाद भी इंसान किसी के लिए उम्मीद और उजाले की वजह बन सकता है।

मां की अंतिम इच्छा पूरी करने वाले उनके बेटों के इस निर्णय की सराहना की जा रही है। कमला मोटवानी का नेत्रदान समाज के लिए प्रेरणादायी संदेश है कि मृत्यु के बाद भी मानव सेवा की जा सकती है।नेत्रदान न केवल कमला मोटवानी को सच्ची श्रद्धांजलि है, बल्कि समाज के अन्य लोगों को भी मरणोपरांत अंगदान और नेत्रदान के लिए प्रेरित करने वाली मिसाल है।

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