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दुर्ग में चलती ट्रेन में चढ़ते फिसला यात्री,देवदूत बने आरपीएफ जवान ने बचाया

 दुर्ग -रेलवे प्लेटफॉर्म पर कुछ सेकंड के लिए ऐसा मंजर बन गया… जिसे देखकर लोगों की सांसें थम गईं…एक मुसाफिर चलती ट्रेन पकड़ने की जल्दबाजी में मौत के बिल्कुल करीब पहुंच गया…

ट्रेन आगे बढ़ रही थी… प्लेटफॉर्म पर लोग चिल्ला रहे थे… और मुसाफिर ट्रेन और प्लेटफॉर्म के बीच फंसा जिंदगी और मौत से जूझ रहा था…लोगों के मुंह से चीखें निकल पड़ीं… किसी ने आंखें बंद कर ली… तो कोई “बचाओ-बचाओ” चिल्लाने लगा…लेकिन तभी… उस अफरा-तफरी के बीच एक आरपीएफ जवान देवदूत बनकर दौड़ा…और अपनी जान की परवाह किए बिना मुसाफिर को मौत के मुंह से खींच लाया…दुर्ग रेलवे स्टेशन का ये दृश्य अब हर किसी को एक सीख दे रहा है… कि कुछ सेकंड की जल्दबाजी… पूरी जिंदगी छीन सकती है…

दुर्ग रेलवे स्टेशन पर बरौनी-गोंदिया एक्सप्रेस प्लेटफॉर्म से रवाना हो चुकी थी… तभी एक अधेड़ मुसाफिर दौड़ते हुए ट्रेन पकड़ने पहुंचा…वो किसी भी कीमत पर ट्रेन मिस नहीं करना चाहता था… लेकिन शायद उसे अंदाजा नहीं था कि ये जल्दबाजी उसकी जिंदगी पर भारी पड़ सकती है।मुसाफिर ने चलती ट्रेन के डिब्बे में चढ़ने की कोशिश की… लेकिन अचानक उसका संतुलन बिगड़ गया… और देखते ही देखते वो ट्रेन और प्लेटफॉर्म के बीच खाली जगह में जा गिरा।

जैसे ही मुसाफिर नीचे गिरा… प्लेटफॉर्म पर मौजूद लोगों के होश उड़ गए…लोग जोर-जोर से चिल्लाने लगे… महिलाओं की चीखें गूंजने लगीं… हर किसी को लग रहा था कि अब मुसाफिर ट्रेन के नीचे चला जाएगा…

कुछ पल के लिए पूरा प्लेटफॉर्म दहशत में बदल गया…लेकिन तभी वहां ड्यूटी पर तैनात आरपीएफ जवान निरंजन बिजली की रफ्तार से दौड़े…उन्होंने बिना एक सेकंड गंवाए मुसाफिर का हाथ पकड़ा… और उसे खींचकर बाहर निकाल लिया।अगर कुछ सेकंड की भी देरी होती… तो ये हादसा एक दर्दनाक मौत में बदल सकता था।

घटना में घायल मुसाफिर को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है… जहां उसकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है।अपनी जान बचाने वाले आरपीएफ जवान निरंजन को मुसाफिर ने हाथ जोड़कर धन्यवाद दिया।वहीं प्लेटफॉर्म पर मौजूद लोगों ने भी कहा कि चलती ट्रेन पकड़ने की गलती कोई दोबारा न करे… क्योंकि एक छोटी सी लापरवाही पूरे परिवार को जिंदगीभर का दर्द दे सकती है।आरपीएफ जवान निरंजन ने भी लोगों से अपील करते हुए कहा कि ट्रेन पकड़ने के दौरान जल्दबाजी न करें… सुरक्षा नियमों का पालन करें… क्योंकि सतर्कता ही सबसे बड़ी सुरक्षा है।

एक ट्रेन… कुछ सेकंड की जल्दबाजी… और मौत का बेहद करीब पहुंच चुका एक मुसाफिर…लेकिन आरपीएफ जवान निरंजन की बहादुरी ने आज एक परिवार की खुशियां उजड़ने से बचा लीं…ये घटना सिर्फ एक हादसा नहीं… बल्कि हर यात्री के लिए चेतावनी है…कि ट्रेन छूट जाए तो दूसरी मिल सकती है…लेकिन जिंदगी दोबारा नहीं मिलती…

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