तिल्दा-नेवरा – देश की सबसे बड़ी पंचायत संसद में भाजपा के मंसूबों पर पानी फ़िर गया। 2023 में पारित हो चुके 33% महिला आरक्षण में परिसिमन की आड़ में बीजेपी अपना राजनैतिक हित साधना चाह रही थी, इसे ही विपक्ष ने ख़ारिज करवाया है। यह बातें कहते हुए आम आदमी पार्टी के बलौदाबाजार विस. के प्रमुख कार्यकर्त्ता कमल महान ने कहा कि 12 साल में यह पहला अवसर है जब मोदी सरकार की संसद में हार हुई है।
पार्टी के जिला अध्यक्ष भुनेश्वर डहरिया ने कहा कि यह भाजपा की चाल थी जिसे विपक्ष ने नाकाम कर दिया,वरिष्ठ साथी भरतसिंह चौहान के अनुसार बीजेपी खुद नहीं चाहती महिला आरक्षण इसी कारण बहाने बाजी कर इसे टालना चाहती है
आप के लोकसभा उपाध्यक्ष जगन्नाथ महिलांग ने कहा कि महिला आरक्षण तो 23 में लागू हो चुका है जिसे सरकार ने 16अप्रैल 26 को नोटिफिकेशन किया है फ़िर सरकार डीलिमिटेशन का अड़ंगा क्यों लगा रही थी इसका मतलब ये खुद ही महिलाओं को उनका अधिकार नहीं देना चाहती। जिला संगठन मंत्री दिलीप फेकर ने कहा कि मोदी सरकार संसद की लगभग 300 सीटें बढ़ाकर देश पर अनावश्यक आर्थिक बोझ डालना चाहती थी, इतने के साथ राज्यसभा की लगभग 100 सीटें बढ़ती और उसी अनुपात में राज्यों की विधानसभाओं में क़रीब 2400 सीटें बढ़ जाती, क्या देश इसके लिए तैयार है? मोदी सरकार देश की पहली ऐसी सरकार है जिसका महंगाई, बेरोज़गारी और अर्थव्यवस्था से कोई मतलब नहीं है।
कार्तिकराम निषाद, रेवत कुर्रे, जसपाल जांगड़े, चंदूलाल साहू, सागर रात्रे,हरिशंकर नवरंगे, नंदकुमार वर्मा, भिखुराम साहू, भागीरथी जायसवाल,सी.पी.वर्मा, शिव निर्मलकर, आशीष गुप्ता, कामता पात्रे आदि आप कार्यकर्ताओं ने इस बिल के गिरने पर विपक्ष को साधुवाद दिया है।

