,दुकानदार की लापरवाही से ग्रामीणों को समय पर नहीं मिल रहा राशन, ई-केवाईसी के नाम पर अनियमितताओं से बढ़ी परेशानी,
तिल्दा नेवरा –ग्रामीण क्षेत्रों में इन दिनों सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत मिलने वाले राशन को लेकर गंभीर समस्याएं सामने आ रही हैं। नेटवर्क की खराब स्थिति, बार-बार सर्वर डाउन होने और राशन डीलरों की लापरवाही के चलते ग्रामीणों को समय पर चावल और अन्य राशन नहीं मिल पा रहा है। तिल्दा तहसील के कई गांवों में हितग्राहियों को घंटों राशन दुकानों के बाहर इंतजार करना पड़ता है, लेकिन सर्वर न चलने के कारण उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ता है। वहीं, कुछ स्थानों पर राशन दुकानों में पर्याप्त स्टॉक नहीं होने की शिकायत भी सामने आई है, जिससे पात्र परिवारों को उनका हक नहीं मिल पा रहा है।ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि ई-केवाईसी के नाम पर भी अनियमितताएं की जा रही हैं। कई लोगों से बार-बार दस्तावेज मांगे जा रहे हैं, जबकि कुछ मामलों में बिना उचित जानकारी के राशन वितरण रोक दिया गया है। इससे गरीब और जरूरतमंद परिवारों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
तिल्दा जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत सरोरा में 700 से अधिक हितग्राहियों को मार्च महीने का राशन नहीं मिला है।राशन नही मिलने से नाराज ग्रामीण शिकायत लेकर तिल्दा तहसील कार्यालय पहुंचे । जहां ग्रामीणों ने राशन दुकान संचालक के खिलाफ तहसीलदार को ज्ञापन सौंपकर उचित कार्रवाई करने की मांग की। तहसीलदार ने ,इस मामले की जानकारी कलेक्टर रायपुर एवं जिला खाद्य अधिकारी देने की बात कही और ग्रामीणों को राशन देने की व्यवस्था और दुकान संचालक के विरुद्ध कार्रवाई करने की बात कही।ग्रामीणों का आरोप है कि मार्च माह का राशन सरोरा सरकारी राशन दुकान में आने के बाद भी 700 कार्ड धारियों को राशन वितरण नहीं किया गया। ग्रामीण जब भी राशन के लिए दुकान जाते हैं, तो दुकान संचालक के द्वारा उनके साथ दुर्व्यवहार किया जाता है. जिसकी शिकायत खाद्य विभाग में करने पर खाद्य इंस्पेक्टर द्वारा कोई कार्रवाई नही की जाती है ।
ग्रामीणों ने बताया कि गांव में 1500 से अधिक राशन कार्डधारी है, मार्च महीने में 18 तारीख तक राशन दुकान में राशन नहीं पहुंचा था। यहां सरकारी राशन दुकान को महिला समूह के द्वारा चलाया जाता है । हालांकि वितरण का कार्य समूह से जुड़ी महिलाओं के पति और परिजन करते हैं। जब गांव कि लोगों ने राशन वितरण में हो रही देर के बारे में पूछा तो संचालनकर्ताओं के द्वारा दुर्व्यवहार किया गया। और जब राशन बांटने के लिए चावल शक्कर पहुंचा तो समूह द्वारा 5 दिनों तक राशन का वितरण नहीं किया गया ।उनका कहना था कि वे लोग शादी में गए थे। 22 मार्च से राशन वितरण शुरू किया गया ।लगभग 7 दिन में 800 कार्ड धारियो को राशन का वितरण किया गया ,बचे 700 कार्ड धारी को राशन देने से इनकार कर दिया गया, ।
गांव वालों ने बताया कि बीच-बीच में शक्कर भी नहीं दिया जाता है । कई लोगों को राशन भी नहीं दिया जाता । जिसकी कई बार शिकायत फूड इंस्पेक्टर से की गई है लेकिन फूड इंस्पेक्टर के द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जाती है । फुड इस्पेक्टर आते तो है लेकिन समूह वालों से मिलकर वापस लौट जाते हैं.। इस संबध में जब फुड इस्पेक्टर से चर्च की गई तो उन्होंने कहा इस बारे मै कुछ नही बता सकता रायपुर अधिकारियो से बात कर जानकारी ले सकते है ।
उधर मार्च के बाद जब अप्रैल महीने का चावल वितरण शुरू किया गया तो जिन कार्ड धारियो को मार्च में राशन नहीं मिला था, उन्हें पिछले महीने का राशन देने से इनकार कर दिया गया ।जिससे गांव में बवाल हो गया। इसी बात को लेकर सैकड़ो ग्रामीण तिल्दा तहसीलदार कार्यालय पहुंचे और और राशन वितरण प्रणाली पर सवाल उठाए । ग्रामीणों ने कहा कि जब उनके लिए चावल आया था और स्टॉक में चावल रखा हुआ है बावजूद उन्हें चावल नहीं दिया जा रहा है ।तहसीलदार के द्वारा आश्वासन दिए जाने के बाद ग्रामीण लौट गए। इसके 4 दिन पहले सिलपट्टी गांव में भी इसी तरह की शिकायत लेकर ग्रामीण एसडीएम कार्यालय पहुंचे थे,। सरोरा के ग्रामीणों का कहना है कि यदि मार्च का राशन उन्हें नहीं दिया गया तो वे उग्र आंदोलन करेंगे ।,ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि नेटवर्क और सर्वर की समस्या का स्थायी समाधान किया जाए, राशन दुकानों में पर्याप्त स्टॉक सुनिश्चित किया जाए और डीलरों की कार्यप्रणाली की जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।