Friday, February 27, 2026
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जैसे छत्तीसगढ़ में टीएस सिंहदेव, वैसे कर्नाटक में डीके शिवकुमार

वरिष्ठ पत्रकार जवाहर नागदेव की खरी… खरी…

लम्बी रेस का घोड़ा
दौड़े धीरे-धीरे, थोड़ा-थोड़ा
लक्ष्य तक बिदकता नहीं
लंबी रेस में थकता नहीं

बहुत अच्छा काम कर रही है भाजपा। बड़े-बड़े वायदे मोदीजी और अमित शाह की दृढ़ इच्छाशक्ति के चलते बिना रूकावट पूरे कर दिये। सिलसिला जारी है। जिन कामों को करने में भूचाल आने का खतरा दिखता था, उन्हें करने में एक पत्थर भी नहीं हिला। जीत पे जीत। तरक्की पे तरक्की। अवाम के बीच निरंतर बढ़ती लोकप्रियता। तेजी से आगे बढ़ती। बहुत तेजी से। तेज, तेज और तेज…लेकिन पिछले कुछ समय से ये तेजी अच्छे परिणाम नहीं दे रही है। लंबी रेस में बहुत तेज दौड़ने वाला घोड़ा जैसे कहीं पर आकर बिदक जाता है वैसे ही थोड़ा सा ठिठक सी रही है भाजपा।

शायद बड़ी राहत मिल जाए
सुप्रीम कोर्ट में पासा पलट जाए

एक तो राहुल गांधी वाला प्रकरण देख लें। आरोप लगाने वाले ये भी कहते हैं कि उन्हें सजा कराने में भाजपा का हाथ है। ऐसे में लोअर कोर्ट के बाद हाईकोर्ट से भी राहुल के मंसूबे टूटते से दिखे। मगर सुप्रीम कोर्ट ने तो जैसे पासा ही पलट दिया। ये पहले से कहा जा रहा था कि राहुल गांधी के खिलाफ केस बनता ही नहीं। कदाचित् आगे केस पूरा चलने पर सुप्रीम कोर्ट में यही सच साबित हो जाए। अभी तो राहुल की सजा पर फिलहाल रोक लगाकर बड़ी राहत दी है राहुल को। इसे आम बोलचाल में हम लोग सजा पर स्टे कहते हैं।

यहां पर ये मान भी लिया जाए कि भाजपा ने न्याय को प्रभावित करने का प्रयास नहीं किया तब भी ये तो मानना पड़ेगा और सबने देखा कि उनकी राहुल को संसद की सदस्यता से वंचित करने और उनका बंगला खाली कराने में कुछ अनावश्यक तेजी दिखाई गयी। जो नहीं होना था। इससे निस्संदेह राहुल को सहानुभूति मिली।
भाजपा जैसी गरिमामय पार्टी को अपने उसूलों पर कायम रहकर थोड़ी ढील देनी चाहिये। विपक्ष को भी पनपने का थोड़ा ही सही मुनासिब न्यायोचित मौका देना चाहिये। सब जानते हैं कि कांग्रेस ने इतिहास में अच्छा काम नहीं किया फिर भी उसके चाहने वाले तो हैं न।

एमपी, एमएच फिर शरद पवार
कर्नाटक का नंबर अबकी बार

कर्नाटक की सियासी हवाओं में बेचैनी व्याप्त है कि भाजपा कर्नाटक की कांग्रेस सरकार को गिराने का प्रयास कर रही है। आतंक कायम है। इससे पहले मध्यप्रदेश में अपनी रफ्तार भाजपा दिखा चुकी है। इस सियासी सफर में कांग्रेस को तोड़कर उसे सत्ता से उतार कर खुद बैठ गयी। फिर महाराष्ट्र में भी दमदारी और कामयाबी के साथ ये खेल खेला गया, यहां भी शिवसेना टूटी और सत्तासीन सरकार गिर गयी। इस तरह भाजपा सत्ता में आ गयी।

अभी देश अचंभित सा सांस ले ही रहा था कि शरद पवार के अपने भतीजे ने उनकी अपनी पार्टी में उन्हें ऐसा अकेला कर दिया। भाजपा के इस खेल में हालात ऐसे हो गये कि पवार आज खुद भाजपा से जुड़ना चाहते हैं। उनकी पारी तो लगभग पूरी हुई पर वे अपनी बेटी के लिये भाजपा में संभावनाएं तलाश रहे हैं।

तो ये है भाजपा की कामयाबी और भाजपा की रफ्तार। निस्संदेह इन सारी कलाबाजियों से भाजपा को कोई नुकसान होगा ऐसा लगता नहीं । ईधर कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद के दावेदार पर हालात् से समझौता कर उपमुख्यमंत्री बने (जैसे छत्तीसगढ़ के टीएस सिंहदेव) डीके शिवकुमार ने आशंका जताई है कि भाजपा जेडीएस के साथ मिलकर हमारे 30 विधायक तोड़ने पर तुली है और…. ।
तो ये है भाजपा की उड़ान। हालांकि ये बात हवा में उड़ रही है कि वहां के 30 कांग्रेसी विधायक अपनी ही सरकार से नाराज हैं। लेकिन ये भी खबर है कि जेडीएस के कुमारस्वामी चुनाव बाद हमेशा सिंगापुर जाते हैं लेकिन सरकार गिराने का षड्यंत्र करने नहीं बल्कि ईलाज कराने।

राम ने मार्यादा पुरूषोत्तम
होने की कीमत भरी
शठे शाठयम्… वोले कृष्ण ने
किन्तु ‘अति’ नहीं करी

आमतौर पर ये कहा जाता है कि अटलबिहारी बाजपेयी पूरी तरह निष्कपट थे और वे भगवान राम का आदर्श मानकर उन की तरह उसूलों से डिगते नहीं थे इसीलिये उनका सत्ता पर कायम रहने का समय बहुत थोड़ा रहा और तिकड़मी लोगों के षड्यंत्रों का आसान शिकार वे बनते रहे।

 

जबकि मोदीजी भगवान कृष्ण को फाॅलो करते हैं। भगवान कृष्ण कपट का जवाब कपट से देने में विश्वास करते थे। भगवान कृष्ण की तरह मोदीजी इस बात पर विश्वास करते हैं कि ‘छल का आशय यदि धर्म है तो छल जायज है’। धर्म के लिये सारे तिकड़म स्वीकार हैं।

भाजपा को चाहिये कि धर्म और जनहित के मामलों में भगवान कृष्ण की तरह अपनी गति कायम रखते हुए भी ‘अति’ न करे। थोड़ा सा अपने उसूलों और जनभावनाओं का भी खयाल रखे। अच्छे से अच्छा काम करने वालों को भी ज़रा सी गलती हो जाने पर जनता नजरों से गिरा देती है। सारी अच्छाई एक तरफ हो जाती है एक बुराई ज्वलंत हो जाती है और इंसान का किया धरा बर्बाद हो जाता है। ये जीवन की कड़वी सच्चाई है। भाजपा की स्थित हालांकि बहुत मजबूत है फिर भी वक्त बदलते और लोगों की नजरे फिरते देर नहीं लगती।

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