Homeछत्तीसगढ़दो महीने पहले जिस युवक की हत्या हुई ,वह थाने पहुंचकर बोला...

दो महीने पहले जिस युवक की हत्या हुई ,वह थाने पहुंचकर बोला -साहब मै जिंदा हू .

जिस युवक की हत्या के जुर्म में पुलिस ने 5 युवको को जेल भेजाथा  ..61 दिन बाद मुर्दा युवक जिंदा होकर घर लौटा

इंदर कोटवानी

जशपुर :चार दशक पहले 1983 में एक फिल्म आई थी. नाम था अंधा कानून. फिल्म में अमिताभ बच्चन वन विभाग का अधिकारी होता है. और अमरीशपुरी खलनायक की भूमिका में रहता है. एक दिन अमरीश पुरी को जंगल की लकड़ी तस्करी करते हुए अमिताभ पकड़ लेता है, बाद में अमरीश पुरी एक दूसरे व्यक्ति की हत्या कर उसके चेहरे कुचल कर अपने कपड़े उस मरे व्यक्ति को पहना देता है..और अपने को मरा घोषित कर भाग जाता है .और इस हत्या में  सजा मिलती है अमिताभ बच्चन को. सजा काटने के बाद अमिताभ बाहर आता है तो वह मरा हुआ व्यक्ति उसे जिंदा दिख जाता है और उसकी हत्या कर देता है.. अमिताभ को कोर्ट में पुलिस पकड़ लेती है लेकिन जज से वे अपने बेगुनाही के वे  दिन लौटने की बात करते हैं जो उसने जेल उस व्यक्क्ति के जिदा होने के बाद उसके कत्ल के जुर्म में जेल गजारे होते हैं.. इसी तरह का एक हैरान करने वाला मामला छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले से सामने आया है.

पुलिस ने जिस व्यक्ति के  हत्या के आरोप में पांच लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था, वह दो महीने बाद  युवक ने थाने जाकर खुद को ज़िंदा बताया।ऐसे में सवाल यह उठता है की आखिर मरने वाला वो व्यक्ति कौन था ? किस व्यक्ति का हुआ था अतिम संस्कार ..पुलिस के सामने जेल में बंद युवको ने आखिर हत्या करने की करना क्यु कबूला.? क्या बेगुनाह 5 युवक जो जेल में बंद है उन्हें किसी साजिश के ताहत फंसाया गया .या फिर पुलिस की ज्यादती अथवा प्रतारणा से बचने युवको ने बेगुनाह होते हुए भी जुर्म कबुल लिया ?बेगुनाह होने के बाद भी दो महीनों तक जेल में गुजारे वो दिन अब इन्हें कौन लौटाएगा..? इस माले से इस बात को सिद्ध कर दिया है की पुलिस चाहे तो किसी को भी सलाखों पीछे पहुच सकती है ..इस मामले ने कानून पा सवाल खड़े कर दिए है ..?

जानकारी के अनुसार, 22 अक्टूबर को जशपुर के सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र अंतर्गत पुरनानगर-तुरीटोंगरी जंगल में एक अधजली लाश मिली थी। पुलिस ने शव की शिनाख्त ग्राम सिटोंगा निवासी सीमित खाखा 30 वर्ष के रूप में की थी। इस पहचान की पुष्टि खुद सीमित के माता-पितापरिवार और भाई ने कार्यपालिक मजिस्ट्रेट के सामने की थी। पोस्त मार्टम में माला हत्या का पाया गया ..इस पूरे मामले में पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए पांच लोगों को गिरफ्तार किया था। हैरानी की बात यह है कि आरोपियों ने भी न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया था और फॉरेंसिक टीम ने मौके पर जाकर ‘सीन ऑफ क्राइम’ का रीक्रिएशन भी किया था, जिसके बाद आरोपियों को जेल भेज दिया गया।अंधे कत्ल को सुलझाने में पुलिसको खूब वाह वाहीभी मिली ..

लेकिन शनिवार, 20 दिसंबर की रात मामला उस समय पलट गया, जब मृत घोषित किया गया सीमित खाखा ग्राम पंचायत सिटोंगा की सरपंच कल्पना खलखो के साथ खुद थाने पहुंच गया। सीमित ने थाने जाकर बताया कि “वह मजदूरी के लिए झारखंड गया था, रांची से अलग होकर गिरिडीह के सरईपाली गांव में काम कर रहा था और मोबाइल न होने के कारण संपर्क नहीं कर पाया था।”

एसडीओपी चंद्रशेखर परमा ने कहा कि पुलिस ने पहचान और आरोप स्वीकार करने की सभी कानूनी प्रक्रियाएं मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में पूरी की थीं। सीमित खाखा के जीवित मिलने के बाद अब पूरे प्रकरण की नए सिरे से जांच की जा रही है और गिरफ्तार आरोपियों की रिहाई हेतु वैधानिक प्रक्रिया शुरू की गई है। वास्तविक मृतक की पहचान के लिए राजपत्रित अधिकारी के नेतृत्व में विशेष टीम गठित कर जांच जारी है।लेकिन इस मामले में पुलिस पर भी सवालिया निशाँन खड़े कर दिए है ..वही यह भी सवाल उठ रहा है की वो मरने वाला कौन था जिसकी जली पुलिस को मिली थी,? ,,क्या इस कहानी के पीछे कोई षडयंत्र रचा गया था ..?इसकी जाँच भी जरुरी है …

RELATED ARTICLES

Leave a reply

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments