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रामायण की थीम पर बच्चों ने दिखाई अपनी चित्रकला: ब्रह्माकुमारीज़ तिल्दा के समर कैंप में चित्रकला प्रतियोगिता में बच्चों ने बिखेरे मनमोहक रंग

तिल्दा-नेवरा। ब्रह्माकुमारीज़ तिल्दा द्वारा आयोजित समर कैंप के चौथे दिन बच्चों की रचनात्मकता और कला का अनूठा संगम देखने को मिला। चित्रकला प्रतियोगिता में बच्चों ने “रामायण” थीम पर अपनी कल्पनाशीलता के रंग बिखेरते हुए विभिन्न प्रसंगों को कागज़ पर सजीव कर दिया। प्रतियोगिता में बच्चों को रामायण के किसी भी प्रसंग का चित्रण करने के लिए प्रोत्साहित किया गया था।बच्चों ने अपनी सृजनात्मक सोच से लंका दहन, राम-रावण युद्ध, हनुमान जी द्वारा संजीवनी पर्वत लाना, पंचवटी में वनवासी जीवन, मारीच वध, रावण का युद्ध प्रस्थान और रामसेतु निर्माण जैसे अनेक प्रसंगों को बेहद सुंदर और जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। प्रतिभागियों के आकर्षक चित्रों ने पूरे कैंप को रामायणमय बना दिया और सभी दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

चौथे दिन के प्रथम सत्र में बीके प्रियंका दीदी ने बच्चों की विशेष कक्षा ली। उन्होंने ईश्वर का सही परिचय, उनका कर्तव्य और उनसे मित्रता स्थापित करने के सरल उपाय रोचक कहानियों के माध्यम से समझाए। उन्होंने कहा कि परमात्मा की सही पहचान के अभाव में ही दुनिया में धार्मिक मतभेद उत्पन्न होते हैं, जबकि परमपिता एक ही हैं जिन्हें विभिन्न धर्मों में अलग-अलग नामों से जाना जाता है। राजयोग मेडिटेशन के माध्यम से परमात्मा से जुड़कर जीवन को सकारात्मक दिशा दी जा सकती है।

कैंप के दूसरे दिन बच्चों ने भूविज्ञान के बेसिक्स सीखे

समर कैंप के दूसरे दिन बच्चों के लिए विशेष शैक्षणिक सत्र का आयोजन किया गया। इस अवसर पर जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के डायरेक्टर भ्राता अमित सोनी रायपुर से विशेष रूप से उपस्थित हुए। उन्होंने पृथ्वी की संरचना, उसकी आंतरिक परतों, जीवाश्म, खनिज और विभिन्न प्रकार के पत्थरों के बारे में सरल एवं रोचक ढंग से जानकारी दी।उन्होंने बताया कि हमारे आसपास उपयोग में आने वाली अधिकांश वस्तुएं पृथ्वी से प्राप्त संसाधनों पर आधारित होती हैं और उनकी खोज भूविज्ञानियों का कार्य है। साथ ही ज्वालामुखी और भूकंप के वैज्ञानिक कारणों को भी बच्चों के सामने सहज भाषा में प्रस्तुत किया। उन्होंने इस क्षेत्र में करियर की संभावनाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि 12वीं के बाद जियोलॉजी विषय चुनकर उज्ज्वल भविष्य बनाया जा सकता है, विशेषकर खनिज संपन्न राज्य छत्तीसगढ़ में इसके व्यापक अवसर उपलब्ध हैं।इसी दिन गीता शर्मा मैडम ने बच्चों को क्ले और पाइप क्लीनर्स की मदद से आकर्षक कलाकृतियां बनाना सिखाया, जिसमें बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

“अगर मैं एक दिन के लिए हेड मास्टर बन जाता” विषय पर बच्चों ने रखे विचार

समर कैंप के तीसरे दिन बच्चों के आत्मविश्वास और अभिव्यक्ति कौशल को बढ़ाने के उद्देश्य से एक्सटेम्पोर (तत्काल भाषण) प्रतियोगिता आयोजित की गई। बच्चों को मंच पर विभिन्न विषय देकर तुरंत अपने विचार प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया।प्रतिभागियों ने “मोबाइल का प्रभाव”, “अच्छे दोस्त की पहचान” और “अगर मैं एक दिन के लिए हेड मास्टर बन जाता” जैसे विषयों पर पूरे आत्मविश्वास के साथ प्रभावी वक्तव्य दिए। बच्चों का उत्साह और मंच पर प्रस्तुति देखने लायक रही।इसी दिन व्यक्तित्व विकास सत्र में तिल्दा की सीए निकिता शर्मा ने बच्चों को कम्युनिकेशन स्किल्स, आत्म-प्रस्तुति और व्यक्तित्व निखार से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें बताईं, जिससे बच्चों को भविष्य के लिए नई दिशा और प्रेरणा मिली।

इस प्रकार ब्रह्माकुमारीज़ तिल्दा का यह समर कैंप बच्चों के सर्वांगीण विकास, संस्कार निर्माण और प्रतिभा निखार का सशक्त मंच बनकर उभर रहा है, जहां शिक्षा के साथ-साथ नैतिक मूल्यों और रचनात्मकता का भी समुचित विकास किया जा रहा है।

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