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5 साल SDO ऑफिस में ड्यूटी, नगर पालिका ने रोका वेतन: कर्मचारी ने परिवार संग भूख हड़ताल की चेतावनी दी

नगर पालिका का दावा- मूल पद पर लौटने के कई निर्देश दिए, कर्मचारी नहीं आया; कर्मचारी बोला- बिना नोटिस वेतन रोका गया

तिल्दा-नेवरा। तिल्दा-नेवरा नगर पालिका के एक कर्मचारी को लेकर विवाद सामने आया है। अनुकंपा नियुक्ति से भृत्य पद पर नियुक्त ओमप्रकाश साहू पिछले करीब पांच वर्षों से अनुविभागीय अधिकारी (SDO) कार्यालय में कार्यरत रहे, जबकि उनका वेतन नगर पालिका परिषद से जारी होता रहा।

नगर पालिका प्रशासन के अनुसार, कई बार पत्र लिखकर SDO कार्यालय से कर्मचारी को मूल पद पर वापस भेजने का अनुरोध किया गया। कर्मचारी को भी नगर पालिका में उपस्थित होकर राजस्व वसूली कार्य करने के निर्देश दिए गए, लेकिन वह वापस नहीं लौटा।

इस मामले में प्रेसिडेंट इन काउंसिल (PIC) की बैठक में प्रस्ताव पारित कर ओमप्रकाश साहू को SDO कार्यालय से कार्यमुक्त कर नगर पालिका में राजस्व संग्रह कार्य में लगाने का निर्णय लिया गया। साथ ही निर्देश दिया गया कि 1 जून 2026 से नगर पालिका में उपस्थित नहीं होने पर उनका वेतन आहरित नहीं किया जाएगा तथा अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

नगर पालिका का कहना है कि निर्देशों के बावजूद कर्मचारी न तो अपने मूल पद पर लौटा और न ही SDO कार्यालय की ओर से उसे कार्यमुक्त किया गया। इसके बाद उसका वेतन रोक दिया गया।

इधर, तीन माह से वेतन नहीं मिलने पर कर्मचारी ओमप्रकाश साहू ने अनुविभागीय अधिकारी को आवेदन देकर मांग की है कि 24 जुलाई तक वेतन जारी नहीं होने पर वह 27 जुलाई से अपने पूरे परिवार के साथ भूख हड़ताल पर बैठेंगे। आवेदन में उन्होंने यह भी कहा है कि यदि कोई अप्रिय घटना होती है तो इसकी जिम्मेदारी नगर पालिका और संबंधित अधिकारियों की होगी। उनका आरोप है कि वेतन रोकने से पहले उन्हें न तो कोई नोटिस दिया गया और न ही कारण बताओ सूचना।आवेदन की प्रतिलिपि नगर पालिका तिल्दा नेवरा को दी गई है ..

,इस संदर्भ में  मुख्य नगर पालिका अधिकारी अमिताभ शर्मा ने कहा कि कर्मचारी पिछले पांच वर्षों से SDO कार्यालय में कार्यरत था। कई बार उसे मूल पद पर लौटने के लिए कहा गया। PIC के निर्णय के बाद भी वह नगर पालिका नहीं लौटा, इसलिए नियमानुसार वेतन आहरित नहीं किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि नगर पालिका में कर्मचारियों की कमी है और वित्तीय स्थिति भी कमजोर है। उनके अनुसार, पिछले पांच वर्षों में नगर पालिका में कार्य नहीं करने के बावजूद कर्मचारी को लगभग 25 लाख रुपये वेतन के रूप में दिए जा चुके हैं।

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