सीएम हाउस की बंद कमरे की बैठक ने बढ़ाया सस्पेंस!
समीक्षा बैठक या सत्ता के शतरंज की अगली चाल?
भाजपा में कुछ बड़ा होने के संकेत, सियासी गलियारों में चर्चा तेज
इंदर कोटवानी की रिपोर्ट…
छत्तीसगढ़ की राजनीति में गुरुवार की रात अचानक उस वक्त हलचल मच गई, जब मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने रात 9 बजे सभी मंत्रियों को तत्काल सीएम हाउस तलब कर लिया.। कई मंत्रियों को अपने तय कार्यक्रम बीच में छोड़कर रायपुर लौटना पड़ा सवाल उठने लगे है आखिर ऐसी क्या बात थी कि आधी रात तक चलने वाली हाई लेवल मीटिंग बुलानी पड़ी.? क्या यह सिर्फ सरकार और संगठन के बीच समन्वय की बैठक थी…या फिर इसके पीछे कोई बड़ा राजनीतिक संदेश छिपा है..?
रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में गुरुवार देर शाम से ही मंत्रियों और वरिष्ठ नेताओं का पहुंचना शुरू हो गया था,।मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में शुरू हुई यह बैठक करीब पांच घंटे तक चली, जो आधी रात के बाद जाकर समाप्त हुई.।बैठक में दोनों उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा और अरुण साव सहित लगभग सभी मंत्री मौजूद रहे…। शुरुआती दौर में राजनीतिक गलियारों में मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल की चर्चाएं तेज हो गईं, लेकिन बाद में तस्वीर कुछ हद तक साफ हुई……।
सूत्रों के मुताबिक बैठक का मुख्य उद्देश्य मोदी सरकार के 12 वर्ष पूरे होने पर केंद्र और राज्य सरकार की उपलब्धियों को जन-जन तक पहुंचाने की रणनीति तैयार करना था।
मंत्रियों को उनके विभागों की जनहितकारी योजनाओं के प्रचार-प्रसार को और प्रभावी बनाने के निर्देश दिए गए। साथ ही सरकार और संगठन के बीच बेहतर समन्वय, प्रदेश सरकार के ढाई वर्षों के कामकाज की समीक्षा और आगामी राजनीतिक कार्यक्रमों को लेकर भी विस्तार से चर्चा हुई।बैठक में कानून-व्यवस्था की स्थिति, विपक्ष के आरोपों का जवाब देने की रणनीति और सरकार की उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने के लिए संयुक्त अभियान चलाने पर भी मंथन हुआ.।साथ ही संगठन और सरकार के बीच तालमेल को और मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया..।
माना जा रहा है कि आने वाले महीनों में भाजपा सरकार जनता के बीच अपने कामकाज को और आक्रामक तरीके से लेकर जाएगी.।लेकिन राजनीति में सवाल सिर्फ बैठक का नहीं.बल्कि बैठक बुलाने के तरीके का भी है.।जिन विषयों पर चर्चा हुई, वे ऐसे मुद्दे थे जिन पर सामान्य रूप से अगले दिन भी बैठक की जा सकती थी। फिर ऐसी क्या जरूरत थी कि रातों-रात सभी मंत्रियों को राजधानी बुलाना पड़ा?यही वह सवाल है जिसने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है…। पिछले कुछ समय से छत्तीसगढ़ मंत्रिमंडल में संभावित फेरबदल की अटकलें लगातार चल रही हैं..। चर्चा है कि सरकार के प्रदर्शन और राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए कुछ नए चेहरों को मौका मिल सकता है, जबकि कुछ मंत्रियों की जिम्मेदारियों में बदलाव संभव है…।
हालांकि सरकार या संगठन की ओर से ऐसी किसी संभावना की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन भाजपा की कार्यशैली को देखते हुए राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि पार्टी बड़े फैसले अक्सर अंतिम समय में और बेहद गोपनीय तरीके से लेती है..। अब सवाल यही है कि क्या यह बैठक वास्तव में ढाई साल के कामकाज की समीक्षा और संगठनात्मक रणनीति के लिए थी… या फिर यह आने वाले किसी बड़े राजनीतिक फैसले की भूमिका लिख रही है..?फिलहाल इसका जवाब समय के गर्भ में है. लेकिन इतना तय है कि छत्तीसगढ़ भाजपा और सरकार के भीतर जो भी बड़ा निर्णय होगा, उसकी दिशा दिल्ली से तय होगी और अंतिम मुहर शीर्ष नेतृत्व ही लगाएगा..।
रायपुर के सीएम हाउस में चली यह पांच घंटे की मैराथन बैठक भी फिलहाल सवालों के घेरे में है। अब देखना यह होगा कि यह सिर्फ समीक्षा थी… या फिर सत्ता के शतरंज पर अगली बड़ी चाल चलने से पहले की खामोश बिसात।”सीएम हाउस की बंद कमरे की इस बैठक से बाहर भले ही आधिकारिक एजेंडा आया हो, लेकिन राजनीति के जानकार मानते हैं कि हर बड़ी हलचल की शुरुआत ऐसी ही खामोश बैठकों से होती है। अब इंतजार उस फैसले का है, जो छत्तीसगढ़ की राजनीति का अगला अध्याय लिख सकता है।”
“VCN Times, की रिपोर्ट

