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सिंधी सेवा महापंचायत’ के सम्मेलन पर विवाद, समाज को तोड़ने की साजिश का आरोप

‘सिंधी सेवा महापंचायत असवैधानिक: महेश दरयानी

तिल्दा-नेवरा। सिंधी समाज के भीतर संगठनात्मक विवाद अब खुलकर सामने आने लगा है। 19 जुलाई को तिल्दा में प्रस्तावित सिंधी सेवा महापंचायत के सम्मेलन को लेकर समाज के विभिन्न वर्गों में विरोध तेज हो गया है। विरोध करने वालों का आरोप है कि इस तरह के समानांतर संगठन समाज को एकजुट करने के बजाय विभाजित करने का काम कर रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, पूज्य छत्तीसगढ़ सिंधी पंचायत के निर्वाचित प्रदेश अध्यक्ष महेश दरियानी हैं, लेकिन उनके निर्वाचन के बाद कुछ लोगों ने अलग संगठन सिंधी सेवा महापंचायत का गठन कर लिया। तब से ही दोनों संगठनों के बीच वैचारिक मतभेद और संगठनात्मक विवाद लगातार सामने आते रहे हैं।

इसी क्रम में तिल्दा में आयोजित किए जा रहे सम्मेलन को लेकर समाज में विरोध के स्वर और तेज हो गए हैं। विरोध करने वालों का कहना है कि समाज से बड़ा कोई संगठन नहीं होता और यदि संगठन ही समाज को बांटने लगें तो उसका नुकसान पूरे समाज को उठाना पड़ता है।

इस मामले में पूज्य छत्तीसगढ़ सिंधी पंचायत के प्रदेश अध्यक्ष महेश दरियानी ने कहा कि सिंधी सेवा महापंचायत किसी भी प्रकार से वैधानिक संगठन नहीं है और उसका उद्देश्य समाज को विभाजित करना है। उन्होंने बताया कि पूज्य छत्तीसगढ़ सिंधी पंचायत के अंतर्गत रायपुर में 43 तथा प्रदेशभर में 128 पंचायतें सक्रिय हैं, जो समाज सेवा, चिकित्सा, खेल, योग एवं सामाजिक उत्थान के लिए हमेशा सक्रीय रहता है पंचायत 55 से अधिक कार्यक्रम सफलतापूर्वक आयोजित कर चुकी हैं।

हाल ही में बिलासपुर में आयोजित विभिन्न पंचायतों के अध्यक्षों की बैठक में भी 19 जुलाई को प्रस्तावित सम्मेलन का विरोध करते हुए निंदा प्रस्ताव पारित किया गया था और समाज को विभाजित करने वाले किसी भी प्रयास का विरोध करने का निर्णय लिया गया।

इधर, तिल्दा के  समाज सेवी सिंधी पंचायत के पूर्व कार्यकारणी अध्यक्ष सुन्दर पंजवानी,पूर्व उपाध्यक्ष लख्मीचंद नागवानी ,,राहुल तेजवानी सहित भाटापारा ,ब्लुबलौदा बाजार .भिलाई खुर्सीपार ,बिलासपुर के पंचायत सदस्यों  ने भी प्रस्तावित सम्मेलन का विरोध करते हुए कहा कि समाज के नाम पर कुछ स्वयंभू लोग नेतृत्व स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं। उनका आरोप है कि इस प्रकार के आयोजन समाज को जोड़ने के बजाय तोड़ने का काम कर रहे हैं। उन्होंने तिल्दा सिंधी पंचायत की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए पारदर्शिता की मांग की। सिंधी समाज के सिपाही इंदर कोटवानी ने इस आयोजन को अलीबाबा की दरबार करार दिया  है ..

उन्होंने  ने प्रदेशभर के सिंधी पंचायत अध्यक्षों से अपील की है कि वे समाज की एकता बनाए रखने के लिए इस सम्मेलन का विरोध करें तथा सिंधी सेवा महापंचायत को पत्र लिखकर समाज को विभाजित करने वाले प्रयासों से दूर रहने की चेतावनी दें। उन्होंने यह भी कहा कि यदि सम्मेलन के आयोजन में पूज्य सिंधी पंचायत की निधि या संसाधनों का उपयोग किया गया है तो उसका सार्वजनिक हिसाब भी समाज के सामने रखा जाना चाहिए।
समाज के जानकारों का मानना है कि संगठनात्मक मतभेदों का समाधान संवाद और सहमति से ही संभव है। यदि विवाद और समानांतर नेतृत्व की राजनीति जारी रही तो इसका सीधा असर समाज की एकता और सामाजिक गतिविधियों पर पड़ सकता है।

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