<तिल्दा नेवरा
तिल्दा नेवरा दोस्ती का कोई एक दिन नहीं होता, लेकिन हर साल अगस्त के पहले रविवार को मनाया जाने वाला फ्रेंडशिप डे रिश्तों में अपनापन और विश्वास का संदेश देता है। तिल्दा नेवरा में इस बार फ्रेंडशिप डे सिर्फ दोस्तों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि परिवार के रिश्तों में भी दोस्ती की खूबसूरत मिसाल देखने को मिली।
कहीं क्लास-1 की नन्ही पीहू ने अपनी दादी को अपना सबसे प्यारा दोस्त मानते हुए फ्रेंडशिप बैंड बांधा, तो कहीं नाती ने अपने दादा को बेस्ट फ्रेंड कहकर दोस्ती का इजहार किया। पीहू ने जब अपनी दादी के हाथ में फ्रेंडशिप बैंड बांधा तो दादी के चेहरे पर मुस्कान खिल उठी। दादी ने प्यार से कहा, “मेरी यह नातिन बहुत प्यारी है। यह अक्सर मुझे हंसते-हंसते ‘माय फ्रेंड’ कहकर बुलाती है। आज इसने बैंड बांधकर सचमुच मुझे अपना सबसे अच्छा दोस्त बना दिया। इससे बड़ा तोहफा मेरे लिए और क्या हो सकता है।”उन्होंने कहा मेरी दो और चुलबली नातिन है अंग्रजी में नजाने क्या क्या-क्या कहकर बात बात में गले मिलती है ..

नातिन दादी
सबसे भावुक तस्वीर तब सामने आई, जब बहुओं ने अपनी सास के हाथों में फ्रेंडशिप बैंड बांधकर कहा— “रिश्ता सिर्फ सास-बहू का नहीं, दोस्ती का भी है।”जब एक बहू याशिका खूबचंदानी ने अपनी सास अंजू के हाथ में फ्रेंडशिप बैंड बांधा। यह देख सास की आंखें नम हो गईं। भावुक होकर उन्होंने बहू को गले लगाया और कहा, “हर घर में सास-बहू का रिश्ता मां-बेटी और दोस्त जैसा हो। प्यार, विश्वास और सम्मान बना रहे, यही मेरी दुआ और आशीर्वाद है।”

सास बहु
रविवार होने के कारण स्कूलों की छुट्टी थी, लेकिन कई बच्चे अपने दोस्तों के साथ एक जगह जुटे। उन्होंने एक-दूसरे को फ्रेंडशिप बैंड बांधे, शुभकामनाएं दीं और छोटे-छोटे उपहार देकर दोस्ती का जश्न मनाया।
बुजुर्गों का कहना है कि पहले गांवों में दोस्ती केवल दो लोगों के बीच नहीं, बल्कि दो परिवारों के बीच होती थी। माता-पिता की दोस्ती को उनके बच्चे भी जीवनभर निभाते थे। पिता के मित्र को बच्चे आज भी कई गांवों में “फूल दादा” कहकर सम्मान देते हैं। वक्त बदला, हालात बदले, लेकिन सच्ची दोस्ती की मिठास आज भी बरकरार है।
दोस्ती पर बने फिल्मी गीत आज भी लोगों के दिलों में वही एहसास जगाते हैं—

नाती दादा
ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे…”,”सात अजूबे इस दुनिया में, आठवीं अपनी जोड़ी…” और”बने चाहे दुश्मन जमाना हमारा, सलामत रहे दोस्ताना हमारा…”एक शायर की पंक्तियां भी दोस्ती की अहमियत बयां करती हैं—”दोस्त साथ हों तो हर सफर आसान लगता है,वरना भीड़ में भी इंसान खुद को तन्हा पाता है।”फ्रेंडशिप डे ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि दोस्ती सिर्फ हम उम्र लोगों के बीच नहीं होती, बल्कि हर उस रिश्ते में होती है जहां भरोसा, अपनापन और दिल से जुड़ाव हो।

