आज देशभर में रक्षाबंधन का पावन पर्व मनाया जा रहा है और इसी के साथ आज साल का आखिरी चंद्र ग्रहण भी लग रहा है. राहत की बात तो यह है कि यह चंद्रग्रहण भारत.में दृश्यमान नहीं होगा, इसी कारण भारत में आज रक्षाबंधन का पर्व पूरी धूमधाम के साथ मनाया जा रहा है.
रक्षाबंधन के इस खास दिन पर बहनें अपने भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उनकी लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और खुशहाल जीवन की कामना करती हैं. वहीं, भाई भी अपनी बहनों की.
जीवनभर रक्षा करने और हर सुख-दुख में उनका साथ देने का वचन देते हैं. इस बार रक्षाबंधन पर भद्रा का साया नहीं रहेगा, ऐसे में पूरे दिन राखी बांधना शुभ माना जा रहा है. बहनें सुबह से ही अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांध सकेंगी. आइए जानते हैं कि आज राखी बांधने का शुभ मुहूर्त कब से कब तक है और इस दिन कौन.-कौन से शुभ संयोग बन रहे हैं.
पंचांग के मुताबिक, हर साल रक्षाबंधन का पर्व श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है. हिंदू पंचांग के अनुसार, इस बार सावन पूर्णिमा की तिथि 27 अगस्त यानी कल सुबह 9 बजकर 8 मिनट पर शुरू हो चुकी है और तिथि का समापन 28 अगस्त यानी आज सुबह 9 बजकर 48 मिनट पर होगा.
शास्त्रों के मुताबिक, भद्रा के दौरान राखी बांधना बहुत ही अशुभ होता है. हालांकि, इस बार रक्षाबंधन पर भद्रा का साया नहीं रहेगा. सावन पूर्णिमा पर भद्रा 27 अगस्त यानी कल सुबह 9 बजकर 8 मिनट से शुरू होकर कल रात 9 बजकर 32 मिनट पर समाप्त हो चुकी है. यानी रक्षाबंधन का मुहूर्त शुरू होने से पहले ही भद्रा काल समाप्त हो चुका है.
रक्षाबंधन पर भाई को राखी बांधने का सबसे पहला शुभ मुहूर्त आज सुबह 05 बजकर 57 मिनट से लेकर सुबह 9 बजकर 48 मिनट तक रहेगा. यानी भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधने के लिए बहनों को करीब 3 घंटे 51 मिनट का समय मिलने वाला है.
इसके अलावा, अगर आप किसी कारणवश इस मुहूर्त में राखी बांध पाएं तो अभिजीत मुहूर्त.में राखी बांध पाएं तो अभिजीत मुहूर्त भी रहेगा. जिसका समय आज सुबह 11 बजकर 56 मिनट से लेकर 12 बजकर 48 मिनट तक रहेगा.
राखी बांधने के कुछ अन्य मुहूर्त भी हैं जैसे-
शुभ चौघड़िया: दोपहर 12:28 बजे से 2:03 बजे तक
अपराह्न काल: दोपहर 1:44 बजे से शाम 4:16 बजे तक
चर चौघड़िया: शाम 5:13 बजे से 6:48 बजे तक
रक्षाबंधन पर आज करीब 11 शुभ योगों का संयोग बन रहा है. शतभिषा नक्षत्र के साथ अतिगंड, शोभन, शिव और विजय जैसे योग बनने की बात कही जा रही है. इसके अलावा
चंद्रादि, बुधादित्य, विमल, विपरीत राजयोग, धन, उभयचरी, शकट और सुनफा योग का भी संयोग बताया जा रहा है.
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार ऐसे शुभ योगों मेंपूजा-पाठ, दान और भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधने जैसे धार्मिक कार्यों को विशेष फलदायी माना जाता है. रक्षाबंधन के दिन ग्रहों की स्थिति भी महत्वपूर्ण जा रही है. सूर्य सिंह राशि में रहेंगे, जबकि गुरु कर्क राशि में स्थित होंगे. ज्योतिष में सूर्य को आत्मबल, प्रतिष्ठा और ऊर्जा का कारक माना जाता है, वहीं.गुरु को ज्ञान, शिक्षा, बुद्धि और समृद्धि से जोड़ा जाता है. चंद्रमा कुंभ राशि में रहेंगे. ऐसे में ग्रहों और नक्षत्रों का यह संयोग रक्षाबंधन को धार्मिक और ज्योतिषीय दोनों दृष्टि से खास बना रहा है.
इस अशुभ मुहूर्त में ना बांधें राखी?
हिंदू पंचांग के अनुसार, रक्षाबंधन पर जिस तरह भद्रा काल का ध्यान रखा जाता है उसी तरह राहु काल का ध्यान रखना चाहिए. राहु काल कल सुबह 10 बजकर 46 मिनट से शुरू होकर दोपहर 12 बजकर 11 मिनट तक रहेगा. ऐसे में, ज्योतिषविदों की सलाह है कि रक्षाबंधन पर राहु काल लगने से पहले या बाद में भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधें.
कैसे मनाएं रक्षाबंधन?
रक्षाबंधन के दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और अपने इष्टदेव का स्मरण करें. इसके बाद पूजा की थाली सजाएं, जिसमें रोली, चंदन, अक्षत, दही, राखी. मिठाई और घी का दीपक रखें. सबसे पहले भगवान की विधिवत पूजा करें. इसके बाद भाई को पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठाएं. राखी बांधते समय इस बात का रखें कि भाई और बहन दोनों का सिर ढका होना चाहिए. बहन सिर पर चुनरी रखें और भाई साफ रुमाल या किसी स्वच्छ वस्त्र से अपना सिर ढकें.
अब भाई के माथे पर रोली या चंदन का तिलक लगाएं और उस पर अक्षत रखें. भाई की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करें. इसके बाद भाई की कलाई. पर राखी बांधें, आरती उतारें और मिठाई खिलाकर उसके मंगलमय जीवन की प्रार्थना करें. राखी बांधने के बाद माता-पिता और घर के बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद जरूरलें. वहीं, भाई अपनी सामर्थ्य के अनुसार बहन को उपहार या आशीर्वाद दें और जीवनभर उसकी रक्षा व सहयोग का संकल्प लें.
देवराज इंद्र और इंद्राणी की राखी
माना जाता है कि एक बार दैत्य वृत्रासुर ने इंद्र का सिंहासन हासिल करने के लिए स्वर्ग पर चढ़ाई कर दी. वृत्रासुर बहुत ताकतवर था और उसे हराना आसान नहीं था. युद्ध में देवराज इंद्र की रक्षा के लिए उनकी बहन इंद्राणी ने अपने तपोबल से एक रक्षासूत्र तैयार किया और इंद्र की कलाई पर बांध दिया. इस रक्षासूत्र ने. इंद्र की रक्षा की और वह युद्ध में विजयी हुए. तभी से बहनें अपने भाइयों की रक्षा के लिए उनकी कलाई पर राखी बांधने लगीं.

