बिलासपुर। न्यायालयीन मामलों में ड्राफ्टिंग और आदेशों की भाषा को लेकर महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। अब न्यायिक दस्तावेजों में महिलाओं और अन्य व्यक्तियों के लिए ‘रखैल’ और ‘चरित्रहीन’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। इसी तरह ‘हवास’ और ‘किन्नर’ जैसे पुराने अथवा आपत्तिजनक माने जाने वाले शब्दों की जगह सम्मानजनक और उपयुक्त शब्दों का प्रयोग किया जाएगा।
न्यायालयीन कार्यवाही और दस्तावेजों में भाषा की गरिमा बनाए रखने के उद्देश्य से यह बदलाव किया जा रहा है। माना जा रहा है कि इस पहल से न्यायिक दस्तावेजों की भाषा अधिक संवेदनशील, सम्मानजनक और आधुनिक होगी। पुराने प्रचलित शब्दों के स्थान पर नए और उपयुक्त शब्दों का इस्तेमाल किया जाएगा, ताकि किसी व्यक्ति या समुदाय के प्रति अपमानजनक भाव न जाए।
ड्राफ्टिंग में किए जा रहे इन बदलावों का उद्देश्य न्यायालयीन भाषा को समय के अनुरूप बनाना और संवेदनशील मामलों में शब्दों के चयन को अधिक सावधानीपूर्ण करना है।

