धमतरी: कुरुद के संत गुरु घासीदास शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के बीए चतुर्थ सेमेस्टर के करीब 14 छात्रों को ऐसी परीक्षा का परिणाम जारी कर दिया गया, जिसकी परीक्षा उन्होंने दी ही नहीं थी. हैरानी की बात यह है कि रिजल्ट में संबंधित विषय की जगह बीकॉम विषय में ATKT (Allowed To Keep Terms) यानि अबसेंट और सप्लीमेंट्री दर्ज कर दी गई है.
दरअसल मामला बीए चतुर्थ सेमेस्टर के DSE-Money and Banking विषय से जुड़ा है. स्टूडेंट्स ने बताया कि सेमेस्टर एग्जाम टाइमटेबल में इस सब्जेक्ट की एग्जाम डेट 6 जुलाई 2026 थी, लेकिन परीक्षा के दौरान कॉलेज को इस सब्जेक्ट का प्रश्नपत्र ही नहीं मिला. कॉलेज प्रबंधन की ओर से इस संबंध में विश्वविद्यालय को पहले ही पत्राचार किए जाने की बात सामने आई है. कॉलेज के प्राचार्य द्वारा विश्वविद्यालय के कुलसचिव को भेजे गए पत्र में भी स्पष्ट किया गया है कि प्रश्नपत्र उपलब्ध नहीं होने के कारण निर्धारित तिथि पर परीक्षा नहीं ली जा सकी थी और इसकी सूचना विश्वविद्यालय को दी गई थी. इसके बावजूद 21 अगस्त 2026 को घोषित परीक्षा परिणाम में छात्रों को संबंधित विषय में परीक्षा देने से वंचित मानकर परिणाम प्रभावित कर दिया गया.
छात्रों का आरोप है कि DSE-Money and Banking की परीक्षा उन्होंने दी ही नहीं, लेकिन रिजल्ट में इस विषय के स्थान पर B.Com विषय का उल्लेख करते हुए ATKT दर्ज कर दी गई. हम लोगों के रिजल्ट में अबसेंट डाल दिए हैं. हमारा एग्जाम हुआ ही नहीं और बिना एग्जाम के रिजल्ट आ गया. मनी एंड बैंकिग बीए विभाग के अंतर्गत आता है और हमारा बीकॉम लिख दिए हैं, जबकि हमने बीकॉम लिया ही नहीं है. हम बीए के स्टूडेंट हैं.
हम 14 स्टूडेंट हैं. हमारे एग्जाम फार्म में मनी एंड बैंकिंग लिखा है. हमारे एडमिट कार्ड में मनी एंड बैंकिंग लिखा है, जबकि रिजल्ट में बीकॉम लिख दिया है. इस सब्जेक्ट का एग्जाम ही नहीं हुआ है. सिर्फ इंटरनल नंबर दिए हैं. अबसेंट डाल दिए हैं, इसलिए एटीकेटी आ गया है
रिजल्ट सामने आने के बाद प्रभावित छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के समक्ष अपनी समस्या रखी और ज्ञापन सौंपकर मामले में तत्काल सुधार की मांग की है. छात्रों ने कहा कि परीक्षा नहीं देने की स्थिति उनकी गलती नहीं थी, बल्कि प्रश्नपत्र उपलब्ध नहीं होने के कारण वे परीक्षा से वंचित हुए थे. ऐसे में बिना परीक्षा दिए उन्हें ATKT देना उनके भविष्य के साथ अन्याय है.
एग्जाम कब होगा पता नहीं लेकिन यूनिवर्सिटी बोल रही है कि एग्जाम कराएंगे. यूनिवर्सिटी ने यह भी कहा है कि मनी एंड बैंकिंग कोई सब्जेक्ट ही नहीं है तो टाइमटेबल में मनी एंड बैंकिंग नाम का सब्जेक्ट कहां से आया, ये सवाल है
छात्रों ने मांग की है कि उनके परीक्षा परिणाम में दर्ज गलत विषय और ATKT को तत्काल सुधारा जाए. DSE-Money and Banking विषय की परीक्षा दोबारा आयोजित कराई जाए, ताकि सभी प्रभावित छात्रों को परीक्षा देने का अवसर मिल सके.
छात्रों की एक बड़ी चिंता आगामी सेमेस्टर में प्रवेश को लेकर भी है. उनका कहना है कि यदि परीक्षा और रिजल्ट सुधार की प्रक्रिया में समय लगता है तो उन्हें अगले सेमेस्टर में प्रवेश लेने में परेशानी हो सकती है. इसलिए विश्वविद्यालय से मांग की गई है कि परीक्षा परिणाम में सुधार के साथ-साथ अगले सेमेस्टर में प्रवेश के लिए छात्रों को पर्याप्त समय दिया जाए.
एटीकेटी नाम का एक धब्बा लग जाएगा. जितनी पढ़ाई की है, उसका नुकसान हो जाएगा. दूसरे सेमेस्टर में रेग्युलर करना चाहते हैं, लेकिन बोल रहे हैं कि रेग्युलर एडमिशन नहीं देंगे-
ये बहुत बड़ी मिस्टेक है. ये पहली बार नहीं है. ये हमेशा से हो रहा है. मैं थर्ड सेमेस्टर में थी तो एग्जाम में पास कर दिया लेकिन इंटरनल के नंबर को यूनिवर्सिटी ने चढ़ाया ही नहीं और उसमें एटीकेटी ला दिया गया. यह यूनिवर्सिटी की गलती है. बार बार गलती हो रही है. ऐसे में हमारा भविष्य कैसे अच्छा बनेगा-स्टूडेंट
कॉलेज प्रबंधन ने भी विश्वविद्यालय को भेजे पत्र में छात्रों से प्राप्त आवेदन और संबंधित दस्तावेजों की प्रतियां भेजते हुए मामले का निराकरण करने का आग्रह किया है.
छात्रों को विश्वविद्यालय ने प्रवेश पत्र जारी किया, उसमें विश्वविद्यालय ने टाइमटेबल में DSE-Money and Banking की परीक्षा 6 अगस्त बताई. बच्चों के प्रवेश पत्र में भी जिक्र है कि मनी एंड बैंकिंग का पेपर होगा. बच्चों का जब रिजल्ट आया तो उसमें बीकॉम लिखा है और एटीकेटी दर्शा दिया गया है. आंतरिक मूल्यांकन का नंबर मनी एंड बैंकिंक में शो किया गया है लेकिन मुख्य परीक्षा में अबसेंट दिखाया जा रहा है. हम बच्चों का कल्याण चाहते हैं. बच्चे किसी भी तरीके से परीक्षा दे लें और रिजल्ट आ जाए. एक दूसरे पर दोषारोपण करने से समस्या हल नहीं होगी. इसका हल यही है कि विश्वविद्यालय बच्चों की परीक्षा आयोजित करा दे-
राजकुमार पांडेय, प्राचार्य, संत गुरु घासीदास शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय
छात्रों का कहना है कि वे अपनी गलती के कारण नहीं, बल्कि परीक्षा व्यवस्था में हुई चूक के कारण प्रभावित हुए हैं. ऐसे में विश्वविद्यालय को जल्द से जल्द मामले का समाधान कर उनका भविष्य सुरक्षित करना चाहिए.

