तिल्दा-नेवरा- तिल्दा विकासखंड के ग्राम देवरी में सरपंच के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर होने वाला मतदान ऐन वक्त पर रुक गया। गुरुवार को मतदान शुरू होने के ठीक आधे घंटे पहले सरपंच द्वारा प्रस्तुत किए गए हाईकोर्ट के स्टे आदेश के बाद पूरी प्रक्रिया स्थगित कर दी गई, जिससे गांव की राजनीति में नया मोड़ आ गया है।
तिल्दा देवरी के लोग महिला सरपंच के क्रियाकलापों से काफी नाराज चल रहे हैं. एक साल पहले जब पंचायत का चुनाव हुआ था तो ग्रामीणों ने उसे भारी बहुमत से चुनाव में जीत दिलाई थी। और सब कुछ ठीक-ठाक भी चल रहा था । लेकिन गांव में प्रस्तावित अग्रसेन स्टील एंड पावर कम्पनी ने शांत माहौल को एक प्रकार से अशांत [बिगाड़]कर रख दिया । दर असल यहां गाव की चारागाह की जमीन को सरकार ने कंपनी को दे दिया और जनसुनवाई की तारीख मुकर्रर कर दी।

जब इसकी जानकारी ग्रामीणों को हुई तो विरोध शुरू हुआ। और एक राय होकर ग्रामीणों ने अपना फैसला एसडीएम से लेकर कलेक्टर को सुना दिया कि यहां फैक्ट्री नहीं लगने देंगे। लेकिन नया मोड़ जब जब 13 पचों वाली ग्राम पंचायत के सरपंच दिव्या वर्मा ने पंचों को बिना विश्वास में लिए सचिन के साथ मिलकर कंपनी के नाम एनओसी जारी कर दी… जिसके बाद गांव आक्रोर्षित हो उठा। उसके बाद गांव वाले कंपनी और सरपंच के विरोध में खड़े हो गए। पहले सरपंच को समझाया गया लेकिन जब वह नहीं समझी तो 10 पंचाे ने हस्ताक्षर कर सरपंच के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का ज्ञापन तैयार कर एसडीएम के दफ्तर में जमा कर दिया..
उधर शासन ने ग्रामीणों के बढ़ते विरोध को देखते हुए बीते 8 अप्रैल को प्रस्तावित जनसुनवाई को रद्द कर दिया. दूसरी तरफ एसडीएम ने सरपंच के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के लिए दिए गए ज्ञापन पर गुरुवार 16 फरवरी का दिन चुनाव के लिए तय कर दिया। उसके बाद पंचायत सचिवालय के आदेश पर चुनाव की सारी तैयारियां पूरी कर लिए जाने के बाद चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के ठीक आधे घंटे पहले सरपंच ने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के द्वारा दिए गए स्टे की कॉपी को लाकर अधिकारी को सौंप दिया.. इसके बाद अविश्वास प्रस्ताव पर होने वाले चुनाव प्रक्रिया को रोक दिया गया।
सरपंच को न्यायालय से राहत तो मिल गई लेकिन गांव में सरपंच के प्रति लोगो में जो गुस्सा भड़का है वह पूरी तरह से शांत नहीं हो पाया है। इसका कारण यह भी है कि सरपंच अब ग्रामीणों को परेशान करने में लग गए हैं। सरपंच ने थाने में एक आवेदन देकर ग्रामीणों के आक्रोश को और भी बढ़ा दिया है.. सरपंच और उनके परिवार ने आरोप लगाया है कि ग्रामीणों ने उनकी अपनी पौनी पसारी बंद कर दी है। जबकि गांव के लोग सरपंच के आरोप को सिरे से नकार रहे हैं। ग्रामीणों को कहना है कि सरपंच के द्वारा झूठा आरोप लगाकर ग्रामीणों को परेशान किया जा रहा है, पुलिस को इस शिकायत पर बारीकी से जांच करनी चाहिए और हकीकत का पता करना चाहिए कि आखिर सरपंच के द्वारा इस तरह का घिनौना खेल क्यों खेला जा रहा है। पौनी पसारी बंद करने का अर्थ यह होता है कि होता है कि गांव के पौनी पसारी यानी की नाई रावत जो घरों में साल भर के लिए लगते हैं उनका आना जाना बंद किया जाता है.. लेकिन सरपंच के यहां ऐसा कोई आना जाना बंद नहीं हुआ है।
सरपंच के द्वारा ग्राम सभा और पंचों के विरोध के बावजूद कंपनी को दिए गए अनापत्ति प्रमाण पत्र से शुरू हुआ विवाद अब एक दूसरे पर झूठे आरोप लगाने तक पहुंच गया है अगर इस पर शासन ने गौर नहीं किया और हल्के में लिया तो निश्चित रूप से छोटी सी गांव में विरोध की साल्की चिंगारी कभी भी भभक उठेगी, सरपंच के पीछे किसका हाथ है यह तो गांव वाले ही बता सकते हैं और जो परदे के पीछे इस मामले को हवा दे रहे है ,उनका मकसद क्या है वो हि बता सकते है ।,
तिल्दा नेवरा थाना की निरीक्षक रमाकांत तिवारी ने बताया कि सरपंच ने ग्रामीणों के विरुद्ध एक आवेदन दिया है जिसकी हम जांच कर रहे हैं. उन्होंने दावा किया कि गांव में शांति है किसी प्रकार का कोई तनाव ग्रामीण और सरपंच के बीच नहीं है फिर भी हमारी नजर गांव पर लगी हुई है।

