ग्रामीणों ने प्रलोभन देकर धर्मांतरण और हिंदू देवी-देवताओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी का लगाया आरोप, पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर शुरू की जांच
तिल्दा-नेवरा-रायपुर जिले के तिल्दा ब्लॉक के माठ गांव में कथित धर्मांतरण के आरोप को लेकर बुधवार की रात को तनाव की स्थिति बन गई। ग्रामीणों की शिकायत पर खरोरा पुलिस ने दो पास्टरों सुशांत ज्ञानिक और पीयूष पटेल के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। वहीं, कार्रवाई के विरोध में बड़ी संख्या में क्रिश्चियन समाज के लोग खरोरा थाने पहुंचे और निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए ज्ञापन सौपा ।
ग्रामीणों के अनुसार, माठ गांव के वार्ड क्रमांक-1 स्थित एक आदिवासी परिवार के घर में प्रार्थना सभा आयोजित की जा रही थी। आरोप है कि इस दौरान कुछ लोगों पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया जा रहा था तथा हिंदू देवी-देवताओं के संबंध में आपत्तिजनक टिप्पणियां की जा रही थीं। इसकी जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए।
ग्रामीणों का कहना है कि घर के बाहर लाउडस्पीकर पर प्रार्थना चल रही थी। उनका आरोप है कि विरोध के बाद भी प्रार्थना बंद नहीं की गई और धार्मिक प्रवचन जारी रहा। इसके बाद ग्रामीणों ने विरोध जताते हुए कहा कि यदि प्रार्थना करनी है तो चर्च में करें, लेकिन गांव में कथित रूप से प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन कराने का प्रयास स्वीकार नहीं किया जाएगा।
स्थिति बिगड़ने की सूचना मिलते ही खरोरा पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों को शांत कराया। पुलिस दोनों पास्टरों को थाने ले आई। इसके बाद माठ गांव के ग्रामीण और दूसरी ओर क्रिश्चियन समाज के लोग भी बड़ी संख्या में थाने पहुंच गए।ग्रामीणों की लिखित शिकायत के आधार पर पुलिस ने दोनों पास्टरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया और न्यायिक प्रक्रिया के तहत जेल भेज दिया।
गांव के पूर्व सरपंच एवं समाजसेवी सुरेंद्र वर्मा ने आरोप लगाया कि गरीब और आदिवासी परिवारों को प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन कराने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण ऐसी गतिविधियों का विरोध करेंगे। वहीं धर्म रक्षा समिति के पदाधिकारियों ने भी भविष्य में कथित धर्मांतरण के किसी भी प्रयास का विरोध करने की बात कही।
दूसरी ओर, एफआईआर दर्ज होने के बाद क्रिश्चियन समाज के लोगों ने कार्रवाई का विरोध करते हुए खरोरा थाने का घेराव किया। उनका कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और बिना तथ्यों की पुष्टि के कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए।
पुलिस का पक्ष
पुलिस का कहना है कि ग्रामीणों की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया गया है। पूरे घटनाक्रम की जांच की जा रही है और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।फिलहाल गांव में स्थिति शांत बताई जा रही है, लेकिन धर्मांतरण के आरोप और उसके विरोध को लेकर माहौल संवेदनशील बना हुआ है। अब सभी की नजर पुलिस जांच पर टिकी है, जिससे यह स्पष्ट होगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और आगे क्या कार्रवाई होती है।

