“आठ अर्थियां उठीं, तब टूटा मौत का रहस्य” और “मौत बनकर घूमता रहा गांव में, 3 महीने बाद खुला खौफनाक राज”
इंदर कोटवानी …..
कहते हैं कि मौत जब आती है तो कोई न कोई वजह बनती है. लेकिन छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले के खर्वे गांव में मौत की वजह बना एक ऐसा चेहरा.। जो लोगों के बीच रहता था, हंसता-बोलता था, और कथित तौर परअपने ही गांव के लोगों को शराब में जहर मिलाकर मौत की नींद सुला देता था। हर मौत के बाद गांव में एक ही सवाल गूंजता था…आखिर अगला नंबर किसका होगा ? लेकिन किसी और का नंबर आता इसके पहले ही पुलिस ने इन संदिग्ध मौत के मामले में आरोपी रामसहाय जायसवाल को गिरफ्तार कर लिया। अब वो पुलिस के शिकंजे में है .उस पर एक नहीं बल्कि आठ हत्याओं का आरोप है। दो दिनों की कड़ी पूछताछ के बाद आरोपी रामसहाय जायसवाल ने पुलिस के सामने अपना जुर्म कबूल कर लिया है।

.बलौदाबाजार जिले के खर्वे गांव..जहां कभी चौपालों में हंसी गूंजती थी, वहां आज भी कई घरों में सन्नाटा पसरा हुआ है। किसी घर का बेटा अब कभी वापस नहीं आएगा…किसी की मांग का सिंदूर हमेशा के लिए उजड़ गया.किसी बूढ़ी मां की आंखें आज भी दरवाजे पर बेटे का इंतजार करती हैं…और किसी मासूम बच्चे को आज भी समझ नहीं आता कि उसके पिता आखिर लौटकर क्यों नहीं आए,। पुलिस के मुताबिक गांव में एक-एक कर हुई आठ संदिग्ध मौतों के मामले में आरोपी रामसहाय जायसवाल को गिरफ्तार कर लिया गया है। रविवार सुबह पुलिस आरोपी को हथकड़ी लगाकर उसके घर, दुकान और घटनास्थल पर लेकर पहुंची, जहां से कथित तौर पर शराब में मिलाया जाने वाला जहरीला पदार्थ बरामद किया गया।
उधर आरोपी को सामने देखकर गांव का गुस्सा भी फूट पड़ा। लोगों ने उसे जमकर खरी-खोटी सुनाई। क्योंकि ग्रामीणों के लिए वह सिर्फ एक आरोपी नहीं, बल्कि आठ परिवारों की बर्बादी की वजह बन चुका है।
गाव में मौतों का यह सिलसिला 6 फरवरी से शुरू हुआ था।
पहले बद्री पटेल…फिर बुढालू साहू…इसके बाद बुधराम जायसवाल…छत्तूराम साहू…विनोद साहू…गजानंद मांझी…चैतूराम साहू…और फिर महेतरू साहू…महज तीन महीनों में आठ लोगों की मौत ने पूरे गांव को दहला दिया था।
ग्रामीणों का आरोप है कि इन सभी लोगों को किसी न किसी रूप में आरोपी द्वारा शराब उपलब्ध कराई गई थी.. और शराब पीने के बाद उनकी तबीयत बिगड़ी और फिर मौत हो गई….।इतना ही नहीं, गांव में यह चर्चा भी फैल गई थी कि कथित रूप से गड़े धन की चाह में 21 लोगों की बलि देने की तैयारी थी,हलाकि इस दावे को पुलिस निराधार बता रही है.लेकिन ग्रामीणों के बीच यह चर्चा लंबे समय से भय का कारण बनी हुई थी। ग्रामीणों के विरोध के बाद जब पुलिस ने जब शक के आधार पर रामसहाय जायसवाल को पूछताछ के लिए बुलाया, तब शायद किसी ने नहीं सोचा था कि यह पूछताछ आठ मौतों के सबसे बड़े रहस्य का पर्दाफाश कर देगी..। लेकिन जब पुलिस ने सबूतों की परतें खोलनी शुरू कीं, तो कथित तौर पर उसके चेहरे का सुकून गायब होने लगा। आखिरकार वह टूट गया और पुलिस के सामने ऐसे खुलासे किए, जिसने जांच अधिकारियों तक को चौंका दिया..।पुलिस का दावा है की पुचतच में कई अहम् जानकारिय मिली है ..
आरोपी राम सहाय ने पुलिस को बताया कि बद्री पटेल जिसकी सबसे पहले मौत हुई थी उनके द्वारा रामसाय के साथ बदसलूकी की जाती थी इसी बात से वह बद्री से खफा था .उसके बाद आरोपी ने उसको शराब में जहर देकर मार डाला..पुलिस का मानना है कि आरोपी रमसा एक साइको किस्म का व्यक्ति था यही कारण कि वह एक के बाद एक व्यक्ति को जहर देकर मारता रहा..
लेकिन इस पूरी कहानी का सबसे दर्दनाक पहलू सिर्फ एक आरोपी की गिरफ्तारी नहीं है…सबसे बड़ा सवाल उन आठ घरों का है…जहां अब चूल्हा तो जलता है, लेकिन खाने वाले कम हो गए हैं…जहां बच्चों के सिर से पिता का साया उठ चुका है…जहां बूढ़े मां-बाप की आंखों में आज भी आंसू सूखे नहीं हैं…रामसहाय अब सलाखों के पीछे रहेगा…कानून उसे सजा भी देगा..लेकिन क्या कोई अदालत उन आठ परिवारों को उनका बेटा लौटा सकती है?क्या कोई फैसला किसी पत्नी को उसका पति वापस दे सकता है?क्या कोई सजा उन मासूम बच्चों के सिर पर फिर से पिता का हाथ रख सकती है? और सबसे बड़ा सवाल…अगर गांव में कथित रूप से शराब बिक्री की जानकारी पहले से थी…अगर समय रहते कार्रवाई होती…तो क्या आज आठ अर्थियां गांव से निकलतीं?यह सवाल सिर्फ एक आरोपी से नहीं…बल्कि पूरे सिस्टम से जवाब मांग रहा है।

