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लालू के सर अब तक छाया हुआ जुनून.. बोले ‘पीएम के लिये बिन पत्नी सब सून’

वन्देमातरम्… वरिष्ठ पत्रकार जवाहर नागदेव की खरी…. खरी….

पीएम को बिना पत्नी के नहीं होना चाहिये, ये बयान है लालू यादव का। लालू यादव याद हैं न। जेल यात्रा पे जेल यात्रा, जेल यात्रा पे जेल यात्रा। दे दना दन। कभी राजनीति की धुरी हुआ करते थे इसलिये याद हुआ करते थे और अब जेल जाने का रिकाॅर्ड बना रहे हैं इसलिये याद आते हैं। करोड़ों का चारा खा गये और अब करोड़ों की जमीन का मामला चल रहा है।

अच्छा हुआ आसमान पर पकड़ की कोई गुंजाईश नहीं मिली अन्यथा बादलों और बरसात पर भी ‘खाने’ का जुगाड़ बिठाल लेते। तो जमीन के बदले लोगों को रेल्वे में नौकरियों बांटीं। यानि जिसके पास योग्यता थी वो नहीं, जिसके पास जमीन थी वो नौकरी पा गया। बदले में अपनी जमीन उन्हें देनी पड़़ाी।
वही लालू यादव कह रहे हैं कि पीएम को बिना पत्नी के नहीं होना चाहिये। सबको मालूम ही है कि मोदीजी के साथ पत्नी नहीं है और राहुल गांधी के पास पत्नी नहीं है।

आदर्शों से दूर है पीढ़ी
पति को समझा तरक्की की सीढ़ी

लालू की पत्नी हैं राबड़ी देवी, जो लालू के कमीशन की रबड़ी खाकर जेल यात्रा जाने पर  आसन पर बैठीं और उनके आते ही आसन उन्हें सौंप दिया। बस लालू भक्त बन गये पत्नी के। यहां तो ज्योति मौर्या जैसी पत्नियां भी हैं जिन्हें एसडीएम का पद क्या मिला, पति को ही दुत्कार दिया। जबकि पति ने पत्नी को पद पर लाने के लिये  भरपूर साथ दिया। ये चर्चाएं सारे देश में जोरों पर हैं।

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एक मामला महाराष्ट्र का, पुराने लोगों को याद होगा कि एक नेता ने अपनी संदर महिला कार्यकर्ता से विवाह कर लिया और भरपूर मजे लिये। अपनी पत्नी को भी राजनीति में आगे बढ़ाया। एक दिन ऐसा आया कि पत्नी नेताजी से आगे बढ़ गयी।

और नेताजी याने अपने पति से अपनी स्थिति अच्छी पाकर और और उपर जाने के लिये उनके विरोधियों के संग हो ली और पतिदेव को ही ठेंगा दिखा दिया। उस महिला नेत्री का मकसद ही राजनीति था परिवार नहीं। नेताजी को उन्होनें पति के रूप् में नहीं, सीढ़ी के रूप् में ही इस्तेमाल किया और यही एकमात्र लक्ष्य भी था। हे राम…. ।

पत्नी पतन कराती है

एक बार एक स्कूल में वाद-विवाद प्रतियोगिता में स्कूल की एक बच्ची के भाषण की एक लाईन याद आती है कि ‘पत्नी पतन कराती है’। तर्क ये था कि जब पत्नी की डिमाण्ड बढ़ती जाती हैं और वो पति को परेशान करती है तो पति भ्रष्ट आचरण की ओर प्रेरित होता है। धन कमाने के लिये वो नैतिकता को ताक पर रख देता है। तात्पर्य ये कि इंसान सारे गुनाह करता ही परिवार के लिये है।

बच्ची के तर्क के हिसाब से जिनकी पत्नी नहीं होती वे लोग ज्यादा नैतिक, ईमानदार होते हैं। मसलन मोदीजी। मसलन अटल बिहारी बाजपेई। लेकिन भाजपाईयों का दावा है कि ये धारणा राहुल गांधी का नाम आने पर टूट जाती है।

लालू यादव अक्सर राजनीति में एक बिंदास हंसोड़ की भूमिका निभाते रहे हैं। तो बस अब समझ जाईये… उनकी बात को कहीं से भी करेक्ट नहीं कहा जा सकता। वैसे भी उनका दूध-भात है और उनसे सहानुभूति के दिन आ गये हैं क्योंकि खानदान के कई सदस्यों पर भ्रष्ट आचरण के लिये जेल जाने की नौबत आ गयी है। अब वे दया के पात्र हो गये हैं।
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