फर्जी NOC मामले में कार्रवाई नहीं होने पर पंचायत भवन में तालाबंदी, सैकड़ों ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन
तिल्दा -नेवराग्राम पंचायत देवरी में कथित फर्जी एनओसी जारी किए जाने का मामला एक बार फिर गरमा गया है। सरपंच और सचिव के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने से नाराज सैकड़ों ग्रामीणों ने रविवार को पंचायत भवन पहुंचकर तालाबंदी कर दी। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिला, पुरुष और बच्चे शामिल रहे। ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि जब तक सरपंच और सचिव के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती, पंचायत भवन का ताला नहीं खोला जाएगा।
ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम पंचायत की चारागाह भूमि पर प्रस्तावित पावर प्लांट का गांव में विरोध होने के बावजूद सरपंच और सचिव द्वारा कथित तौर पर फर्जी तरीके से एनओसी जारी की गई। इस मामले को लेकर पहले भी ग्रामीणों ने जनसुनवाई में विरोध दर्ज कराया था। बाद में ग्रामीणों ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के साथ तिल्दा-नेवरा थाने का घेराव भी किया था।

ग्रामीणों के अनुसार, भूपेश बघेल ने देवरी और अल्दा में प्रस्तावित संयंत्रों के लिए जारी कथित फर्जी एनओसी के मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। इसके बाद अल्दा ग्राम पंचायत के मामले में अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई, जबकि देवरी मामले में भी जल्द दो दिन में एफआईआर का आश्वासन दिया गया था। ग्रामीणों का दावा है कि करीब एक माह बीत जाने के बावजूद देवरी मामले में अभी तक सरपंच और सचिव के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं हुई है।
30 जुलाई को दिया था अल्टीमेटम
ग्रामीणों ने 30 जुलाई को एसडीएम कार्यालय में ज्ञापन देकर चेतावनी दी थी कि 5 अगस्त तक कार्रवाई नहीं हुई तो पंचायत भवन में तालाबंदी की जाएगी। ग्रामीणों का कहना है कि तय समय सीमा बीतने के बाद भी कार्रवाई नहीं होने पर रविवार को सैकड़ों लोग पंचायत भवन पहुंचे और सामूहिक रूप से तालाबंदी कर दी।
प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने जमकर नारेबाजी की। “सरपंच हटाओ, गांव बचाओ” जैसे नारों से पंचायत परिसर गूंज उठा।
ग्रामीणों ने सरपंच और सचिव पर पंचायत के विकास कार्यों में भी गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि करीब 20 लाख रुपये की लागत से बनी पुलिया महज दो महीने में क्षतिग्रस्त हो गई। वहीं स्ट्रीट लाइट की कथित अवैध खरीदी कर पंचायत की राशि निकालने के भी आरोप लगाए गए हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि सरपंच और सचिव को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त होने के कारण प्रशासन और पुलिस स्तर पर कार्रवाई नहीं हो रही है। उनका यह भी कहना है कि पुलिस लगातार जांच का हवाला देकर मामले को टाल रही है।
वहीं ग्रामीणों द्वारा जांच प्रतिवेदन का हवाला देते हुए दावा किया जा रहा है कि पंचायत के रिकॉर्ड और रजिस्टर सरपंच-सचिव की अभिरक्षा में रहते हैं और उन्हीं की देखरेख में पंचायत के दस्तावेज संचालित होते हैं। इसके बावजूद एफआईआर में देरी को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

