बोल बम के जयकारों से गूंजा तिल्दा-नेवरा, रातभर डीजे पर थिरकते नजर आए शिवभक्त
तिल्दा-नेवरा। सावन सोमवार के चौथे और आखिरी सोमवार को तिल्दा-नेवरा क्षेत्र के लखना सोमनाथ में कांवड़ियों का बड़ा मेला लगेगा। रविवार सुबह से ही अलग-अलग जत्थों में कांवड़िए बोल बम के जयकारे लगाते हुए सोमनाथ की ओर रवाना होते नजर आए। कोई डीजे की धुन पर नाचते हुए तो कोई डाक बम बनकर दौड़ते हुए भगवान शिव के दिव्य शिवलिंग पर जल चढ़ाने के लिए सोमनाथ पहुंचा ।कई कांवड़िए भगवान शिव का वेश धारण कर यात्रा करते भी दिखाई दिए। सुबह से देर रात तक पूरा क्षेत्र बोल बम के जयकारों से गूंजायमान रहा।
शिवभक्तों के लिए जगह-जगह लगे सैकड़ों स्टॉल
सोमनाथ में केवल तिल्दा नेवरा क्षेत्र ही नहीं, बल्कि बिलासपुर, बेमेतरा,रायपुर और बलौदाबाजार क्षेत्र से भी हजारों कांवड़ियों के पहुंचने की उम्मीद है। कांवड़ियों की सुविधा के लिए सिमगा से लेकर भूमिया. 22 मील और तिल्दा-रायपुर से लेकर भूमिया सोमनाथ तक जगह-जगह सैकड़ों स्टॉल लगाए गए हैं।
कहीं फल-फ्रूट से कांवड़ियों का स्वागत किया जाएगा तो कहीं पूरी-पकौड़े, चाय-पानी, लेमन टी और नाश्ते की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा एक दर्जन से अधिक स्थानों पर भोजन भंडारे का भी आयोजन किया गया है।
रातभर सड़कों पर पुलिस की पेट्रोलिंग
कांवड़ यात्रा और श्रद्धालुओं की सुरक्षा को देखते हुए रातभर शहर से लेकर सोमनाथ के बीच पुलिस की पेट्रोलिंग गाड़ियां घूमती नजर आईं। लगातार हो रही बारिश के चलते खारून और शिवनाथ नदी का जलस्तर बढ़ा हुआ है। इसे देखते हुए नदी किनारे भी पुलिस की व्यवस्था की गई है।
20 हजार से ज्यादा श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद
हर साल सावन के आखिरी सोमवार को सोमनाथ में करीब 20 से 25 हजार श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन और जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं। इस बार लगातार हो रही बारिश के कारण श्रद्धालुओं की संख्या में थोड़ी कमी आने की संभावना है, बावजूद इसके 15 से 20 हजार श्रद्धालुओं के सोमनाथ पहुंचने की उम्मीद है।श्रद्धालु पवित्र संगम स्थल में डुबकी लगाने के बाद भगवान शिव के दर्शन और जलाभिषेक करेंगे।
हालांकि सावन के अभी चार दिन शेष हैं, इसलिए शिवभक्तों का सोमनाथ पहुंचना जारी रहेगा, लेकिन आखिरी सोमवार के बाद श्रद्धालुओं की संख्या में काफी कमी आएगी।
इधर, तिल्दा-नेवरा शहर और आसपास के शिव मंदिरों में भी सावन के अंतिम सोमवार को लेकर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। कई मंदिरों में भजन कार्यक्रमों का आयोजन भी किया गया है।

