12 घंटे ड्यूटी के बदले ₹16 हजार वेतन का आरोप, महिलाओं को ₹200 रोज देने की शिकायत; प्रबंधन के आश्वासन पर खत्म हुआ आंदोलन
।तिल्दा-नेवरा-तिल्दा के पास ग्राम टंडवा और सिलपट्टी के बीच स्थित वक्कल केबल एंड ट्रांसमिशन लिमिटेड के खिलाफ मजदूरों और ग्रामीणों ने सोमवार को फैक्ट्री गेट पर धरना-प्रदर्शन किया। सिलपट्टी के सरपंच लोकेश कश्यप के नेतृत्व में ग्रामीण और मजदूर सुबह करीब 8 बजे कंपनी के मुख्य गेट पर पहुंचे और नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने किसी को भी फैक्ट्री के अंदर आने-जाने नहीं दिया।
ग्रामीणों ने एसडीएम को दिए ज्ञापन में कंपनी प्रबंधन पर मजदूरों का शोषण करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि मजदूरों से करीब 12 घंटे काम कराने के बावजूद ₹16 हजार प्रतिमाह वेतन दिया जाता है। वहीं महिला श्रमिकों को कथित तौर पर ₹200 प्रतिदिन देकर 8 घंटे काम कराया जा रहा है। ग्रामीणों ने श्रम नियमों का पालन नहीं करने का भी आरोप लगाया।
प्रदर्शनकारियों ने फैक्ट्री से होने वाले प्रदूषण को लेकर भी नाराजगी जताई। उनका आरोप है कि प्रदूषण के कारण ग्रामीण परेशान हैं और फसलों को भी नुकसान हो रहा है। ग्रामीणों ने प्रदूषण पर तत्काल रोक लगाने की मांग की। इसके अलावा गांव के विकास कार्यों में कंपनी द्वारा सहयोग नहीं किए जाने और CSR के माध्यम से कोई काम नहीं कराए जाने की शिकायत भी की गई।
धरने में जिला पंचायत सभापति प्रतिनिधि महेंद्र साहू भी मजदूरों के साथ बैठे। उन्होंने कंपनी प्रबंधन को चेतावनी देते हुए कहा कि मजदूरों का शोषण बंद होना चाहिए और गांव के विकास में नियमों के अनुसार सहयोग किया जाना चाहिए, अन्यथा आगे जोरदार आंदोलन किया जाएगा।
करीब 6 घंटे तक चले धरना-प्रदर्शन के बाद कंपनी प्रबंधन ने मजदूरों से 8 घंटे ड्यूटी कराने और नियमानुसार वेतन देने का आश्वासन दिया। महिला श्रमिकों को भी सरकार के निर्धारित नियमों के अनुसार मजदूरी देने की बात कही गई। प्रबंधन ने गांव के विकास कार्यों में सहयोग करने का भी आश्वासन दिया, जिसके बाद धरना समाप्त किया गया।
सरपंच लोकेश कश्यप ने बताया कि कंपनी प्रबंधन ने बातचीत के दौरान कहा है कि फिलहाल कंपनी CSR की श्रेणी में नहीं आती, इसलिए CSR मद से राशि खर्च नहीं की जा सकती। हालांकि प्रबंधन ने गांव के विकास कार्यों में अपने स्तर पर सहयोग करने का आश्वासन दिया है।

