छत्तीसगढ़

गजब की राजनीति करते हैं. भिलाई के हमारे दोनों विधायक

भिलाई वैशाली नगर के विधायक रिकेश सेन और भिलाई नगर के विधायक देवेंद्र यादव गजब की राजनीति करते हैं। गौतम नगर में जो तोड़फोड़ हुई उसकी जानकारी तोड़फोड़ होने के बाद दोनों विधायकों को लगी। नगर निगम में कांग्रेस का महापौर नीरज पाल हैं जिनके नेतृत्व में सड़क निर्माण की प्रक्रिया शुरू हुई। अब गजब की राजनीति देखिए विधायक रितेश सेन को तोड़फोड़ हो जाने के बाद जब पता चला तो उन्होंने नगर निगम को सख्ती से निर्देशित किया की गुण दोष के आधार पर प्रभावित पीड़ित लोगों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत सिर्फ 75000 रुपए में तुरंत मकान दिया जाए।

दूसरे विधायक देवेंद्र यादव की राजनीति देखिए कि वह पीड़ित प्रवाहित लोगों से मिलने के लिए चले गए और उनसे पूछ रहे हैं की तोड़फोड़ करने से पहले आपको नोटिस मिला कि नहीं, मकान देने का वादा किया गया था कि नहीं ? अब समझिए की इन दोनों की राजनीति गजब की है कि नहीं। दोनों विधायकों के प्रतिनिधि निगम में रहते हैं और वहां की पल-पल की जानकारी दोनों को देते हैं, सड़क निर्माण की जानकारी भी दोनों विधायकों को अच्छे से मालूम होगी और गजब की राजनीति देखिए जब सब कुछ टूट गया तो मरहम लगाने के लिए पहुंच गए। प्रभावित लोगों को भी लगा की तोड़फोड़ की पूरी जवाबदारी नगर निगम कमिश्नर की है। दोनों विधायक और महापौर साफ सुथरे हैं।

नगर निगम भिलाई में गौतम नगर में सड़क बनाने के लिए करीब 53 अवैध निर्माण को तोड़ दिया। नहर के ऊपर सड़क बनाने के लिए नगर निगम ने रूपरेखा भी बना ली है। अंतिम निर्णय लेते हुए कार्य प्रारंभ भी कर दिया।

7 साल पीछे जाएं तो नहर के ऊपर भी ट्रांसपोर्ट नगर सड़क से नंदिनी रोड तक इसी तरह से सड़क का निर्माण किया गया तब भिलाई के विधायक एवं मंत्री प्रेम प्रकाश पांडे रहे उन्होंने इस सड़क को अपनी प्रतिष्ठा बना ली थी और आखिरकार यह सड़क काफी सुंदर बन गया लेकिन तब कांग्रेस के युवा नेता रहे देवेंद्र यादव ने इसका भरपूर विरोध किया पूरी कोशिश की सड़क न बन सके, पर प्रेम प्रकाश पांडे की इच्छा शक्ति के चलते आखिरकार सड़क बन ही गया। लेकिन प्रेम प्रकाश पांडे को सड़क बनाने का खामियाजा भुगतना पड़ा तोड़फोड़ के दौरान डेंगू फैलने की जवाबदारी इसी तोड़फोड़ को दी गई थी प्रेम प्रकाश पांडे चुनाव हार गए। भाजपा के विधायक रिकेश सेन और कांग्रेस के विधायक देवेंद्र यादव क्या इस सड़क निर्माण का विरोध करते हैं? या इन्हें सड़क बनाने की कोई जानकारी नहीं थी ? जो कि संभव नहीं है।

जनता भी है कि जहां उन्हें लगता है वह अवैध कब्जा कर लेते हैं तालाब किनारे, सड़क किनारे ,नहर किनारे या अन्य सार्वजनिक जगह पर अवैध निर्माण कर लेते हैं। तब संबंधित अधिकारी रोकने की कोशिश नहीं करते हैं। इसी तरह मरोदा टैंक से टाउन शिप एवं अन्य क्षेत्रों को पीने का पानी सप्लाई किया जाता है उसे टैंक के किनारे बड़ी संख्या में अवैध कब्जा हो गया है जो ठीक नहीं है पर उसे जब तोड़ने जाएंगे तो फिर से गजब की राजनीति होगी।

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