इंदर कोटवानी.
रायपुर। छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर चल रही सियासी जंग अब आमने-सामने की बहस तक पहुंच गई है। रायपुर प्रेस क्लब में आज पीएम आवास के मुद्दे पर डिप्टी सीएम एवं पंचायत मंत्री विजय शर्मा और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बीच बहस के आसार हैं। विजय शर्मा थोड़ी देर में प्रेस क्लब पहुंच सकते हैं। वहीं, भूपेश बघेल ने भी 15 सितंबर को प्रेस क्लब में बहस के लिए तैयार होने की बात कही थी।
दरअसल, पीएम आवास को लेकर आरोप-प्रत्यारोप के बीच विजय शर्मा ने भूपेश बघेल को खुली बहस की चुनौती दी थी। शर्मा ने कहा था कि वे पीएम आवास के मुद्दे पर भूपेश बघेल के साथ कहीं भी चर्चा के लिए तैयार हैं और बहस का मंच व समय प्रेस क्लब पर छोड़ दिया था। इसके बाद बघेल ने चुनौती स्वीकार करते हुए 15 सितंबर को प्रेस क्लब में बहस की बात कही थी।
आंकड़ों को लेकर आमने-सामने हैं दोनों पक्ष
पीएम आवास की संख्या और किस सरकार के कार्यकाल में कितने आवास बने, यही इस सियासी बहस का सबसे बड़ा मुद्दा है। विजय शर्मा का दावा है कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में 11 लाख से अधिक प्रधानमंत्री आवास पूरे किए जा चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा है कि प्रदेश में अब तक कुल 20.40 लाख आवास पूरे हो चुके हैं और चार लाख से अधिक आवास निर्माणाधीन हैं।
वहीं भूपेश बघेल लगातार इन आंकड़ों को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। उनका तर्क है कि वर्तमान सरकार द्वारा बताए जा रहे आंकड़ों में पहले से स्वीकृत और पूर्ववर्ती सरकारों के कार्यकाल के आवास भी शामिल हैं। बघेल ने यह भी सवाल उठाया है कि वर्तमान सरकार ने कितने आवास स्वीकृत किए और उनमें से कितने पूरे हुए, इसे स्पष्ट रूप से बताया जाना चाहिए।
भाजपा का कांग्रेस पर हमला
बहस से पहले भाजपा भी पीएम आवास के मुद्दे को लेकर कांग्रेस पर हमलावर है। हाल ही में भाजपा ने सोशल मीडिया पर पोस्टर जारी कर कांग्रेस शासन और भाजपा सरकार के बीच पीएम आवास को लेकर तुलना की और दावा किया कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रयासों से प्रदेश को 3.65 लाख अतिरिक्त पीएम आवास की मंजूरी मिली है।
कांग्रेस ने निमंत्रण पर उठाया सवाल
इधर कांग्रेस की ओर से कहा गया है कि उसे प्रेस क्लब की ओर से कोई आमंत्रण नहीं मिला है। जबकि बहस के लिए दोनों नेताओं को निमंत्रण भेजे जाने की बात सामने आई है। ऐसे में अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आज प्रेस क्लब में विजय शर्मा और भूपेश बघेल वास्तव में आमने-सामने बैठते हैं या नहीं।
यदि दोनों नेता आमने-सामने आते हैं तो बहस में 18 लाख आवास की स्वीकृति, अब तक बने आवासों की संख्या, पूर्ववर्ती और वर्तमान सरकार के कार्यकाल के आंकड़े तथा केंद्र-राज्य की भूमिका प्रमुख मुद्दे बन सकते हैं।

